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जो धावे सो पावे, जो सोवे सो खोवे, अर्थ, प्रयोग (Jo dhave so paave, Jo sove so khove)

परिचय: “जो धावे सो पावे, जो सोवे सो खोवे” एक प्रसिद्ध हिंदी कहावत है जो कर्म और प्रयत्न की महत्ता को रेखांकित करती है।

अर्थ: इस कहावत का अर्थ है कि जो व्यक्ति प्रयास करता है, वही सफलता प्राप्त करता है, जबकि जो निष्क्रिय रहता है या प्रयत्न नहीं करता, वह अवसर खो देता है।

उपयोग: यह कहावत सामान्य जीवन, शिक्षा, करियर, और व्यापारिक उद्यमों में लागू होती है, जहाँ सतत प्रयास और सक्रियता महत्वपूर्ण होती है।

उदाहरण:

-> उदाहरण के तौर पर, एक छात्र जो पढ़ाई में लगातार मेहनत करता है, वह अच्छे अंक प्राप्त करता है, जबकि जो छात्र पढ़ाई से विमुख रहता है, वह पिछड़ जाता है।

समापन: इस कहावत से हमें यह सिखने को मिलता है कि जीवन में सफलता और प्रगति के लिए सतत प्रयास और कर्मठता अत्यंत आवश्यक हैं। निष्क्रियता और आलस्य से केवल अवसरों का नुकसान होता है। अतः, यह कहावत हमें सक्रिय और प्रयासशील रहने का महत्व समझाती है।

Hindi Muhavare Quiz

जो धावे सो पावे, जो सोवे सो खोवे कहावत पर कहानी:

एक छोटे से गांव में दो भाई विशाल और अभय रहते थे। विशाल हमेशा मेहनती और सक्रिय रहता था, जबकि अभय आलसी और निष्क्रिय था।

एक बार गांव में एक बड़ा मेला लगा, जहाँ एक प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले को एक सोने की मुद्रा मिलनी थी। विशाल ने तुरंत प्रतियोगिता में भाग लेने का निर्णय किया, जबकि अभय ने इसे बेकार समझकर आविशाल करना उचित समझा।

प्रतियोगिता का कार्य एक पहेली को सुलझाना था। विशाल ने पूरी लगन और मेहनत से पहेली को हल किया और सोने की मुद्रा जीती। वहीं अभय, जो प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया, उसे कुछ नहीं मिला।

इस घटना से अभय को यह समझ आया कि “जो धावे सो पावे, जो सोवे सो खोवे”। उसे अहसास हुआ कि अगर वह भी विशाल की तरह मेहनत और प्रयास करता, तो शायद वह भी कुछ प्राप्त कर सकता था। उसने तय किया कि आगे से वह हर मौके का फायदा उठाएगा और अपने जीवन में सक्रिय रहेगा।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि जीवन में सफलता और उपलब्धियाँ प्राप्त करने के लिए प्रयास और सक्रियता अत्यंत आवश्यक हैं। जो लोग आलस्य और निष्क्रियता में अपना समय बिताते हैं, वे अवसरों को खो देते हैं।

शायरी:

जो चला जिंदगी की राह पर, वही पाया मंजिल का पता,

जो बैठा रहा आलस में, उसने खोया हर एक खजाना।

धूप में जलकर, राहों में चलकर, जो सपने बुने हैं मैंने,

उन सपनों की ताबीर में, अपनी मेहनत का रंग है भरने।

जो सोया सपनों में, खो गया वो तारों के पार,

जो धावा बादलों की ओर, उसने पाया आसमान सारा।

कहते हैं जिंदगी चुनौतियों का नाम है, पर ये भी तो सच है,

जो धावे सो पावे, जो सोवे सो खोवे, ये जिंदगी की राह का उसूल है।

हर कदम पर इम्तिहान है, पर हिम्मत न हारना मेरे दोस्त,

जिंदगी की इस दौड़ में, तेरी मेहनत ही तेरी सबसे बड़ी ताकत होस्त।

 

जो धावे सो पावे, जो सोवे सो खोवे शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of जो धावे सो पावे, जो सोवे सो खोवे – Jo dhave so paave, Jo sove so khove Proverb:

Introduction: “जो धावे सो पावे, जो सोवे सो खोवे” is a well-known Hindi proverb that emphasizes the importance of action and effort.

Meaning: The proverb means that those who make an effort achieve success, while those who remain inactive or do not make an effort, lose opportunities.

Usage: This proverb is applicable in everyday life, education, career, and business ventures, where continuous effort and activity are crucial.

Examples:

-> For instance, a student who consistently works hard in studies achieves good grades, whereas a student who neglects studies falls behind.

Conclusion: This proverb teaches us that continuous effort and diligence are essential for success and progress in life. Inactivity and laziness lead only to the loss of opportunities. Therefore, this proverb emphasizes the importance of being active and making efforts.

Story of Jo dhave so paave, Jo sove so khove Proverb in English:

In a small village, there lived two brothers, Vishal and Abhay. Vishal was always hardworking and active, while Abhay was lazy and inactive.

Once, a big fair was organized in the village, featuring a competition with the prize of a gold coin. Vishal decided to participate immediately, but Abhay dismissed it as pointless and chose not to participate.

The competition involved solving a puzzle. Vishal solved it with dedication and hard work and won the gold coin. Abhay, who did not participate, gained nothing.

This incident made Abhay realize the truth of the proverb, “जो धावे सो पावे, जो सोवे सो खोवे” (He who strives attains, he who sleeps loses). He understood that if he had put in effort like Vishal, he too could have achieved something. He resolved to seize every opportunity and be active in life from then on.

This story teaches us that effort and activity are essential for success and achievements in life. Those who spend their time in laziness and inactivity end up losing opportunities.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

क्या यह कहावत केवल शारीरिक परिश्रम की बात करती है?

नहीं, यह कहावत शारीरिक के साथ-साथ मानसिक परिश्रम की भी बात करती है।

क्या इस कहावत का कोई विशेष संदर्भ है?

इस कहावत का संदर्भ जीवन में सक्रियता और उत्साह के महत्व से जुड़ा हुआ है।

क्या इस कहावत का उपयोग बच्चों को सिखाने में किया जा सकता है?

हां, बच्चों को परिश्रम और उद्यमिता का महत्व समझाने के लिए इस कहावत का उपयोग किया जा सकता है।

क्या इस कहावत का कोई विदेशी समकक्ष है?

इसका अंग्रेजी में समकक्ष है “Fortune favors the bold” या “No pain, no gain.”

क्या इस कहावत का उपयोग आत्म-प्रेरणा के लिए किया जा सकता है?

हां, इस कहावत का उपयोग व्यक्तिगत प्रेरणा और आत्म-उत्थान के लिए किया जा सकता है।

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