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जैसे को तैसा मिले, मिले डोम को डोम, दाता को दाता मिले, मिले सूम को सूम, अर्थ, प्रयोग (Jaise ko taisa mile, Mile dom ko dom, Data ko data mile, Mile soom ko soom)

“जैसे को तैसा मिले, मिले डोम को डोम, दाता को दाता मिले, मिले सूम को सूम” यह एक प्रचलित हिंदी कहावत है जो कर्म और प्रतिफल के नैतिक सिद्धांत को दर्शाती है। इस कहावत का उपयोग आमतौर पर उस स्थिति में होता है जब व्यक्ति के कर्मों का परिणाम उसे वापस मिलता है।

परिचय: “जैसे को तैसा मिले, मिले डोम को डोम, दाता को दाता मिले, मिले सूम को सूम” एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है जो बताता है कि प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही परिणाम प्राप्त होते हैं।

अर्थ: इस कहावत का अर्थ है कि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुरूप ही परिणाम मिलते हैं। यह बताता है कि यदि आप अच्छे कर्म करते हैं तो अच्छे परिणाम मिलेंगे, और यदि बुरे कर्म करते हैं तो बुरे परिणाम मिलेंगे।

उपयोग: यह कहावत तब इस्तेमाल की जाती है जब कोई व्यक्ति यह जानना चाहता हो कि उसके कर्मों का परिणाम क्या होगा। इसे अक्सर नैतिकता और न्याय के संदर्भ में उपयोग किया जाता है।

उदाहरण:

-> मान लीजिए एक व्यक्ति दूसरों की बहुत मदद करता है, तो जब वह स्वयं मुश्किल में होता है तो उसे भी मदद मिलती है। इसी तरह, यदि कोई दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करता है, तो भविष्य में उसे भी बुरा अनुभव होता है।

समापन: इस कहावत से हमें यह सिख मिलती है कि हमारे कर्म ही हमारे भविष्य को आकार देते हैं। इसलिए, हमें हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए और बुरे कर्मों से बचना चाहिए, क्योंकि अंततः हमें वही मिलेगा जो हमने बोया है।

Hindi Muhavare Quiz

जैसे को तैसा मिले, मिले डोम को डोम, दाता को दाता मिले, मिले सूम को सूम कहावत पर कहानी:

एक समय की बात है, एक गांव में दो भाई सुरेंद्र और प्रेमचंद्र रहते थे। सुरेंद्र एक दयालु और सहायक व्यक्ति था, जबकि प्रेमचंद्र स्वार्थी और कठोर हृदय वाला था। सुरेंद्र हमेशा गांव वालों की मदद करता और उनके सुख-दुख में शामिल रहता। वहीं, प्रेमचंद्र हमेशा अपने फायदे की सोचता और कभी किसी की सहायता नहीं करता।

एक बार गांव में अकाल पड़ा, और खाने की कमी हो गई। सुरेंद्र ने अपने घर का अन्न गरीबों में बाँट दिया और खुद भूखा रह गया। दूसरी ओर, प्रेमचंद्र ने अपना अन्न छिपा लिया और किसी को नहीं दिया।

जब अकाल खत्म हुआ और समृद्धि आई, तो गांव वालों ने सुरेंद्र की मदद की। उन्होंने उसे अन्न दिया, उसके खेतों को जोता और उसका समर्थन किया। इससे सुरेंद्र का जीवन फिर से समृद्ध हो गया। लेकिन प्रेमचंद्र को कोई भी मदद करने नहीं आया, क्योंकि उसने पहले कभी किसी की सहायता नहीं की थी। अंत में, प्रेमचंद्र को अपनी गलतियों का एहसास हुआ।

इस कहानी से हमें “जैसे को तैसा मिले, मिले डोम को डोम, दाता को दाता मिले, मिले सूम को सूम” कहावत का अर्थ समझ में आता है। यह कहावत बताती है कि हमारे कर्मों का परिणाम हमें वापस मिलता है। यदि हम अच्छे कर्म करते हैं, तो हमें अच्छा परिणाम मिलता है, और यदि हम बुरे कर्म करते हैं, तो हमें बुरा परिणाम मिलता है।

शायरी:

