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ओठों निकली कोठों चढ़ी, अर्थ, प्रयोग (Othon nikli kothon chadhi)

परिचय: “ओठों निकली कोठों चढ़ी” यह हिंदी कहावत इस बात की ओर संकेत करती है कि एक बार जो शब्द हमारे मुख से निकल जाते हैं, वे व्यापक रूप से फैल जाते हैं और उन्हें गुप्त रख पाना मुश्किल होता है।

अर्थ: इस कहावत का अर्थ है कि जो कुछ भी हम बोलते हैं, वह शीघ्र ही फैल जाता है और उसे छिपाए रखना कठिन होता है। ‘ओठों निकली’ यानी मुंह से निकले शब्द और ‘कोठों चढ़ी’ का अर्थ है कि ये शब्द सभी तक पहुंच जाते हैं।

उपयोग: यह कहावत तब प्रयोग की जाती है जब हमें यह बताना होता है कि बोले गए शब्दों का प्रभाव व्यापक होता है और इन्हें गुप्त रखना संभव नहीं होता।

उदाहरण:

-> मान लीजिए किसी व्यक्ति ने अपने मित्र से कोई गोपनीय बात कही और वह बात धीरे-धीरे पूरे समुदाय में फैल गई। इस स्थिति में कहा जा सकता है कि “ओठों निकली कोठों चढ़ी”।

समापन: इस कहावत के माध्यम से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। एक बार बोले गए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते और उनका प्रभाव व्यापक हो सकता है। अतः, हमें विवेकपूर्ण और संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए।

ओठों निकली कोठों चढ़ी कहावत पर कहानी:

किसी छोटे से गाँव में नियांत नाम का एक किसान रहता था। एक दिन उसने अपने पड़ोसी से एक गोपनीय बात साझा की। उसने पड़ोसी से कहा कि यह बात किसी को न बताएं, लेकिन पड़ोसी ने उस बात को गाँव के एक और व्यक्ति से साझा कर दिया। धीरे-धीरे वह बात पूरे गाँव में फैल गई।

जब यह बात नियांत को पता चली तो वह बहुत आहत हुआ। उसने सोचा था कि उसकी गोपनीय बात सुरक्षित रहेगी, लेकिन यह बात पूरे गाँव में फैल चुकी थी। उसे समझ आया कि “ओठों निकली कोठों चढ़ी” यानी एक बार मुंह से निकली बात को फैलने से रोकना मुश्किल होता है।

नियांत ने इस घटना से एक महत्वपूर्ण सबक सीखा। उसे समझ आया कि जब भी कुछ बोले तो सोच-समझकर बोलना चाहिए, क्योंकि एक बार निकले शब्द वापस नहीं आते और उनका प्रभाव व्यापक होता है। उस दिन के बाद से, नियांत ने हमेशा अपने शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर किया।

शायरी:

ओठों से निकले शब्द, कहानी बन जाते हैं,

कोठों पर चढ़कर, वो राज़ खोल जाते हैं।

जो बात दिल में थी, वो लब पर आ गई,

ओठों से निकलकर, शहर भर में फैल गई।

कहते हैं शब्दों का जादू, हवा में उड़ता है,

गुप्त कही बात भी, सरेआम हो जाता है।

ओठों से निकला हर लफ्ज़, कहीं न कहीं बस जाता है,

कोठों पर चढ़कर, यह ज़िन्दगी का सबक बन जाता है।

चुप रहना है कला, बोलना भी एक फन,

शब्दों की दुनिया में, हर लफ्ज़ है अनमोल धन।

 

ओठों निकली कोठों चढ़ी शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of ओठों निकली कोठों चढ़ी – Othon nikli kothon chadhi Proverb:

Introduction: The Hindi proverb “Othon nikli kothon chadhi ” indicates that once words are spoken, they spread widely and become difficult to keep secret.

Meaning: The proverb means that whatever we speak quickly spreads and becomes hard to conceal. ‘ओठों निकली’ refers to words that come out of the mouth, and ‘कोठों चढ़ी’ implies that these words reach everyone.

Usage: This proverb is used when we need to express that the impact of spoken words is extensive and it’s impossible to keep them secret.

Examples:

-> Suppose a person shared a confidential matter with a friend, and gradually, this matter spread throughout the community. In this situation, it can be said that “Othon nikli kothon chadhi “.

Conclusion: This proverb teaches us that we should choose our words carefully. Once spoken, words cannot be taken back and their impact can be far-reaching. Therefore, we should use language that is wise and restrained.

Story of Othon nikli kothon chadhi Proverb in English:

In a small village, there lived a farmer named Niyant. One day, he shared a confidential matter with his neighbor and asked him not to tell anyone. However, the neighbor shared it with another person in the village. Gradually, the matter spread throughout the village.

When Niyant found out, he was deeply hurt. He had thought that his confidential matter would remain safe, but it had spread across the entire village. He realized the truth of “ओठों निकली कोठों चढ़ी,” meaning that once words leave the mouth, they are difficult to contain.

Niyant learned an important lesson from this incident. He understood that one should think carefully before speaking, as once spoken, words cannot be taken back and their impact can be widespread. From that day on, Niyant always chose his words very carefully.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

क्या यह कहावत आज के समय में भी प्रासंगिक है?

हां, यह कहावत आज के समय में भी प्रासंगिक है, खासकर सोशल मीडिया के युग में जहां जानकारी तेजी से फैलती है।

क्या इस कहावत का कोई ऐतिहासिक महत्व है?

इस कहावत का सीधा ऐतिहासिक महत्व नहीं है, लेकिन यह मानवीय संचार की प्रकृति को दर्शाती है।

इस कहावत का आधुनिक समाज में क्या प्रभाव है?

आधुनिक समाज में इस कहावत का प्रभाव यह है कि यह लोगों को सोच-समझकर बोलने की महत्वता की याद दिलाती है।

इस कहावत का साहित्य में क्या स्थान है?

साहित्य में इस कहावत का प्रयोग अक्सर संचार की शक्ति और उसके प्रभाव को दर्शाने के लिए किया जाता है।

क्या यह कहावत किसी विशेष क्षेत्र या समुदाय से जुड़ी हुई है?

नहीं, यह कहावत किसी विशेष क्षेत्र या समुदाय से नहीं जुड़ी हुई है; यह एक सामान्य मानवीय परिस्थिति को व्यक्त करती है।

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