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जीभ भी जली और स्वाद भी न पाया, अर्थ, प्रयोग (Jeebh bhi jali aur swad bhi na paya)

परिचय: “जीभ भी जली और स्वाद भी न पाया” यह हिंदी कहावत एक ऐसी स्थिति का वर्णन करती है जहाँ व्यक्ति कोई जोखिम उठाता है लेकिन उसका कोई लाभ नहीं मिलता, विशेषकर जब किसी को बहुत कम मात्रा में भोजन दिया जाता है।

अर्थ: कहावत का सामान्य अर्थ है कि किसी व्यक्ति ने कोई कार्य करने में जोखिम उठाया, जैसे कि गर्म भोजन जल्दी से खा लिया, लेकिन उससे उसे न तो संतोष मिला और न ही आनंद। इस तरह, वह नुकसान उठाने के बावजूद लाभ से वंचित रह गया।

उपयोग: यह कहावत तब प्रयोग की जाती है जब किसी व्यक्ति को उसके प्रयासों का उचित परिणाम नहीं मिलता या जब उसे अपेक्षित लाभ के बदले में हानि ही होती है।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, एक व्यक्ति ने बहुत मेहनत करके किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, लेकिन अंत में उसे न केवल पुरस्कार नहीं मिला, बल्कि उसकी मेहनत भी व्यर्थ गई।

समापन: “जीभ भी जली और स्वाद भी न पाया” कहावत हमें यह सिखाती है कि जीवन में हमें अपने प्रयासों का मूल्यांकन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। यह हमें यह भी बताती है कि हर प्रयास का सकारात्मक परिणाम नहीं होता और कभी-कभी हमें अपनी मेहनत के बावजूद हानि उठानी पड़ सकती है।

Hindi Muhavare Quiz

जीभ भी जली और स्वाद भी न पाया कहावत पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में अमन नामक एक युवक रहता था। अमन हमेशा जल्दबाजी में रहता था और कभी भी धैर्य से काम नहीं लेता था। एक दिन, गाँव में एक बड़ा उत्सव हो रहा था और अमन को वहाँ खाना परोसने का काम मिला था।

उत्सव में बहुत सारे लोग आए थे और अमन को भी खाना परोसने का मौका मिला। खाना परोसते समय, अमन ने खुद के लिए भी एक प्लेट भर ली। लेकिन, जैसे ही उसने खाना खाने की कोशिश की, वह जल्दबाजी में गर्म खाने को मुंह में डाल बैठा और उसकी जीभ जल गई।

अमन को बहुत दर्द हुआ और वह खाना भी ठीक से नहीं खा पाया। उसने सोचा, “मैंने इतनी मेहनत से खाना परोसा और अंत में न तो मैं ठीक से खाना खा पाया और न ही स्वाद का आनंद ले पाया।”

इस घटना ने अमन को एक बड़ा सबक सिखाया। उसने समझा कि “जीभ भी जली और स्वाद भी न पाया” कहावत का अर्थ क्या है। उसे एहसास हुआ कि जल्दबाजी में किए गए काम से नुकसान ही होता है और इससे न तो कोई फायदा मिलता है और न ही संतोष।

इसके बाद से, अमन ने धैर्य और सोच-समझकर काम करना शुरू किया और उसे जीवन में अच्छे परिणाम मिलने लगे।

शायरी:

जल्दबाजी में जीभ जली, स्वाद भी न पाया,

जीवन की इस दौड़ में, सब कुछ था गवाया।

हर निवाले में थी कशिश, हर दर्द में बात,

धीरज धरने में ही था, जीवन का सौगात।

उतावलापन छोड़ कर, जब धीरज से चले,

खुशियों की राहें खुलीं, मंजिलें भी मिले।

जीभ की जलन सिखाए, जीवन का सबक,

आगे बढ़ने की राह में, धैर्य है सबसे मजबूत कदम।

 

जीभ भी जली और स्वाद भी न पाया शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of जीभ भी जली और स्वाद भी न पाया – Jeebh bhi jali aur swad bhi na paya Proverb:

Introduction: The Hindi proverb “Jeebh bhi jali aur swad bhi na paya” describes a situation where a person takes a risk but gains no benefit, especially when given a very small amount of food.

Meaning: The literal meaning of the proverb is that a person took a risk, like eating hot food quickly, but neither found satisfaction nor pleasure. As a result, they suffered a loss without any gain.

Usage: This proverb is used when a person doesn’t get the appropriate outcome for their efforts or experiences loss instead of the expected benefit.

Examples:

-> Imagine a person who participated in a competition with great effort but ended up not only without a prize but also with their effort being in vain.

Conclusion: The proverb “जीभ भी जली और स्वाद भी न पाया” teaches us to be cautious in evaluating our efforts in life. It also reminds us that not every effort results in a positive outcome and sometimes, despite hard work, we may face losses.

Story of Jeebh bhi jali aur swad bhi na paya Proverb in English:

In a small village, there lived a young man named Aman. Aman was always in a hurry and never worked with patience. One day, a big festival was being held in the village, and Aman was assigned the task of serving food.

Many people attended the festival, and Aman also got the chance to serve food. While serving, Aman filled a plate for himself too. However, in his haste, he put the hot food in his mouth and burned his tongue.

Aman was in great pain and couldn’t eat properly. He thought, “I served food with so much effort, and in the end, I couldn’t even eat properly, nor enjoy the taste.”

This incident taught Aman a valuable lesson. He understood the meaning of the proverb “जीभ भी जली और स्वाद भी न पाया.” He realized that actions done in haste only lead to loss, without any benefit or satisfaction.

From then on, Aman started to work with patience and thoughtfulness, and he began to see better outcomes in his life.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

क्या यह कहावत व्यर्थ प्रयासों की बात करती है?

हाँ, यह कहावत उन प्रयासों की बात करती है जो व्यर्थ गए हों और जिनसे कोई लाभ न हो।

इस कहावत का व्यक्तिगत जीवन में क्या महत्व है?

व्यक्तिगत जीवन में इस कहावत का महत्व है कि यह हमें सिखाती है कि कभी-कभी हमारे प्रयास व्यर्थ जा सकते हैं और इसके लिए हमें सावधान रहना चाहिए।

क्या इस कहावत का उपयोग जीवन में संतुलन बनाने की शिक्षा में किया जा सकता है?

हाँ, इस कहावत का उपयोग जीवन में संतुलन बनाने और अनावश्यक प्रयासों से बचने की शिक्षा में किया जा सकता है।

इस कहावत का नैतिक शिक्षा में क्या महत्व है?

नैतिक शिक्षा में इस कहावत का महत्व है कि यह हमें सोच-समझकर काम करने और अनावश्यक जोखिमों से बचने की शिक्षा देती है।

इस कहावत के माध्यम से क्या संदेश मिलता है?

इस कहावत के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि हमें अपनी मेहनत और संसाधनों का समझदारी से उपयोग करना चाहिए और बेकार के प्रयासों से बचना चाहिए।

हिंदी कहावतों की पूरी लिस्ट एक साथ देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

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