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बीमार की रात पहाड़ बराबर, अर्थ, प्रयोग(Bimar ki raat pahad baraabar)

परिचय: “बीमार की रात पहाड़ बराबर” यह हिंदी भाषा की एक प्रचलित कहावत है। यह कहावत बीमारी या कष्ट के समय में समय की धीमी गति और उसके भारीपन को व्यक्त करती है।

अर्थ: कहावत का तात्पर्य है कि जब कोई व्यक्ति बीमार होता है, तो उसके लिए रात का समय बहुत लंबा और कष्टप्रद लगता है, मानो कि वह रात कभी खत्म ही नहीं होगी, जैसे एक पहाड़ की चढ़ाई कभी समाप्त न होने वाली लगती है।

उपयोग: यह कहावत उन स्थितियों में प्रयोग की जाती है, जहां व्यक्ति किसी कठिनाई या पीड़ा का सामना कर रहा हो और समय बहुत धीरे-धीरे गुजर रहा हो।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, एक व्यक्ति को तेज बुखार है और वह रात भर करवटें बदलता रहता है, उसके लिए वह रात बहुत लंबी और थकान भरी होती है। ऐसी स्थिति में कहा जा सकता है, “बीमार की रात पहाड़ बराबर।”

समापन: इस कहावत के माध्यम से हमें यह सिख मिलती है कि बीमारी या किसी कठिनाई के समय, समय का प्रवाह धीमा और कष्टप्रद अनुभव होता है। यह हमें सिखाता है कि कठिनाइयों के समय में धैर्य और साहस की विशेष आवश्यकता होती है।

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बीमार की रात पहाड़ बराबर कहावत पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में विशाल नाम का एक लड़का रहता था। विशाल बहुत ही चंचल और खुशमिजाज था, लेकिन एक दिन अचानक उसे तेज बुखार आ गया। बुखार की वजह से विशाल को बिस्तर पर ही लेटे रहना पड़ा।

विशाल की माँ ने उसे दवा दी, लेकिन बुखार इतना तेज था कि उसे रात भर नींद नहीं आई। वह करवटें बदल-बदलकर पूरी रात जागता रहा। रात का हर पल उसे एक घंटे जैसा लग रहा था, और हर घंटा एक साल के बराबर।

विशाल सोचता रहा कि काश सुबह जल्दी आ जाए और वह अपनी पीड़ा से मुक्त हो। लेकिन रात का समय बहुत धीमा लग रहा था। उसे लगा जैसे वह एक लंबी और अंतहीन रात में फंस गया हो।

आखिरकार सुबह हुई और धीरे-धीरे विशाल का बुखार उतरने लगा। वह अपनी माँ से बोला, “माँ, यह रात तो मानो ‘बीमार की रात पहाड़ बराबर’ थी।”

निष्कर्ष:

विशाल की इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि बीमारी या कठिनाई के समय समय का प्रवाह बहुत धीमा और दुष्कर लगता है। यह कहावत हमें याद दिलाती है कि कठिनाइयों के समय में धैर्य और संयम बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

शायरी:

बीमार की रात पहाड़ बराबर,

घड़ी की सुई चले मानो लगे ठहर।

हर पल में छिपा हो जैसे एक साल,

दर्द की इस रात में, हर आह बने सवाल।

समय की धीमी चाल में, जीवन की तलाश,

बीमारी में हर पल, लगे जैसे कोई साज़।

जब तक सुबह न आए, रात लगे अनंत,

बीमार की इस रात में, खोजे हर दर्द की छंट।

इस लंबी रात में, खुद से किया संवाद,

बीमारी का दर्द भी, बना जीवन का फसाद।

पहाड़ बराबर रात में, ढूँढें हम सब्र की राह,

धैर्य की इस परीक्षा में, मिले जीवन का नया आगाह।

 

बीमार की रात पहाड़ बराबर शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of बीमार की रात पहाड़ बराबर – Bimar ki raat pahad baraabar Proverb:

Introduction: “Bimar ki raat pahad baraabar” is a common Hindi proverb. This proverb expresses the slow passage of time and its heaviness during illness or distress.

Meaning: The essence of this proverb is that when someone is ill, the night seems extremely long and filled with suffering for them, as if it will never end, similar to how climbing a mountain can seem endless.

Usage: This proverb is used in situations where a person is facing a difficulty or pain, and time seems to pass very slowly.

Examples:

-> For instance, consider a person with a high fever who tosses and turns all night. For them, the night is exceedingly long and exhausting. In such a situation, one might say, “Bimar ki raat pahad baraabar.”

Conclusion: This proverb teaches us that during times of illness or difficulty, the flow of time feels slow and painful. It reminds us of the need for patience and courage during hard times.

Story of Bimar ki raat pahad baraabar Proverb in English:

In a small village, there was a boy named Vishal. Vishal was very lively and cheerful, but one day, he suddenly developed a high fever. Due to the fever, Vishal had to stay in bed.

Vishal’s mother gave him medicine, but the fever was so severe that he couldn’t sleep all night. He tossed and turned, and every moment of the night felt like an hour, and each hour seemed like a year.

Vishal kept wishing for the morning to come quickly so he could be free from his suffering. However, time seemed to pass very slowly. He felt as if he was trapped in a long and endless night.

Finally, morning came, and Vishal’s fever gradually began to subside. He said to his mother, “Mom, this night felt like ‘the night of the sick is as long as a mountain’.”

Conclusion:

Vishal’s story teaches us that during illness or difficulty, the passage of time feels slow and arduous. This proverb reminds us that patience and endurance are very important during times of hardship.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs

इस कहावत का उपयोग किस परिस्थिति में किया जा सकता है?

जब कोई किसी की मदद के लिए बहुत बड़ी समस्या का सामना करता है और उसे छोटी सी मदद बहुत महत्वपूर्ण लगती है, तो इस कहावत का उपयोग किया जा सकता है।

क्या इस कहावत का कोई इतिहासिक प्रमाण है?

नहीं, इस कहावत का कोई विशेष इतिहासिक प्रमाण नहीं है। यह एक लोकप्रिय हिंदी मुहावरा है जिसका उपयोग भाषा में अर्थपूर्णता बढ़ाने के लिए होता है।

क्या इस कहावत का कोई विपरीतार्थक हो सकता है?

हाँ, विपरीतार्थक रूप में इसे “समस्या की छोटी लापरवाही बड़े परिस्थितियों का कारण बन सकती है” के रूप में भी समझा जा सकता है।

क्या इस कहावत का उपयोग आध्यात्मिक संदर्भ में हो सकता है?

हाँ, यह कहावत आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी समझा जा सकता है, जैसे कि छोटी समस्याओं का सामना करना आत्मा के लिए बड़ी परिस्थितियों से सीखने का माध्यम हो सकता है।

क्या इस कहावत का कोई उपयोग व्यापारिक संदर्भ में किया जा सकता है?

हाँ, यह कहावत व्यापारिक परिस्थितियों में सहारा देने के लिए भी उपयुक्त हो सकती है, जैसे कि छोटे समस्याओं का समाधान करना बड़ी समस्याओं को रोक सकता है।

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