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प्रेमचंद्र जी पेड़ पर चढ़ते हुए, बुजुर्ग लेकिन ऊर्जावान प्रेमचंद्र जी, गाँव के परिवेश में प्रेरणादायक प्रेमचंद्र, शहरी लोग प्रेमचंद्र जी से प्रभावित, Budhimaan.com पर प्रेमचंद्र जी की प्रेरणादायक कहानी

बंदर कितना बूढ़ा हो जाए, गुलाटी मारना नहीं भूलता अर्थ, प्रयोग (Bandar kitna boodha ho jaye, Gulati marna nahi bhoolta)

परिचय: “बंदर कितना बूढ़ा हो जाए, गुलाटी मारना नहीं भूलता” यह कहावत व्यक्ति की जन्मजात प्रवृत्तियों और स्वभाविक क्षमताओं को

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"सावन के अंधे को सब हरा-ही-हरा इमेज", "Budhimaan.com पर कहावत की व्याख्या", "हरियाली और सूखे का प्रतीकात्मक चित्रण", "हिंदी साहित्य में लोकोक्तियाँ"

सावन के अंधे को सब हरा-ही-हरा दिखाई देता है अर्थ, प्रयोग (Savan ke andhe ko sab hi hara-hi-hara dikhai deta hai)

“सावन के अंधे को सब हरा-ही-हरा दिखाई देता है” एक लोकप्रिय हिंदी कहावत है, जिसका प्रयोग अक्सर उन परिस्थितियों में

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