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ठग मारे अनजान, बनिया मारे जान, अर्थ, प्रयोग (Thag mare anjaan, Baniya maare jaan)

“ठग मारे अनजान, बनिया मारे जान” यह हिंदी कहावत विभिन्न प्रकार के छल-कपट की प्रकृति को दर्शाती है। इस कहावत के माध्यम से, हम यह समझते हैं कि किस प्रकार अलग-अलग लोग अपने फायदे के लिए दूसरों को धोखा देते हैं, चाहे वे उन्हें जानते हों या नहीं।

परिचय: इस कहावत में “ठग” का अर्थ है वह व्यक्ति जो अनजान लोगों को धोखा देता है, और “बनिया” (व्यापारी) वह है जो अपने परिचितों या जानने वालों को धोखा देता है।

अर्थ: कहावत का तात्पर्य यह है कि एक ठग अजनबियों को धोखा देता है, जबकि एक व्यापारी अक्सर उन लोगों को धोखा देता है जिन्हें वह जानता है।

उपयोग: इस कहावत का प्रयोग यह दिखाने के लिए किया जाता है कि धोखाधड़ी किसी भी रूप में हो, यह अनैतिक है और इसके विभिन्न रूप हो सकते हैं।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, एक बाजार में एक ठग नकली सोना बेचकर अनजान लोगों को धोखा देता है। दूसरी ओर, एक बनिया अपने नियमित ग्राहकों को कम तौलकर या घटिया सामान बेचकर धोखा देता है।

समापन: यह कहावत हमें बताती है कि धोखाधड़ी के अलग-अलग रूप होते हैं और यह किसी भी रूप में गलत है। यह हमें सावधानी बरतने और विश्वास करने से पहले सोच-समझकर कदम उठाने की सीख देती है।

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ठग मारे अनजान, बनिया मारे जान कहावत पर कहानी:

एक छोटे से शहर में मुनीश नाम का एक ठग और विनीत नाम का एक बनिया (व्यापारी) रहते थे। मुनीश ने अपने ठगी के जाल में कई अनजान लोगों को फंसाया था। वह उन्हें झूठी बातें बताकर और फर्जी सौदे करके धोखा देता था।

दूसरी तरफ, विनीत एक बनिया था जो अपनी दुकान पर लोगों को कम तौलकर या निम्न गुणवत्ता का सामान बेचकर धोखा देता था। वह अपने नियमित ग्राहकों को भी नहीं बख्शता था और उन्हें भी इसी तरह का धोखा देता था।

“ठग मारे अनजान, बनिया मारे जान” – यह कहावत मुनीश और विनीत की कहानियों पर बिल्कुल सटीक बैठती थी। मुनीश ने अनजान लोगों को धोखा दिया, जबकि विनीत ने अपने जानने वालों को।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि चाहे धोखाधड़ी किसी भी रूप में हो, वह गलत है। यह हमें सतर्क रहने और विश्वास करने से पहले सोच-समझकर कदम उठाने का महत्व भी समझाती है।

शायरी:

ठग मारे अनजान, बनिया मारे जान,
दुनिया की इस चालाकी में, सबका अपना एक बयान।

अनजानों का दर्द ठग बेचता फिरे,
जानने वालों को बनिया घात लगाए बैठे।

छल की इस दुनिया में कौन किसे समझाए,
जिसकी चालाकी में वही दूसरों को उलझाए।

ठगी के इस खेल में, इंसानियत कहीं खो जाती है,
अपनों का दिल जब बनिया दुखाता है, तो विश्वास की डोर टूट जाती है।

दुनिया के इस रंगमंच पर, हर कोई अपना रोल अदा करता है,
ठग और बनिया, दोनों ही कहीं ना कहीं दिल दुखाता है।

 

ठग मारे अनजान, बनिया मारे जान शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of ठग मारे अनजान, बनिया मारे जान – Thag mare anjaan, Baniya maare jaan Proverb:

The Hindi proverb “Thag mare anjaan, Baniya maare jaan” illustrates the nature of different types of deceit and manipulation. Through this proverb, we understand how various people cheat others for their own benefit, regardless of whether they know them or not.

Introduction: In this proverb, “ठग” refers to a person who deceives strangers, while “बनिया” (merchant) refers to someone who cheats acquaintances or people he knows.

Meaning: The essence of the proverb is that a swindler cheats strangers, whereas a merchant often cheats those who he is acquainted with.

Usage: This proverb is used to show that deceit, in any form, is unethical and can manifest in various ways.

Examples:

-> Imagine a market where a swindler sells fake gold and cheats strangers. On the other hand, a merchant cheats his regular customers by under-weighing or selling inferior goods.

Conclusion: This proverb teaches us that there are different forms of cheating and all are wrong in any form. It also advises us to be cautious and think carefully before placing trust in others.

Story of Thag mare anjaan, Baniya maare jaan Proverb in English:

In a small town, there lived a swindler named Munish and a merchant named Vineet. Munish had trapped many strangers in his scams. He deceived them with false promises and fake deals.

On the other hand, Vineet, a merchant, cheated people at his shop by under-weighing or selling low-quality goods. He did not spare even his regular customers and deceived them in the same manner.

The proverb “ठग मारे अनजान, बनिया मारे जान” perfectly fit the stories of Munish and Vineet. Munish cheated strangers, whereas Vineet cheated those he knew.

This story teaches us that deception in any form is wrong. It also emphasizes the importance of being cautious and thoughtful before placing trust in others.

This story teaches us that relationships are often paradoxical, and different relationships can exist with various members of the same family. The proverb also tells us that each relationship has its own importance and feelings towards one person should not extend to another.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

क्या इस कहावत का शाब्दिक अर्थ लिया जाता है?

नहीं, इस कहावत का शाब्दिक अर्थ नहीं लिया जाता; यह धोखाधड़ी और शोषण के विभिन्न तरीकों को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाती है।

“ठग मारे अनजान, बनिया मारे जान” कहावत का महत्व क्या है?

इस कहावत का महत्व यह है कि यह हमें यह सिखाती है कि विभिन्न तरह के लोग विभिन्न तरीकों से धोखाधड़ी कर सकते हैं, चाहे शिकार जानकार हो या अनजान।

इस कहावत का उपयोग समाज में कैसे किया जा सकता है?

समाज में इस कहावत का उपयोग लोगों को विभिन्न प्रकार की धोखाधड़ी और शोषण के तरीकों के प्रति सचेत करने के लिए किया जा सकता है।

क्या इस कहावत का शिक्षाप्रद महत्व है?

हां, इस कहावत का शिक्षाप्रद महत्व यह है कि यह हमें सिखाती है कि धोखाधड़ी और शोषण से सावधान रहना चाहिए और समाज में विभिन्न तरीकों से होने वाली धोखाधड़ी को समझना चाहिए।

क्या यह कहावत आज के समय में भी प्रासंगिक है?

हां, यह कहावत आज के समय में भी प्रासंगिक है क्योंकि यह धोखाधड़ी और शोषण की विभिन्न विधियों को समझने में मदद करती है।

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