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जिसके पास नहीं पैसा, वह भलामानस कैसा, अर्थ, प्रयोग (Jiske paas nahi paisa, wah bhalmanas kaisa)

परिचय: हिंदी की यह कहावत “जिसके पास नहीं पैसा, वह भलामानस कैसा” समाज में धन के महत्व और चरित्र की उपेक्षा को दर्शाती है। यह बताती है कि कैसे समाज अक्सर धनी व्यक्तियों को विशेष महत्व देता है, भले ही उनका चरित्र कैसा भी हो, जबकि गरीब व्यक्तियों को कम महत्व दिया जाता है, चाहे उनका चरित्र कितना भी अच्छा क्यों न हो।

अर्थ: इस कहावत का अर्थ है कि जो व्यक्ति धनी नहीं है, समाज उसे अच्छा व्यक्ति नहीं मानता, भले ही उसके अंदर कितनी भी अच्छाइयां क्यों न हों।

उपयोग: इस कहावत का प्रयोग उस स्थिति में किया जाता है जहां धन के आधार पर व्यक्तियों का मूल्यांकन होता है, उनके चरित्र या गुणों के बजाय।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, एक गांव में एक धनी व्यक्ति और एक गरीब व्यक्ति रहते हैं। धनी व्यक्ति का व्यवहार अक्सर उद्धत और असभ्य होता है, फिर भी गांव वाले उसे आदर देते हैं। वहीं, गरीब व्यक्ति चाहे कितना भी अच्छा और सहायक क्यों न हो, उसे कम महत्व दिया जाता है।

समापन: “जिसके पास नहीं पैसा, वह भलामानस कैसा” यह कहावत हमें सिखाती है कि समाज में अक्सर धन को चरित्र से अधिक महत्व दिया जाता है। यह हमें यह भी बताती है कि हमें व्यक्तियों का मूल्यांकन उनके धन के आधार पर नहीं, बल्कि उनके चरित्र और गुणों के आधार पर करना चाहिए।

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जिसके पास नहीं पैसा, वह भलामानस कैसा कहावत पर कहानी:

एक छोटे से गांव में दो व्यक्ति रहते थे – एक धनी व्यापारी विशाल और दूसरे एक गरीब किसान मुनीश। विशाल के पास बहुत सारी संपत्ति थी और वह अपनी धन-संपदा के कारण गांव में काफी प्रतिष्ठित था। दूसरी ओर, मुनीश एक साधारण और ईमानदार इंसान था, जो अपनी मेहनत से अपने परिवार का पालन-पोषण करता था।

एक दिन गांव में एक समारोह हुआ जिसमें सभी ग्रामीण जुटे। विशाल ने अपने धन का प्रदर्शन करते हुए बड़े-बड़े दान किए, जिससे उसे सभी की प्रशंसा मिली। हालांकि, उसका व्यवहार अहंकारी और असभ्य था, लेकिन फिर भी लोग उसकी इज्जत करते थे।

दूसरी ओर, मुनीश ने अपनी क्षमता अनुसार छोटा सा दान दिया और समारोह में मदद की। उसका व्यवहार सभी के प्रति नम्र और सहायक था, लेकिन लोगों ने उसकी सराहना नहीं की।

इस घटना से मुनीश को बहुत दुख हुआ। उसने सोचा, “जिसके पास नहीं पैसा, वह भलामानस कैसा।” उसे यह एहसास हुआ कि समाज अक्सर धन को अधिक महत्व देता है, भले ही व्यक्ति का चरित्र कैसा भी हो।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि समाज में अक्सर धन को चरित्र से अधिक महत्व दिया जाता है। यह हमें यह भी सिखाती है कि हमें व्यक्तियों का मूल्यांकन उनके धन के आधार पर नहीं, बल्कि उनके चरित्र और गुणों के आधार पर करना चाहिए।

शायरी:

