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बुढि़या मरी तो मरी, आगरा तो देखा, अर्थ, प्रयोग(Budhiya mari to mari, Agra to dekha)

परिचय: “बुढि़या मरी तो मरी, आगरा तो देखा” यह हिंदी भाषा की एक लोकप्रिय कहावत है, जिसका प्रयोग अक्सर उस स्थिति के लिए होता है जब कोई व्यक्ति अपनी इच्छा या लक्ष्य को तब पूरा करता है जब उसे यह अनुभव होता है कि अब इसका खास महत्व नहीं रहा।

अर्थ: इस कहावत का अर्थ है कि किसी काम या इच्छा का पूरा होना उस समय पर होता है जब उसका असली महत्व या उत्साह खत्म हो चुका होता है। यह अक्सर देरी से होने वाली प्राप्ति या सफलता के संदर्भ में प्रयोग की जाती है।

उपयोग: यह कहावत तब प्रयोग की जाती है जब कोई व्यक्ति या समाज किसी चीज़ को उस समय प्राप्त करता है जब वह अपनी प्रासंगिकता खो चुका होता है।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, एक व्यक्ति का सपना था कि वह जवानी में दुनिया घूमे, लेकिन वह उम्र के आखिरी पड़ाव पर जाकर ही यात्रा पर निकल पाया। इस स्थिति में कहा जा सकता है, “बुढि़या मरी तो मरी, आगरा तो देखा।”

समापन: इस कहावत से हमें यह सिखने को मिलता है कि जीवन में कई बार हमारी इच्छाएँ और लक्ष्य उस समय पूरे होते हैं जब उनकी प्रासंगिकता खत्म हो चुकी होती है। यह हमें यह भी बताता है कि हमें अपने लक्ष्यों को समय रहते पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।

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बुढि़या मरी तो मरी, आगरा तो देखा कहावत पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में रामलाल नाम का एक व्यक्ति रहता था। बचपन से ही उसका सपना था कि वह एक दिन आगरा जाकर ताजमहल देखेगा। लेकिन, जीवन की व्यस्तताओं और जिम्मेदारियों ने उसे इतना उलझा दिया कि वह अपने सपने को पूरा नहीं कर पाया।

वर्षों बीत गए, और रामलाल अब एक बुजुर्ग व्यक्ति बन गए। एक दिन उनके पोते ने उनसे पूछा, “दादाजी, आपका कोई सपना है जो अभी तक पूरा नहीं हुआ?” रामलाल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हाँ, बेटा, मेरा सपना था कि मैं ताजमहल देखूं, लेकिन अब वह सपना बस एक सपना ही रह गया।”

उनके पोते ने तय किया कि वह अपने दादाजी का सपना पूरा कराएगा। उसने अपनी बचत से दोनों के लिए आगरा की यात्रा का आयोजन किया। जब वे आगरा पहुँचे और ताजमहल देखा, तो रामलाल की आंखों में खुशी के आँसू थे। लेकिन वह थोड़े उदास भी थे, क्योंकि वह इस यात्रा का आनंद उस उम्र में नहीं उठा पा रहे थे जब वे जवान थे।

रामलाल ने अपने पोते से कहा, “बेटा, मैं तुम्हारा आभारी हूँ कि तुमने मेरा सपना पूरा किया। लेकिन मेरी सीख यह है कि अपने सपनों को कभी देरी तक मत टालो। मेरे लिए तो यह ‘बुढि़या मरी तो मरी, आगरा तो देखा’ वाली बात हो गई।”

निष्कर्ष:

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि जीवन में हमें अपने सपनों को सही समय पर पूरा करना चाहिए। देरी से पूरे होने वाले सपने कई बार उतने संतोषजनक नहीं होते जितने कि उनके सही समय पर पूरे होने पर होते हैं।

शायरी:

