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सूखी तलाईया म मेंढक करय टर-टर, अर्थ, प्रयोग (Sukhi talaiyaa mein Mendhak karay tar-tar)

परिचय: हिंदी की लोकप्रिय कहावत “सूखी तलाईया म मेंढक करय टर-टर” असंभाव्य स्थितियों में आशा की किरण ढूंढने के मानवीय प्रवृत्ति को दर्शाती है। यह कहावत खुली आंखों से सपने देखने और उन्हें साकार करने की आशा को व्यक्त करती है।

अर्थ: कहावत का शाब्दिक अर्थ है कि एक सूखी हुई तलाईया में भी मेंढक टर-टर करता है, अर्थात् भले ही परिस्थितियां प्रतिकूल हों, लेकिन आशा और सपने हमेशा जीवंत रहते हैं।

उपयोग: इस कहावत का प्रयोग उन स्थितियों में किया जाता है जहां वास्तविकता और सपनों के बीच का अंतर अधिक होता है, फिर भी व्यक्ति आशावादी रहता है।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, एक छोटे से गांव का व्यक्ति जो अपनी साधारण जिंदगी में बड़े शहर में बड़े सपने देखता है। उसके पास संसाधनों की कमी हो सकती है, लेकिन उसकी आशाएं और सपने उसे हमेशा प्रेरित करते हैं।

समापन: “सूखी तलाईया म मेंढक करय टर-टर” कहावत हमें यह सिखाती है कि सपने देखना और उनमें विश्वास रखना मानवीय स्वभाव का हिस्सा है। यह हमें प्रेरित करती है कि हमें अपनी आशाओं को कभी नहीं खोना चाहिए, चाहे परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों। आखिरकार, यही सपने और आशाएं हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा और दिशा प्रदान करती हैं।

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सूखी तलाईया म मेंढक करय टर-टर कहावत पर कहानी:

एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में शुभ नाम का एक लड़का रहता था। शुभ का सपना था कि वह एक दिन बड़ा वैज्ञानिक बनेगा। लेकिन उसके गांव में न तो अच्छी शिक्षा की व्यवस्था थी और न ही उसके पास पढ़ाई के लिए ज्यादा संसाधन थे।

शुभ के सपने को देखकर गांव वाले अक्सर उस पर हंसते और कहते, “यह तो वैसे ही है जैसे सूखी तलाईया में मेंढक करय टर-टर।” लेकिन शुभ ने कभी हार नहीं मानी। वह रोज़ नदी किनारे बैठकर पढ़ाई करता और अपने सपनों में खो जाता।

एक दिन, गांव में एक वैज्ञानिक आए। उन्होंने शुभ की लगन और प्रतिभा को देखकर उसे शहर के एक प्रतिष्ठित विज्ञान संस्थान में पढ़ाई का मौका दिया। शुभ ने इस अवसर को भुनाया और अपनी मेहनत से वह वास्तव में एक दिन बड़ा वैज्ञानिक बन गया।

जब वह अपने गांव वापस आया, तो सभी गांव वाले हैरान रह गए। उन्होंने शुभ की सफलता को देखकर महसूस किया कि सपने, भले ही कितने असंभव क्यों न लगें, उन्हें सच किया जा सकता है।

शुभ की कहानी से हमें “सूखी तलाईया म मेंढक करय टर-टर” कहावत का अर्थ समझ में आता है। यह कहावत हमें सिखाती है कि भले ही परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल हों, अगर हमारे सपने मजबूत हैं और हमारी लगन दृढ़ है, तो हम किसी भी स्थिति में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

शायरी:

