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झगड़े की तीन जड़, जन, जमीन, जर, अर्थ, प्रयोग (Jhagde ki teen jad, Jan, Jameen, Jar)

परिचय: “झगड़े की तीन जड़, जन, जमीन, जर” एक प्राचीन हिंदी कहावत है जो कहती है कि दुनिया में अधिकांश झगड़े तीन कारणों से होते हैं: महिलाएं (जन), भूमि (जमीन), और धन (जर)।

अर्थ: इस कहावत का अर्थ है कि अधिकांश संघर्ष और विवाद इन तीन मूल कारणों से उत्पन्न होते हैं। यह जीवन के तीन महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाता है जो अक्सर संघर्ष का कारण बनते हैं।

उपयोग: यह कहावत संघर्षों की जड़ों को समझने में मदद करती है और इसका उपयोग सामाजिक, राजनीतिक या व्यक्तिगत विवादों के मूल कारणों को समझाने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, दो परिवारों के बीच जमीन को लेकर विवाद होता है, या दो व्यक्तियों के बीच धन संबंधी मतभेद होते हैं, या फिर दो समुदायों के बीच महिला संबंधी मामलों पर विवाद होता है, तो यह कहावत उनके झगड़ों के मूल कारण को बताती है।

समापन: “झगड़े की तीन जड़, जन, जमीन, जर” कहावत हमें यह सिखाती है कि संघर्षों के पीछे अक्सर ये तीन मूल कारण होते हैं। यह हमें यह समझने की ओर प्रेरित करती है कि संघर्षों के मूल में अक्सर ये तीन तत्व होते हैं और इन्हें समझकर ही हम शांति और समझौते की ओर बढ़ सकते हैं।

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झगड़े की तीन जड़, जन, जमीन, जर कहावत पर कहानी:

एक छोटे गाँव में, सुभाष और मुनीश नामक दो भाई रहते थे। उनके पास एक समान विरासत में मिली बड़ी जमीन थी, और दोनों भाइयों की अच्छी-खासी कमाई थी।

जैसे-जैसे समय बीता, सुभाष और मुनीश के बीच जमीन को लेकर विवाद शुरू हो गया। सुभाष जमीन का बड़ा हिस्सा चाहता था, जबकि मुनीश का मानना था कि उसे अधिक धन मिलना चाहिए क्योंकि उसने जमीन को उपजाऊ बनाने में अधिक मेहनत की थी।

इस विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब मुनीश के बेटे ने सुभाष की बेटी से शादी करने का प्रस्ताव रखा। दोनों परिवारों के बीच इस रिश्ते को लेकर भी मतभेद उत्पन्न हो गया, और जल्द ही यह एक बड़े संघर्ष में बदल गया।

जमीन और धन के अलावा, अब इस झगड़े में जन (रिश्ते) भी शामिल हो गए थे। गाँव के बुजुर्गों ने इस स्थिति पर विचार करते हुए “झगड़े की तीन जड़, जन, जमीन, जर” कहावत का उल्लेख किया।

अंततः, दोनों परिवारों ने समझा कि उनका विवाद इन्हीं तीन कारणों से प्रेरित था। उन्होंने अपने मतभेदों को सुलझाने का निर्णय लिया और एक दूसरे के प्रति समझ और सहयोग की भावना अपनाई। इस कहानी से यह सिख मिलती है कि संघर्षों के मूल में अक्सर ये तीन तत्व होते हैं और उन्हें समझने व सुलझाने से ही शांति संभव है।

शायरी:

जन, जमीन, जर की बातों में, दिलों में उठते तूफान,

जीवन की इस राह में, बस यही हैं झगड़े की जान।

जब जमीन के लिए दिल लड़ते, जर बन जाता अभिमान,

और जब जन की बात आती, तो टूटते हर बंधन के मान।

अहंकार में जब जन भिड़ते, दिखता नहीं कोई समाधान,

जमीन और जर के चक्कर में, खो जाता हर इंसान।

कहते हैं ज्यों नकटे को आरसी, जग में यही है सच्चाई,

जन, जमीन, जर के चक्रव्यूह में, खोते जाते हैं भाई-भाई।

इस झगड़े की जड़ को समझ, लाओ दिलों में प्रेम की बहार,

जन, जमीन, जर से ऊपर है, मानवता का संसार।

 

