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जो टट्टू जीते संग्राम, तो क्यों खरचैं तुरकी दाम, अर्थ, प्रयोग (Jo Tattoo jite sangram, To kyun kharchen turki daam)

“जो टट्टू जीते संग्राम, तो क्यों खरचैं तुरकी दाम” यह हिंदी की एक प्रचलित कहावत है, जिसका संदर्भ है कि यदि छोटे संसाधनों या व्यक्तियों से काम संपन्न हो जाता है, तो महंगे और बड़े संसाधनों पर धन खर्च करने की क्या आवश्यकता है।

परिचय: यह कहावत जीवन और व्यापार में सादगी और किफायती तरीकों की महत्वपूर्णता पर बल देती है। इसका उपयोग उन स्थितियों में होता है जहां सरल और कम खर्चीले साधनों से भी उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

अर्थ: इस कहावत का मूल अर्थ है कि यदि छोटे या साधारण संसाधनों से किसी कार्य को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया जा सकता है, तो महंगे और विशाल संसाधनों पर धन व्यय करने की आवश्यकता नहीं होती।

उपयोग: यह कहावत व्यापारिक निर्णयों, प्रबंधन रणनीतियों, और यहां तक कि व्यक्तिगत जीवन में भी लागू होती है, जहां संसाधनों का समझदारी से उपयोग करने की बात कही जाती है।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, एक छोटी कंपनी ने सीमित संसाधनों के साथ एक बड़ी परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस स्थिति में, “जो टट्टू जीते संग्राम, तो क्यों खरचैं तुरकी दाम” कहावत प्रासंगिक होती है।

समापन: इस कहावत से हमें यह सिख मिलती है कि साधनों का समझदारी से चयन और उपयोग महत्वपूर्ण है। यह याद दिलाता है कि किसी भी कार्य को करने के लिए सदैव महंगे और बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती; कभी-कभी छोटे और साधारण संसाधन भी बड़े कार्यों को संपन्न कर सकते हैं।

Hindi Muhavare Quiz

जो टट्टू जीते संग्राम, तो क्यों खरचैं तुरकी दाम कहावत पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में विनीत नामक एक किसान रहता था। विनीत के पास एक छोटा सा खेत था और वह उसमें विभिन्न प्रकार की फसलें उगाता था। एक दिन, गांव में एक बड़ा व्यापारी आया जो बड़े-बड़े ट्रैक्टरों और महंगी मशीनों से खेती करता था। उसने गांव के लोगों को उसके तरीके से खेती करने की सलाह दी।

विनीत ने भी उस व्यापारी की बातों में रुचि दिखाई, लेकिन उसके पास इतना धन नहीं था कि वह महंगी मशीनें खरीद सके। इसलिए उसने अपने पुराने तरीकों से ही खेती करने का निर्णय किया। विनीत ने अपने छोटे टट्टू का उपयोग करके और अपनी मेहनत से खेती की।

कुछ महीनों बाद, जब फसल कटाई का समय आया, तो विनीत के खेत से उत्कृष्ट फसल प्राप्त हुई। वहीं, दूसरी तरफ, महंगे उपकरणों का उपयोग करने वाले व्यापारी को उतनी अच्छी फसल नहीं मिली। इस परिणाम से गांव के लोग हैरान रह गए।

तब गांव के बुजुर्गों ने कहा, “जो टट्टू जीते संग्राम, तो क्यों खरचैं तुरकी दाम।” उन्होंने समझाया कि विनीत की सादगी और मेहनत ने उसे सफलता दिलाई, और महंगे उपकरणों का उपयोग करने की तुलना में उसका साधारण तरीका ज्यादा प्रभावी साबित हुआ।

इस कहानी से गांववालों ने सीखा कि सफलता के लिए हमेशा महंगे संसाधनों की जरूरत नहीं होती। कई बार, सादगी और मेहनत ही सफलता की कुंजी होती है।

शायरी:

छोटे से टट्टू ने दिखाया कमाल,

बड़े तुरंगों का क्या हुआ हाल।

महंगी दामों की बातें हैं बेमानी,

जब जीत हासिल हो जाए छोटी चीजों से जानी।

मेहनत और सादगी में है असली जादू,

वो ही ले आए खुशहाली की बरसात बादलू।

खर्च करें तुरकी दाम, जब हो जरूरत विशेष,

पर छोटे संसाधनों से भी हो सकते हैं काम अविशेष।

जिसने समझा यह सबक, वो हुआ कामयाब,

‘जो टट्टू जीते संग्राम’, वही है असली नवाब।

सादगी में भी छुपा है सफलता का राज,

यही है जीवन की सच्ची और अनमोल साज।

 