सूखी तलाई में टर-टर, सपनों की यही बात,

मेंढक की आस में, बारिश की वो सौगात।

खुली आंखों से ख्वाब, यही तो जीवन का राज,

हर सूखे में भी खिलता, उम्मीदों का वो साज।

असंभव को भी चुनूं, यही है मेरी फितरत,

सूखी तलाई में भी, देखूं मैं सपनों की बरसात।

सपनों की उस उड़ान में, मिलती है जिंदगी की राह,

जहां सूखे में भी खिले, आशा के वो फूल आह।

सूखी तलाईया का मेंढक, नहीं मानता हार,

सपनों की वो बारिश, आएगी एक दिन यार।

 

सूखी तलाईया म मेंढक करय टर-टर शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of सूखी तलाईया म मेंढक करय टर-टर – Sukhi talaiyaa mein Mendhak karay tar-tar Proverb:

Introduction: The popular Hindi proverb “Sukhi talaiyaa mein Mendhak karay tar-tar” illustrates the human tendency to find a ray of hope in improbable situations. This proverb expresses the hope of dreaming with open eyes and the aspiration to realize those dreams.

Meaning: The literal meaning of this proverb is that even in a dried-up pond, a frog croaks, implying that even in adverse circumstances, hope and dreams remain alive.

Usage: This proverb is used in situations where there is a significant gap between reality and dreams, yet the person remains optimistic.

Examples:

-> Consider a person from a small village who dreams of a big life in the city. They might lack resources, but their hopes and dreams always inspire them.

Conclusion: The proverb “Sukhi talaiyaa mein Mendhak karay tar-tar” teaches us that dreaming and believing in those dreams is a part of human nature. It motivates us to never lose our hopes, no matter how unfavorable the circumstances may be. Ultimately, these dreams and hopes provide us with the energy and direction to move forward.

Story of Sukhi talaiyaa mein Mendhak karay tar-tar Proverb in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a boy named Shubh. Shubh dreamed of becoming a great scientist one day. However, his village lacked good educational facilities, and he did not have many resources for his studies.

Seeing Shubh’s dreams, the villagers often laughed at him and said, “It’s like a frog croaking in a dry pond.” But Shubh never gave up. He used to sit by the river every day, study, and immerse himself in his dreams.

One day, a scientist visited the village. Impressed by Shubh’s dedication and talent, he offered him the opportunity to study at a prestigious science institute in the city. Shubh seized this opportunity and, with his hard work, eventually became a great scientist.

When he returned to his village, everyone was amazed. Seeing Shubh’s success, they realized that dreams, no matter how impossible they seem, can be achieved.

Shubh’s story helps us understand the meaning of the proverb “सूखी तलाईया म मेंढक करय टर-टर.” This proverb teaches us that even in the most adverse circumstances, if our dreams are strong and our determination is firm, we can achieve success in any situation.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

इस कहावत का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?

समाज में इस कहावत का प्रभाव यह है कि यह लोगों को बताती है कि किसी भी स्थिति में व्यर्थ शोर न करने का महत्व है।

इस कहावत का शिक्षा के क्षेत्र में क्या प्रभाव है?

शिक्षा के क्षेत्र में, यह कहावत यह दर्शाती है कि छात्रों को अप्रासंगिक और व्यर्थ बातों पर ध्यान न देकर उन्हें महत्वपूर्ण चीजों पर केंद्रित रहना चाहिए।

इस कहावत का नैतिक संदेश क्या है?

इस कहावत का नैतिक संदेश यह है कि हमें केवल उन्हीं स्थितियों में बोलना चाहिए जहां हमारी बातें प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हों।

इस कहावत का व्यावसायिक जीवन में क्या महत्व है?

व्यावसायिक जीवन में, यह कहावत यह बताती है कि कर्मचारियों और प्रबंधकों को केवल तभी बोलना चाहिए जब यह आवश्यक हो और उनकी बातें महत्वपूर्ण हों।

इस कहावत का राजनीतिक दृष्टिकोण से क्या महत्व है?

राजनीतिक दृष्टिकोण से, यह कहावत यह सिखाती है कि नेताओं को केवल तभी बोलना चाहिए जब उनके पास कहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण हो, न कि केवल ध्यान आकर्षित करने के लिए।

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