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मोहरों की लूट और कोयलों पर छाप, अर्थ, प्रयोग(Mohron ki loot aur koylon par chaap)

परिचय: “मोहरों की लूट और कोयलों पर छाप” यह हिंदी कहावत विरोधाभासी स्थितियों और उनके परिणामों को दर्शाती है।

अर्थ: इस कहावत का अर्थ है कि कभी-कभी हम ऐसी चीजों पर समय और संसाधन व्यर्थ करते हैं जिनका कोई महत्व नहीं होता, जैसे कि कोयले पर छाप लगाना। वहीं, महत्वपूर्ण चीजें, जैसे कि मोहरें, अक्सर हमारी पकड़ से बाहर होती हैं।

उपयोग: यह कहावत तब प्रयोग की जाती है जब किसी को यह समझाना होता है कि उनका ध्यान महत्वहीन चीजों पर केंद्रित है, जबकि वे महत्वपूर्ण अवसरों या संसाधनों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

उदाहरण:

-> मान लीजिए एक कंपनी अपनी मार्केटिंग पर बहुत ध्यान दे रही है, लेकिन उत्पाद की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दे रही। यहाँ, “मोहरों की लूट और कोयलों पर छाप” कहावत इस स्थिति को बखूबी दर्शाती है।

समापन: इस कहावत से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें अपने संसाधनों और प्रयासों का सही उपयोग करना चाहिए और महत्वपूर्ण चीजों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपनी प्राथमिकताओं को सही ढंग से पहचानना चाहिए और महत्वहीन चीजों में अपना समय और ऊर्जा बर्बाद नहीं करनी चाहिए।

Hindi Muhavare Quiz

मोहरों की लूट और कोयलों पर छाप कहावत पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में मुनीश नाम का एक गरीब किसान रहता था। मुनीश बहुत मेहनती था, लेकिन उसकी मेहनत हमेशा गलत दिशा में जाती थी। उसके पास एक छोटी सी जमीन थी, जिस पर वह सब्जियां उगाता था। लेकिन वह अक्सर अपनी जमीन की उपजाऊ क्षमता को नजरअंदाज करता और अपना अधिकांश समय गांव के बाहर बेकार की चीजों में लगा देता।

एक दिन, गांव में एक समृद्ध व्यापारी आया। उसने मुनीश की जमीन को देखा और समझ गया कि वहां बहुत संभावनाएं हैं। उसने मुनीश को सलाह दी कि वह अपनी जमीन का सही उपयोग करे और उस पर अधिक मेहनत करे। लेकिन मुनीश ने उसकी सलाह नजरअंदाज कर दी और अपनी पुरानी आदतों में लगा रहा।

उसी दौरान, गांव के पास एक पहाड़ी पर कोयले की खदान मिली। मुनीश ने सोचा कि यह उसके लिए सुनहरा अवसर है। उसने अपनी सारी बचत खदान में लगा दी, लेकिन बदकिस्मती से, वह खदान निष्फल साबित हुई।

इस बीच, उसकी जमीन पर उसके पड़ोसी ने काम किया और वहां उगाई गई सब्जियों से अच्छी आमदनी कमाई। मुनीश ने जब यह देखा, तो उसे अहसास हुआ कि वह अपनी असली संपत्ति को नजरअंदाज कर रहा था और बेकार की चीजों में अपना समय और पैसा बर्बाद कर रहा था।

मुनीश ने सोचा, “मैंने वास्तविक ‘मोहरों की लूट’ को नजरअंदाज किया और ‘कोयलों पर छाप’ लगाने में अपना समय बर्बाद किया।” उस दिन से, उसने अपनी जमीन पर काम करना शुरू किया और जल्द ही वह भी समृद्ध हो गया।

शायरी:

खोजते फिरे खजाने, दूर बहुत दूर,
घर के मोहरों को भूल, चले कोयलों की ओर।
ख्वाब बिखरे पथरीले, धूल में गुम नजारे,
घर की मिट्टी सोना, जो समझे वो यारा।