जिसके पास धन नहीं, उसका समाज में क्या बात,

“जिसके पास नहीं पैसा, वह भलामानस कैसा”, यही है सच्चाई की आवाज।

पैसे की चमक में खो गए, इंसानियत के असली रंग,

जहां धन है, वहां सम्मान है, यही दुनिया का ढंग।

गरीब की मेहनत पर कोई ना डाले नजर,

धनी का अहंकार भी लगता सबको अजर।

जिसकी जेब खाली, उसका क्या सम्मान,

धन के आगे सच्चाई का है यहां कौन मान।

अमीरी में छिपी झूठी शान, गरीबी में सच्ची पहचान,

जिसके पास नहीं पैसा, उसकी भलाई का ना कोई ठिकान।

 

जिसके पास नहीं पैसा, वह भलामानस कैसा शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of जिसके पास नहीं पैसा, वह भलामानस कैसा – Jiske paas nahi paisa, wah bhalmanas kaisa Proverb:

Introduction: The Hindi proverb “Jiske paas nahi paisa, wah bhalmanas kaisa” highlights the significance of wealth in society and the neglect of character. It illustrates how society often values wealthy individuals regardless of their character, while poor individuals are undervalued, no matter how virtuous they may be.

Meaning: The proverb means that a person who is not wealthy is not considered good by society, no matter how many virtues they possess.

Usage: This proverb is used in situations where people are judged based on their wealth rather than their character or qualities.

Examples:

-> For instance, in a village, there is a rich person and a poor person. The rich person often behaves arrogantly and rudely, but the villagers respect him. On the other hand, even if the poor person is good and helpful, he is given less importance.

Conclusion: The proverb “जिसके पास नहीं पैसा, वह भलामानस कैसा” teaches us that society often values wealth over character. It also tells us that we should evaluate individuals based on their character and qualities, rather than their wealth.

Story of Jiske paas nahi paisa, wah bhalmanas kaisa Proverb in English:

In a small village, there were two individuals – a wealthy merchant named Vishal and a poor farmer named Munish. Vishal owned a lot of property and was highly respected in the village because of his wealth. On the other hand, Munish was a simple and honest man who supported his family through his hard work.

One day, a ceremony was held in the village, attended by all the villagers. Vishal, flaunting his wealth, made large donations, earning everyone’s praise. However, despite his arrogant and rude behavior, people respected him.

Meanwhile, Munish, according to his capacity, made a small donation and helped in the ceremony. His behavior was humble and helpful towards everyone, but his contributions were not appreciated.

This incident deeply saddened Munish. He thought to himself, “What good is a man without money?” He realized that society often values wealth over character, regardless of the individual’s nature.

This story teaches us that in society, wealth is often valued more than character. It also instructs us to evaluate individuals based on their character and qualities, rather than their wealth.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

इस कहावत का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?

समाज में इस कहावत का प्रभाव यह है कि लोग धनी व्यक्तियों को अधिक सम्मान और महत्व देते हैं, चाहे उनके चरित्र कैसे भी हों।

इस कहावत का व्यक्तिगत जीवन में क्या महत्व है?

व्यक्तिगत जीवन में, यह कहावत हमें यह सिखाती है कि हमें व्यक्ति के धन के बजाय उसके चरित्र को महत्व देना चाहिए।

इस कहावत का शिक्षा के क्षेत्र में क्या प्रभाव है?

शिक्षा के क्षेत्र में, इस कहावत से यह सिखने को मिलता है कि धन और सामाजिक स्थिति के बजाय ज्ञान और चरित्र को महत्व देना चाहिए।

इस कहावत का नैतिक संदेश क्या है?

इस कहावत का नैतिक संदेश यह है कि व्यक्ति की असली कीमत उसके धन से नहीं, बल्कि उसके चरित्र और कर्मों से होती है।

इस कहावत का व्यावसायिक जीवन में क्या महत्व है?

व्यावसायिक जीवन में, यह कहावत यह बताती है कि कैसे व्यावसायिक सफलता और धन से व्यक्ति की प्रतिष्ठा और महत्व का आकलन किया जाता है।

इस कहावत का राजनीतिक दृष्टिकोण से क्या महत्व है?

राजनीतिक दृष्टिकोण से, यह कहावत यह दर्शाती है कि राजनीतिक प्रभाव और सत्ता अक्सर धनी व्यक्तियों के हाथ में होती है, और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा उच्च होती है।

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