झगड़े की तीन जड़, जन, जमीन, जर शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of झगड़े की तीन जड़, जन, जमीन, जर – Jhagde ki teen jad, Jan, Jameen, Jar Proverb:

Introduction: “Jhagde ki teen jad, Jan, Jameen, Jar” is an ancient Hindi proverb stating that most conflicts in the world arise from three reasons: Women (People), Land, and Wealth.

Meaning: The proverb implies that most conflicts and disputes originate from these three fundamental reasons. It highlights three significant aspects of life that often lead to conflicts.

Usage: The proverb helps in understanding the roots of conflicts and is used to explain the underlying causes of social, political, or personal disputes.

Examples:

-> For instance, there could be a dispute between two families over land, or disagreements between two individuals over financial matters, or conflicts between communities over issues related to women. This proverb identifies these as the root causes of such disputes.

Conclusion: The proverb “Jhagde ki teen jad, Jan, Jameen, Jar” teaches us that these three factors are often behind conflicts. It encourages us to understand that these elements are usually at the heart of disputes and that recognizing and addressing them is key to moving towards peace and resolution.

Story of Jhagde ki teen jad, Jan, Jameen, Jar Proverb in English:

In a small village lived two brothers, Subhash and Munish, who had inherited a large piece of land equally and both had substantial earnings.

As time passed, a dispute over the land began between Subhash and Munish. Subhash wanted a larger portion of the land, while Munish believed he deserved more money as he had worked harder to make the land fertile.

The conflict took a new turn when Munish’s son proposed to marry Subhash’s daughter. This proposal also created differences between the two families, soon escalating into a major conflict.

In addition to land and wealth, relationships (people) also became a part of the dispute. The village elders, reflecting on the situation, mentioned the proverb “The three roots of conflict: people, land, wealth.”

Eventually, both families realized that their dispute was driven by these three reasons. They decided to resolve their differences and adopted an attitude of understanding and cooperation towards each other. This story teaches that conflicts often stem from these three elements, and understanding and resolving them is the key to peace.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

इस कहावत से हमें क्या सीखने को मिलता है?

इस कहावत से हमें यह सीखने को मिलता है कि अधिकांश झगड़ों के पीछे कुछ मुख्य कारण होते हैं और उन्हें समझकर हम विवादों को रोक सकते हैं।

इस कहावत का व्यक्तिगत जीवन में क्या महत्व है?

व्यक्तिगत जीवन में, यह कहावत हमें सिखाती है कि हमें लोगों, भूमि और धन से जुड़े विवादों से सावधान रहना चाहिए और उन्हें समझदारी से सुलझाना चाहिए।

क्या यह कहावत सामाजिक और पेशेवर जीवन में भी लागू होती है?

हां, यह कहावत सामाजिक और पेशेवर जीवन में भी लागू होती है, क्योंकि इन क्षेत्रों में भी लोग, भूमि और धन से संबंधित झगड़े आम होते हैं।

“झगड़े की तीन जड़, जन, जमीन, जर” कहावत का पारिवारिक जीवन में क्या महत्व है?

पारिवारिक जीवन में, यह कहावत इस बात का संकेत देती है कि पारिवारिक विवादों के पीछे अक्सर लोगों के बीच की गलतफहमी, जमीन और संपत्ति के मुद्दे, और धन संबंधी मतभेद होते हैं।

इस कहावत का आध्यात्मिक या धार्मिक संदर्भ में क्या अर्थ है?

आध्यात्मिक या धार्मिक संदर्भ में, यह कहावत यह दर्शाती है कि लोगों के बीच के संबंध, भौतिक संपत्ति, और धन अक्सर आत्मिक या धार्मिक विवादों का कारण बन सकते हैं।

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