दौलत की चाह में, भूले अपने खजाने,
खोया जहां में ऐसे, मानो बेगाने।
सच्चाई का दर्पण, जब सामने आया,
अपनी मिट्टी का मोल, तब जाकर समझ आया।

अपने घर की दौलत, जो न समझे बावरे,
भटकते रहे अंधेरे में, कोयलों की छांव में खोये।
जीवन की सच्चाई, यही तो सिखलाये,
मोहरों की लूट अपनी, कोयलों में न भूल जाये।

सफर लंबा है दोस्तों, पर मंजिल है प्यारी,
अपने घर की मोहरों को, न बनाओ बेचारी।
खोजो उस में वो सुख, जो कोयलों में नहीं,
अपने घर की रौशनी, जीवन की सच्ची ज़मीन।

 

मोहरों की लूट और कोयलों पर छाप शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of मोहरों की लूट और कोयलों पर छाप – Mohron ki loot aur koylon par chaap Proverb:

Introduction: The Hindi proverb “Mohron ki loot aur koylon par chaap” (literally, “the plunder of coins and the stamp on coal”) illustrates the ironic situations and their outcomes in life.

Meaning: This proverb implies that sometimes we waste our time and resources on insignificant matters, akin to marking coal, which is futile. Meanwhile, significant things, like coins, often remain out of our grasp.

Usage: The proverb is used to highlight when someone is focusing on trivial matters while overlooking important opportunities or resources.

Examples:

-> For instance, a company that focuses excessively on marketing but neglects the quality of its product exemplifies this proverb. Here, “Mohron ki loot aur koylon par chaap” aptly represents the situation.

Conclusion: This proverb teaches us the importance of properly utilizing our resources and efforts, focusing on what truly matters. It also emphasizes the need to recognize our priorities correctly and not to squander time and energy on inconsequential matters.

Story of Mohron ki loot aur koylon par chaap Proverb in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a poor farmer named Munish. Munish was hardworking, but his efforts were often misdirected. He owned a small piece of land where he grew vegetables, but he frequently overlooked its potential and wasted most of his time on unproductive activities outside the village.

One day, a wealthy merchant visited the village and noticed Munish’s land. He realized the land’s potential and advised Munish to make proper use of it and work harder on it. However, Munish ignored the advice and continued with his old habits.

Meanwhile, a coal mine was discovered near the village on a hill. Munish thought it was a golden opportunity for him. He invested all his savings in the mine, but unfortunately, it turned out to be unproductive.

At the same time, his neighbor worked on Munish’s land and earned a good income from the vegetables grown there. When Munish saw this, he realized that he had been ignoring his real asset and wasting his time and money on futile things.

Munish thought, “I ignored the real ‘plunder of coins’ and wasted my time on ‘stamping the coal’.” From that day, he started working on his land and soon became prosperous.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

इस कहावत में “मोहरों” का क्या मतलब है?

“मोहरों” से यहां तात्कालिक और मूल चीजों की बात की जा रही है, जिन्हें बनाने में समय लगता है और जो उच्च मूल्य पर बिकती हैं।

कोयलों की छाप का क्या अर्थ है इस कहावत में?

“कोयलों की छाप” से मुर्दा का अर्थ है, जिससे तत्कालिक और स्थायी रूप से बनी हुई चीजों का हवाला है जो सस्ती में बिकती हैं।

इस कहावत में सावधानी के लिए कौन-कौन से संकेत हैं?

यह कहावत सावधानी और अच्छे विचारधारा की आवश्यकता को बताती है, ताकि लोग नकली और असली के बीच भिन्नता को समझ सकें।

कैसे लोग इस कहावत का उपयोग अपने जीवन में कर सकते हैं?

लोग इस कहावत का अच्छे विचारधारा के साथ उपयोग करके, जीवन में सावधानी बरत सकते हैं और नकली चीजों से बच सकते हैं।

क्या इस कहावत का अनुसरण करना हमें व्यापार में कैसे मदद कर सकता है?

इस कहावत का अनुसरण करके व्यापारी लोग उच्च मूल्य और असली चीजों की पहचान कर सकते हैं, जिससे उनके व्यापार में विश्वास मजबूत हो सकता है।

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