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छूछा कोई न पूछा, अर्थ, प्रयोग(Choocha koi na poocha)

परिचय: छूछा कोई न पूछा, इस कहावत का प्रयोग अक्सर उन स्थितियों में किया जाता है, जहां किसी व्यक्ति या वस्तु की महत्वहीनता को दर्शाना होता है। ‘छूछा’ शब्द का अर्थ है खाली या निरर्थक। इस कहावत के माध्यम से यह बताया जाता है कि जिस व्यक्ति या चीज में कोई मूल्य नहीं होता, उसकी उपेक्षा होती है।

अर्थ: कहावत का सामान्य अर्थ है कि जो व्यक्ति या चीज निरर्थक या बिना मूल्य के होते हैं, उन्हें समाज में कोई महत्व नहीं दिया जाता।

उपयोग: इस कहावत का प्रयोग तब होता है जब किसी व्यक्ति या चीज की अनुपस्थिति या अनुपयोगिता को रेखांकित करना हो।

उदाहरण:

-> यदि कोई व्यक्ति अपने समुदाय में कोई योगदान नहीं देता है या उसकी कोई पहचान नहीं होती है, तो उसके बारे में कहा जा सकता है, “छूछा कोई न पूछा।”

निष्कर्ष: यह कहावत हमें यह सिखाती है कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति और वस्तु की अपनी एक महत्ता होती है। जिनमें कोई मूल्य नहीं होता, वे अक्सर उपेक्षित रह जाते हैं। “छूछा कोई न पूछा” कहावत महत्वहीनता की ओर इशारा करती है।

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छूछा कोई न पूछा कहावत पर कहानी:

एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में प्रेमचंद्र नाम का एक किसान रहता था। प्रेमचंद्र के पास खेती के लिए बहुत सारी जमीन थी, लेकिन वह इसका सही उपयोग नहीं करता था। वह अपना अधिकतर समय गाँव की चौपाल पर बैठकर गप्पें मारने में बिताता था।

गाँव के लोग प्रेमचंद्र को देखकर अक्सर कहते, “प्रेमचंद्र के पास इतनी जमीन होते हुए भी कोई फायदा नहीं, वह तो बस ‘छूछा कोई न पूछा’ जैसा है।” प्रेमचंद्र की उपेक्षा इसलिए होती थी क्योंकि वह अपनी संपत्ति का सही उपयोग नहीं करता था।

एक दिन गाँव में एक समृद्ध व्यापारी आया। उसने प्रेमचंद्र की जमीन देखी और सोचा कि इस जमीन पर अच्छी खेती की जा सकती है। व्यापारी ने प्रेमचंद्र को खेती के नए तरीके सिखाए और उसे समझाया कि कैसे वह अपनी जमीन का सही इस्तेमाल कर सकता है।

प्रेमचंद्र ने व्यापारी की सलाह मानी और खेती में जुट गया। कुछ ही समय में, उसके खेत हरे-भरे हो गए और वह गाँव में एक सम्मानित किसान के रूप में जाना जाने लगा। अब गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे और उसकी सलाह मांगते थे।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि “छूछा कोई न पूछा” कहावत का अर्थ है कि जो व्यक्ति या चीज अपनी क्षमता का सही उपयोग नहीं करते, उन्हें कोई महत्व नहीं दिया जाता। जब व्यक्ति अपनी क्षमता का सही इस्तेमाल करता है, तो वह समाज में प्रतिष्ठित और सम्मानित बनता है।

शायरी:

छूछे में कोई नहीं बसता, ये बात सच है भाई,

जिसमें न हो कोई दम, वो कैसे किसी का भाई।

जिंदगी की राहों में, जब तक है दम खम,

तब तक इंसान की कीमत, वरना वो बस एक नाम।

कोई पूछता नहीं जिसे, वो छूछा कहलाता है,

ज़िंदगी में जिसका कोई मोल नहीं, वो अकेला रह जाता है।

“छूछा कोई न पूछा” ये कहावत गहरी है,

जिसमें न हो खुद की पहचान, वो जीवन से परे है।

मूल्य तो उसी का है, जो खुद में सम्पूर्ण हो,

बिना मूल्य के जीवन में, उसकी कोई भूमिका न हो।

 

छूछा कोई न पूछा शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of छूछा कोई न पूछा – Choocha koi na poocha Proverb:

Introduction: This proverb is often used in situations where the insignificance of a person or object needs to be highlighted. ‘छूछा’ (Chhoocha) means empty or meaningless. The proverb indicates that a person or thing without any value is ignored.

Meaning: The general meaning of the proverb is that individuals or things that are meaningless or without value are not given any importance in society.

Usage: This proverb is used to underscore the absence or uselessness of a person or object.

Examples:

-> If a person does not contribute to their community or has no recognition, it can be said about them, “Choocha koi na poocha.”

Conclusion: This proverb teaches us that every individual and object in society has its importance. Those without any value are often overlooked. “Choocha koi na poocha” points towards the idea of insignificance.

Story of Choocha koi na poocha Proverb in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a farmer named Premchandra. Premchandra owned a lot of land for farming, but he did not utilize it properly. He spent most of his time sitting at the village square, gossiping.

The villagers often said about Premchandra, “Even with so much land, Premchandra gains nothing. He is just like ‘Choocha koi na poocha’.” Premchandra was disregarded because he did not make proper use of his assets.

One day, a wealthy merchant visited the village. He saw Premchandra’s land and thought that it could be used for productive farming. The merchant taught Premchandra new farming techniques and explained how he could effectively utilize his land.

Premchandra heeded the merchant’s advice and started farming earnestly. In no time, his fields became lush and green, and he became known as a respected farmer in the village. Now, the villagers praised him and sought his advice.

This story teaches us that the proverb “Choocha koi na poocha” means that a person or object that does not make proper use of its potential is not given any importance. When a person utilizes their capabilities effectively, they become respected and esteemed in society.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

क्या इस कहावत का कोई विरोधाभास है?

नहीं, इसका कोई विरोधाभास नहीं है। यह एक निष्कलंक कथन है जो सामाजिक स्थिति या पहचान की महत्वपूर्णता पर ध्यान केंद्रित करता है।

क्या इस कहावत का कोई इतिहासिक संबंध है?

इसका कोई विशेष इतिहासिक संबंध नहीं है, लेकिन यह सामाजिक और रूढ़िवादी सिद्धांतों को छूने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

कैसे इस कहावत को अपने जीवन में लागू किया जा सकता है?

यह कहावत हमें यह सिखाती है कि कार्यों को छिपा नहीं करना चाहिए और सही समय पर सही मौके पर अपनी पहचान बनानी चाहिए।

क्या इस कहावत का कोई उपयोग व्यापारिक संदर्भ में किया जा सकता है?

हाँ, इसे व्यापारिक संदर्भ में भी लागू किया जा सकता है, जब किसी नए और विशेष उत्पाद या सेवा की पहचान करना हो।

क्या इस कहावत का कोई सम्बंध प्रेम और संबंधों से है?

हाँ, यह कहावत संबंधों में स्थिति की भूमिका पर भी गौर करती है, जब कभी-कभी प्यार का महत्वपूर्ण कार्य अनदेखा रहता है।

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