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खाओ तो ठेंगे से न खाओ तो ठेंगे से अर्थ, प्रयोग (Khao to thenge se na khao to thenge se)

परिचय: ‘खाओ तो ठेंगे से न खाओ तो ठेंगे से’ एक प्रचलित हिंदी मुहावरा है जो अक्सर ऐसी स्थितियों में प्रयोग किया जाता है जहाँ व्यक्ति किसी भी निर्णय लेने पर उसे कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

अर्थ: इस मुहावरे का सीधा अर्थ है कि किसी भी परिस्थिति में, चाहे व्यक्ति कोई कार्य करे या न करे, उसे समस्याओं का सामना करना ही पड़ता है। यह मुहावरा उस दुविधा का वर्णन करता है जहाँ दोनों विकल्प समान रूप से अनुकूल नहीं होते।

प्रयोग: इस मुहावरे का प्रयोग अक्सर ऐसी परिस्थितियों में किया जाता है जहाँ व्यक्ति के पास कोई भी निर्णय उसके लिए अनुकूल नहीं होता। यह असहायता और विवशता की भावना को प्रकट करता है।

उदाहरण:

मान लीजिए किसी कार्यालय में एक कर्मचारी को बिना ओवरटाइम के अतिरिक्त काम करने को कहा जाता है। यदि वह इसे मना कर देता है, तो उसके बॉस नाराज हो सकते हैं। और यदि वह बिना ओवरटाइम के अतिरिक्त काम करता है, तो उसे अपने निजी समय का त्याग करना पड़ता है। यहां ‘खाओ तो ठेंगे से न खाओ तो ठेंगे से’ मुहावरे का प्रयोग किया जा सकता है।

निष्कर्ष: इस मुहावरे का महत्व इस बात में है कि यह जीवन की उन जटिल स्थितियों का वर्णन करता है जहां किसी भी निर्णय का परिणाम संतोषजनक नहीं होता। यह हमें यह भी सिखाता है कि कभी-कभी जीवन में हमें ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जहां हर विकल्प में कुछ न कुछ हानि छिपी होती है।

Hindi Muhavare Quiz

खाओ तो ठेंगे से न खाओ तो ठेंगे से मुहावरा पर कहानी:

एक छोटे से गांव में सुरेंद्र नामक एक किसान रहता था। सुरेंद्र बहुत मेहनती था, लेकिन उसकी किस्मत हमेशा उससे खेल करती थी। एक साल, उसके गांव में सूखा पड़ गया और उसकी फसल बर्बाद हो गई। फसल न होने के कारण, उस पर कर्ज चढ़ गया।

एक दिन, गांव के सेठ ने सुरेंद्र को बुलाया और कहा, “सुरेंद्र, मैं तुम्हें एक प्रस्ताव देता हूं। मैं तुम्हारे सारे कर्ज माफ कर दूंगा, लेकिन बदले में तुम्हें अपनी जमीन मुझे देनी होगी।”

सुरेंद्र दुविधा में पड़ गया। यदि वह सेठ की बात मान लेता, तो उसका कर्ज तो माफ हो जाता, लेकिन उसकी जमीन, जो उसके पूर्वजों की निशानी थी, उससे चली जाती। और यदि वह सेठ की बात नहीं मानता, तो उसे भारी कर्ज के बोझ तले दबना पड़ता।

सुरेंद्र की पत्नी ने कहा, “यह तो ‘खाओ तो ठेंगे से न खाओ तो ठेंगे से’ वाली बात हो गई। चाहे जो भी फैसला लो, मुश्किलें तो आनी ही हैं।”

सुरेंद्र ने बहुत सोच-विचार के बाद फैसला किया कि वह अपनी जमीन नहीं बेचेगा और किसी और तरीके से कर्ज चुकाने की कोशिश करेगा। उसे पता था कि रास्ता कठिन है, लेकिन उसने अपनी आत्मा की आवाज सुनी।

इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि जीवन में कई बार हमें ‘खाओ तो ठेंगे से न खाओ तो ठेंगे से’ जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है, जहां हर विकल्प में कुछ न कुछ समस्या छिपी होती है।

