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घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध, अर्थ, प्रयोग (Ghar ka jogi jogda, Aan gaon ka siddh)

परिचय: “घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध” यह हिंदी की एक प्रचलित कहावत है, जिसका अर्थ है कि अक्सर लोग अपने घर या परिवार के सदस्यों की क्षमताओं की तुलना में बाहरी लोगों की प्रतिभा और योग्यता को अधिक महत्व देते हैं।

अर्थ: इस कहावत का शाब्दिक अर्थ है कि घर का जोगी (साधु) लोगों को साधारण लगता है, जबकि दूसरे गाँव का सिद्ध (महान साधु) अधिक सम्मानित माना जाता है। यह विचार यह बताता है कि निकटता के कारण हम अक्सर किसी की क्षमताओं को कम आंकते हैं।

उपयोग: इस कहावत का प्रयोग तब होता है जब लोग अपने ही परिवार या समुदाय के सदस्य की तुलना में बाहरी व्यक्ति की प्रशंसा अधिक करते हैं।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, एक गाँव में एक अत्यंत ज्ञानी व्यक्ति रहता है, लेकिन गाँव वाले उसकी कद्र नहीं करते। लेकिन जब वही व्यक्ति किसी अन्य जगह पर जाकर अपना ज्ञान प्रदर्शित करता है, तो लोग उसे बहुत सम्मान देते हैं।

समापन: इस प्रकार, “घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध” कहावत हमें यह सिखाती है कि हमें अपने आसपास के लोगों की क्षमताओं और योग्यताओं का सम्मान करना चाहिए, और यह नहीं सोचना चाहिए कि केवल दूर के लोग ही अधिक योग्य या महान होते हैं। यह कहावत हमें निकटता के प्रति आदर और सम्मान की महत्वता को समझने की प्रेरणा देती है।

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घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध कहावत पर कहानी:

एक बार की बात है, छोटे से गाँव में प्रेमचंद्र नाम का एक ज्ञानी व्यक्ति रहता था। प्रेमचंद्र बहुत ही विद्वान थे और उन्हें धर्म, दर्शन और आध्यात्म पर गहरी समझ थी। लेकिन गाँव वाले उन्हें साधारण व्यक्ति समझते थे और उनकी बातों पर अधिक ध्यान नहीं देते थे।

एक दिन गाँव में एक संत आए। वह संत शहर से आया था और उसकी ख्याति दूर-दूर तक थी। गाँव वाले उस संत के प्रवचन सुनने के लिए उमड़ पड़े। संत ने जो कुछ भी कहा, वही बातें प्रेमचंद्र भी कहा करते थे, लेकिन गाँव वालों ने संत की बातों को बड़े ध्यान से सुना और उसे बहुत सम्मान दिया।

प्रेमचंद्र यह सब देखकर मुस्कुराए और उन्होंने सोचा, “घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध।” उन्हें समझ में आ गया कि लोग अक्सर अपने ही लोगों की क्षमताओं को नजरअंदाज कर देते हैं और बाहरी व्यक्तियों को अधिक महत्व देते हैं।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने आसपास के लोगों की क्षमताओं और योग्यताओं का सम्मान करना चाहिए और यह नहीं सोचना चाहिए कि केवल दूर के लोग ही अधिक योग्य या महान होते हैं। “घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध” कहावत हमें यह भी बताती है कि अक्सर हम निकटता के कारण किसी की क्षमताओं को कम आंकते हैं।

शायरी:

अपने घर की बातों को हम अक्सर भूल जाते हैं,
“घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध” कहावत याद आते हैं।
जो पास है उसकी कद्र नहीं, दूर के दिखते सितारे,
इंसानी फितरत में शामिल है, ये अजीब से इशारे।

जिनके ज्ञान का दीप हमारे ही आँगन में जलता है,
उन्हें हम नजरअंदाज कर, बाहरी चमक पर मचलते हैं।
“घर का जोगी जोगड़ा” की ये कहानी बतलाती है,
कि अक्सर अपनों की कद्र, हमसे छूट जाती है।