जो टट्टू जीते संग्राम, तो क्यों खरचैं तुरकी दाम शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of जो टट्टू जीते संग्राम, तो क्यों खरचैं तुरकी दाम – Jo Tattoo jite sangram, To kyun kharchen turki daam Proverb:

The Hindi proverb “Jo Tattoo jite sangram, To kyun kharchen turki daam” translates to “If a small horse can win the battle, then why spend on a Turkish horse?” This proverb is commonly used to highlight the importance of simplicity and cost-effectiveness in life and business. It suggests that if a task can be successfully accomplished with modest means, there’s no need to expend on more costly and grand resources.

Introduction: This proverb underscores the value of using simple and less expensive means to achieve outstanding results. It is often used in situations where excellent outcomes can be achieved with simple and cost-effective methods.

Meaning: The core meaning of this proverb is that if small or ordinary resources can successfully complete a task, there is no need to spend money on expensive and large resources.

Usage: This proverb is applicable in business decisions, management strategies, and even personal life, where wise utilization of resources is recommended.

Examples:

-> For instance, suppose a small company successfully completes a major project with limited resources. In this case, the proverb “जो टट्टू जीते संग्राम, तो क्यों खरचैं तुरकी दाम” becomes relevant.

Conclusion: This proverb teaches us the importance of prudent selection and use of resources. It reminds us that not all tasks require expensive and large resources; sometimes, smaller and simpler resources can also accomplish significant tasks.

Story of Jo Tattoo jite sangram, To kyun kharchen turki daam Proverb in English:

In a small town, there lived two merchants named Vikas and Abhay. Vikas’s business was in competition with Abhay’s father, and there was a business rivalry between the two. However, the relationship between Abhay and Vikas was quite different.

Abhay, who had come to assist his father in business, developed a personal relationship with Vikas. The two young businessmen shared several common interests, and their friendship was growing stronger day by day.

In Vikas’s heart, the business animosity he held was towards Abhay’s father, not towards Abhay. Vikas once said, “Though I have business enmity with Abhay’s father, my relationship with Abhay is different. ‘Baap se bair, poot se sagai.'”

This story teaches us that relationships are often paradoxical, and different relationships can exist with various members of the same family. The proverb also tells us that each relationship has its own importance and feelings towards one person should not extend to another.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

इस कहावत का आज के समय में क्या महत्व है?

आज के समय में यह कहावत दक्षता और व्यावहारिकता की महत्वपूर्णता को दर्शाती है, यह बताती है कि हमेशा महंगे संसाधनों की जरूरत नहीं होती।

क्या इस कहावत का सामाजिक जीवन पर भी कोई प्रभाव पड़ता है?

हाँ, इस कहावत का सामाजिक जीवन पर प्रभाव यह है कि यह सामाजिक समस्याओं के समाधान में सरल और किफायती उपायों की अहमियत को बताती है।

इस कहावत का व्यापार और वित्तीय निर्णयों में क्या महत्व है?

व्यापार और वित्तीय निर्णयों में, इस कहावत का महत्व यह है कि यह लागत-कार्यकुशलता और बजटीय प्रबंधन के महत्व को उजागर करती है।

इस कहावत का शिक्षा और ज्ञान पर क्या प्रभाव है?

शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में, इस कहावत का प्रभाव यह है कि यह सरल और बुनियादी शिक्षा के महत्व को बताती है, जो कई बार जटिल और महंगी शिक्षा से अधिक प्रभावी होती है।

क्या इस कहावत का नेतृत्व और मानव संसाधन प्रबंधन में कोई महत्व है?

हाँ, नेतृत्व और मानव संसाधन प्रबंधन में इस कहावत का महत्व यह है कि सरल और प्रभावी नेतृत्व शैली अक्सर जटिल और महंगी प्रबंधन तकनीकों से बेहतर परिणाम देती है।

स कहावत का सामाजिक और आर्थिक निर्णयों पर क्या प्रभाव है?

सामाजिक और आर्थिक निर्णयों पर इस कहावत का प्रभाव यह है कि यह सादगी और किफायती निर्णयों की महत्ता को बताती है, जो अक्सर महंगे और जटिल उपायों की तुलना में अधिक सफल और संतोषजनक होते हैं।

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