शायरी:

चुनाव हर इक का मुश्किल, फैसलों में बस ठेंगे हैं,

खाओ तो ठेंगे से, न खाओ तो भी ठेंगे हैं।

हंसी आती है इस दुनिया की रस्मों पे यारों,

जहां दर्द भी मिलता है, तो बस खेल के रंगे हैं।

जिंदगी गर एक पहेली है, तो हम भी कम नहीं,

आजमाइश में भी हमने, हर एक पल को जीया है।

‘खाओ तो ठेंगे से’ की बातें, हैं कितनी सच्ची,

जीवन के हर मोड़ पे, यही तो सीखा है।

 

खाओ तो ठेंगे से न खाओ तो ठेंगे से शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of खाओ तो ठेंगे से न खाओ तो ठेंगे से – Khao to thenge se na khao to thenge se Idiom:

Introduction: The Hindi idiom ‘खाओ तो ठेंगे से न खाओ तो ठेंगे से’ is a popular saying often used in situations where a person faces difficulties regardless of the decision they make.

Meaning: The literal meaning of this idiom is that in any situation, whether a person acts or not, they have to face problems. It describes the dilemma where both options are equally unfavorable.

Usage: This idiom is frequently used in circumstances where any decision a person makes is not beneficial for them. It expresses feelings of helplessness and compulsion.

Example:

Suppose in an office, an employee is asked to work extra without overtime pay. If he refuses, his boss might get angry. But if he agrees to work extra without overtime pay, he has to sacrifice his personal time. Here, the idiom ‘खाओ तो ठेंगे से न खाओ तो ठेंगे से’ can be used.

Conclusion: The significance of this idiom lies in the fact that it describes those complex situations in life where the outcome of any decision is not satisfying. It also teaches us that sometimes in life, we have to make decisions where each option has some hidden disadvantage.

Story of ‌‌Khao to thenge se na khao to thenge se Idiom in English:

In a small village, there lived a farmer named Surendra. Surendra was hardworking, but his fate always played tricks on him. One year, a drought hit his village, ruining his crops. Due to the failed harvest, he became burdened with debt.

One day, the village’s wealthy landlord called Surendra and said, “Surendra, I offer you a proposal. I will forgive all your debts, but in return, you must give me your land.”

Surendra found himself in a dilemma. If he agreed to the landlord, his debt would be forgiven, but he would lose his land, a legacy of his ancestors. On the other hand, if he refused, he would be crushed under the weight of the heavy debt.

Surendra’s wife remarked, “This is a situation of ‘damned if you do, damned if you don’t.’ No matter what decision you make, difficulties are bound to come.”

After much thought, Surendra decided not to sell his land and instead tried to find another way to pay off his debts. He knew the path was hard, but he listened to his conscience.

This story teaches us that life often presents us with ‘damned if you do, damned if you don’t’ situations, where every option has some hidden problem.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

क्या इस मुहावरे का कोई विशेष इतिहास है?

इस मुहावरे का विशेष इतिहास नहीं है, लेकिन यह बहुत पुराने समय से उपयोग में है।

क्या यह मुहावरा केवल हिंदी में ही होता है?

नहीं, यह मुहावरा हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं में भी मौजूद है, लेकिन उनके रूप और भाषा में थोड़ी बदलाव हो सकता है।

क्या मतलब है “खाओ तो ठेंगे से न खाओ तो ठेंगे से” का?

इस मुहावरे का मतलब है कि किसी स्थिति में जो कुछ भी किया जाए, उससे बुरा ही होगा।

क्या यह मुहावरा नकारात्मकता को दर्शाता है?

हाँ, यह मुहावरा नकारात्मकता को दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है। इससे यह बताया जाता है कि कुछ भी किया जाए, उसमें बुराई ही होगी।

क्या इस मुहावरे का उपयोग अधिकांशतः समाज में किया जाता है?

हां, यह मुहावरा लोकप्रियता में है और अधिकांशतः लोग इसका उपयोग करते हैं।

हिंदी मुहावरों की पूरी लिस्ट एक साथ देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

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