दूर के ढोल सुहावने, ये कहावत पुरानी है,
पर अपने घर की बातों में, भी तो कुछ कहानी है।
“आन गाँव का सिद्ध” हो या घर का अनजाना,
सच्चाई ये है, हर जगह होता अपना और बेगाना।

अपने ही घर की बातों को अगर हम पहचान लें,
तो “घर का जोगी जोगड़ा” भी, सिद्ध हो सकता है।
इस कहावत की गहराई में, जब हम उतर जाते हैं,
तो अपने घर के जोगी में भी, हमें सिद्ध नजर आते हैं।

 

घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध – Ghar ka jogi jogda, Aan gaon ka siddh Proverb:

Introduction: “Ghar ka jogi jogda, Aan gaon ka siddh” is a well-known Hindi proverb, which means that people often give more importance to the talent and abilities of outsiders compared to their own family or community members.

Meaning: The literal meaning of this proverb is that a sage (jogi) of one’s own home seems ordinary, while a sage (siddh) from another village is more respected. This idea suggests that due to closeness, we often undervalue someone’s capabilities.

Usage: This proverb is used when people praise an outsider more compared to a member of their own family or community.

Examples:

-> For instance, there is a very knowledgeable person in a village, but the villagers do not appreciate him. However, when the same person goes to another place and displays his knowledge, people there give him great respect.

Conclusion: Thus, the proverb “घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध” teaches us that we should respect the capabilities and qualifications of the people around us, and not think that only those who are far away are more capable or great. This proverb inspires us to understand the importance of respect and admiration for proximity.

Story of Ghar ka jogi jogda, Aan gaon ka siddh Proverb in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a wise man named Premchandra. Premchandra was highly learned and had a deep understanding of religion, philosophy, and spirituality. However, the villagers considered him an ordinary person and did not pay much attention to his words.

One day, a saint arrived in the village. This saint came from the city and was renowned far and wide. The villagers flocked to listen to the saint’s discourses. Everything the saint said was similar to what Premchandra used to say, but the villagers listened to the saint attentively and gave him great respect.

Seeing all this, Premchandra smiled and thought to himself, “घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध” (The sage of one’s own home seems ordinary, while a sage from another village is considered great). He realized that people often overlook the capabilities of their own and give more importance to outsiders.

This story teaches us that we should respect the abilities and qualifications of the people around us and not think that only those from afar are more capable or great. The proverb “घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध” also tells us that we often underestimate someone’s capabilities due to their proximity to us.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

इस कहावत का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?

समाज में इस कहावत का प्रभाव यह है कि लोग अक्सर अपने ही समुदाय या परिवार की प्रतिभाओं की उपेक्षा करते हैं।

इस कहावत का व्यक्तिगत जीवन में क्या महत्व है?

व्यक्तिगत जीवन में, यह कहावत यह सिखाती है कि हमें अपने घर या परिवार की प्रतिभाओं का सम्मान करना चाहिए।

इस कहावत का शिक्षा के क्षेत्र में क्या प्रभाव है?

शिक्षा के क्षेत्र में, यह कहावत यह बताती है कि स्थानीय शिक्षकों और विद्वानों की क्षमताओं का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

इस कहावत का नैतिक संदेश क्या है?

इस कहावत का नैतिक संदेश यह है कि हमें अपने आस-पास की प्रतिभाओं का सम्मान करना चाहिए और उन्हें उचित महत्व देना चाहिए।

इस कहावत का व्यावसायिक जीवन में क्या महत्व है?

व्यावसायिक जीवन में, यह कहावत यह बताती है कि संगठनों को अपने आंतरिक कर्मचारियों की क्षमताओं का सम्मान करना चाहिए।

इस कहावत का राजनीतिक दृष्टिकोण से क्या महत्व है?

राजनीतिक दृष्टिकोण से, यह कहावत यह दर्शाती है कि राजनीतिक नेताओं को स्थानीय नेताओं और प्रतिनिधियों की क्षमताओं का सम्मान करना चाहिए।

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