आगरा गया जब उम्र ढल गई,

बुढ़ापे में सपने की बारिश पल गई।

जवानी में जो ख्वाब थे बुने,

उनकी याद में बुढ़ापे में चुने।

“बुढि़या मरी तो आगरा तो देखा”,

जीवन का यह खेल भी अजीबा।

सपनों की उड़ान थी जब बेहद ऊंची,

बुढ़ापे में सपने की डोर थी कुछ खींची।

ख्वाबों की दुनिया में जब था रवानी,

बुढ़ापे में आकर सब कुछ था वीरानी।

बुढ़ापे में देखी जो दुनिया नई,

उसमें थी थोड़ी खुशी, थोड़ी सुस्ती भरी छाई।

सफर का मजा लिया जब उम्र हो गई पार,

“बुढि़या मरी तो आगरा तो देखा” इसकी मिसाल साकार।

 

बुढि़या मरी तो मरी, आगरा तो देखा शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of बुढि़या मरी तो मरी, आगरा तो देखा – Budhiya mari to mari, Agra to dekha Proverb:

Introduction: “Budhiya mari to mari, Agra to dekha” is a popular Hindi proverb, often used to describe situations where a person fulfills their desire or goal when they feel it’s no longer as significant.

Meaning: The proverb means that the fulfillment of a task or desire happens at a time when its real importance or enthusiasm has already faded. It’s typically used in the context of achievements or acquisitions that come too late.

Usage: This proverb is used when a person or society attains something at a time when it has lost its relevance.

Examples:

-> For instance, suppose a person dreamed of traveling the world in their youth, but they only managed to start traveling at the final stages of their life. In this situation, it can be said, “Budhiya mari to mari, Agra to dekha.”

Conclusion: This proverb teaches us that often in life, our desires and goals are fulfilled when their relevance has ended. It also tells us that we should strive to achieve our goals timely.

Story of Budhiya mari to mari, Agra to dekha Proverb in English:

In a small village, there lived a man named Vineet. Since childhood, his dream was to one day visit Agra and see the Taj Mahal. However, the complexities and responsibilities of life had entangled him so much that he couldn’t fulfill his dream.

Years passed, and Vineet had now become an elderly man. One day, his grandson asked him, “Grandpa, do you have a dream that hasn’t come true yet?” Vineet smiled and replied, “Yes, my dear, I had a dream of seeing the Taj Mahal, but now that dream remains just a dream.”

His grandson decided that he would fulfill his grandfather’s dream. He planned a trip to Agra for both of them, using his savings. When they reached Agra and saw the Taj Mahal, tears of joy welled up in Vineet’s eyes. However, he also felt a tinge of sadness because he couldn’t fully enjoy this trip at the age when he was young.

Vineet said to his grandson, “Son, I’m grateful to you for fulfilling my dream. But the lesson I’ve learned is to never delay pursuing your dreams. For me, it has become a case of ‘Better late than never’.”

Conclusion: This story teaches us that in life, we should strive to fulfill our dreams at the right time. Dreams that are realized later in life often may not bring as much satisfaction as when they are fulfilled at the right moment.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

क्या इस कहावत में कोई और संदेश है?

हाँ, इसका एक और संदेश है कि असलीता और सच्चाई को समझने के लिए अनुभव होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बुढ़िया को क्यों उदाहरण में लिया गया है?

बुढ़िया एक साधू या सामान्य व्यक्ति की प्रतीति होती है, जो अपनी असलीता को छुपा कर रखता है। इसलिए, उसकी मौत से ही उसकी सच्चाई सामने आती है।

यह कहावत किस परिस्थिति को व्यक्त करती है?

यह कहावत उन स्थितियों को बताती है जब किसी व्यक्ति या चीज की असलीता समझने के लिए सीधे अनुभव की आवश्यकता होती है।

यह कहावत हिंदी साहित्य में कहां से आई है?

यह कहावत हिंदी भाषा के लोकोक्तियों और साहित्य से आई है।

यह कहावत किस प्रकार की जीवन दर्शनी है?

यह कहावत जीवन में सत्य और सच्चाई की महत्वपूर्णता को सार्थक रूप से दिखाती है।

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