कर्मों का लेखा-जोखा है, जैसे को तैसा,

जो बोएंगे वही काटेंगे, यही है जीवन का नैसा।

डोम को मिले डोम, दाता को मिले दाता,

जीवन की इस राह में, यही सच्चाई का आता-जाता।

बोते हैं जो प्यार के बीज, प्यार ही पाते हैं,

जो बोते हैं नफरत के बीज, दर्द ही सहते हैं।

सूम को मिले सूम, यही कुदरत का कानून,

जो किया है तूने जग में, वही तेरा होगा सुनून।

हर एक कर्म का हिसाब, यहाँ होता है पूरा,

जीवन का यह सफर, बदलता है जैसे मौसम सुरा।

जो बोएगा वही तू काटेगा, यही है जिंदगी का गीत,

“जैसे को तैसा मिले”, यही है जिंदगी का रीत।

 

जैसे को तैसा मिले, मिले डोम को डोम, दाता को दाता मिले, मिले सूम को सूम शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of जैसे को तैसा मिले, मिले डोम को डोम, दाता को दाता मिले, मिले सूम को सूम – Jaise ko taisa mile, Mile dom ko dom, Data ko data mile, Mile soom ko soom Proverb:

“Jaise ko taisa mile, Mile dom ko dom, Data ko data mile, Mile soom ko soom” is a prevalent Hindi proverb that illustrates the moral principle of actions and their consequences. This proverb is commonly used in situations where a person’s actions lead to corresponding outcomes.

Introduction: “जैसे को तैसा मिले, मिले डोम को डोम, दाता को दाता मिले, मिले सूम को सूम” is a well-known Hindi proverb, indicating that every person receives outcomes according to their actions.

Meaning: The proverb means that a person receives results in accordance with their actions. It states that if you perform good deeds, you will receive good outcomes, and if you do bad deeds, you will face bad outcomes.

Usage: This proverb is used when someone wants to understand what the consequences of their actions will be. It is often applied in contexts of morality and justice.

Examples:

-> Suppose a person helps others a lot, then when they are in trouble themselves, they also receive help. Similarly, if someone behaves badly with others, they will have bad experiences in the future.

Conclusion: This proverb teaches us that our actions shape our future. Therefore, we should always perform good deeds and avoid bad ones, because ultimately, we will reap what we sow.

Story of Jaise ko taisa mile, Mile dom ko dom, Data ko data mile, Mile soom ko soom Proverb in English:

Once upon a time in a village, there were two brothers named Surendra and Premchandra. Surendra was a kind and helpful person, while Premchandra was selfish and hard-hearted. Surendra always helped the villagers and participated in their joys and sorrows. On the other hand, Premchandra always thought of his own benefits and never helped anyone.

Once, a famine struck the village, leading to a food shortage. Surendra distributed the grain from his home among the poor and went hungry himself. In contrast, Premchandra hid his grain and did not share it with anyone.

When the famine ended and prosperity returned, the villagers helped Surendra. They gave him grain, plowed his fields, and supported him. This helped Surendra’s life become prosperous again. However, nobody came to help Premchandra because he had never assisted anyone before. In the end, Premchandra realized his mistakes.

This story helps us understand the meaning of the proverb “जैसे को तैसा मिले, मिले डोम को डोम, दाता को दाता मिले, मिले सूम को सूम.” The proverb indicates that we receive the outcomes of our actions. If we do good deeds, we receive good results, and if we do bad deeds, we receive bad outcomes.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

इस कहावत में ‘डोम को डोम’ का क्या तात्पर्य है?

‘डोम को डोम’ का तात्पर्य है कि समान गुणों वाले लोग आपस में मिलते हैं।

कहावत में ‘दाता को दाता’ का क्या महत्व है?

कहावत में ‘दाता को दाता’ का क्या महत्व है?

क्या इस कहावत का संबंध कर्म से है?

हां, इस कहावत का सीधा संबंध कर्म के सिद्धांत से है, जो कहता है कि आप जो करते हैं, वही आपको वापस मिलता है।

क्या यह कहावत बच्चों को सिखाने के लिए उपयुक्त है?

हां, यह कहावत बच्चों को सिखाने के लिए उपयुक्त है क्योंकि यह उन्हें अच्छे कर्मों का महत्व समझाती है।

इस कहावत का किसी धार्मिक ग्रंथ से कोई संबंध है क्या?

हां, इस कहावत का भारतीय धार्मिक ग्रंथों, जैसे कि गीता और उपनिषदों में वर्णित कर्म के सिद्धांत से संबंध है।

यह कहावत किन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती है?

यह कहावत तब उपयोगी हो सकती है जब हमें अपने कर्मों के परिणामों का सामना करना पड़े और जब हम दूसरों के साथ अपने व्यवहार का मूल्यांकन कर रहे हों।

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