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बासी बचे न कुत्ता खाय, अर्थ, प्रयोग(Basi bache na kutta khay)

परिचय: “बासी बचे न कुत्ता खाय” यह हिंदी मुहावरा उन परिस्थितियों को दर्शाता है जहाँ किसी चीज की न तो किसी को जरूरत होती है और न ही वह किसी काम आती है। यह मुहावरा बेकार या अनुपयोगी चीजों की अनदेखी को बताता है।

अर्थ: इस मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है कि जैसे बासी खाना न तो इंसानों के काम आता है और न ही कुत्ते खाते हैं, उसी तरह कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनकी किसी को जरूरत नहीं होती।

उपयोग: यह मुहावरा आमतौर पर उन चीजों, विचारों, या संसाधनों के लिए प्रयोग किया जाता है जो निष्क्रिय या अनावश्यक होते हैं।

उदाहरण:

-> अगर किसी कार्यालय में पुरानी मशीनें पड़ी हों जो अब किसी काम न आती हों, तो इस मुहावरे का प्रयोग हो सकता है।

-> किसी परियोजना के लिए बनाई गई योजनाएँ जो अब प्रासंगिक नहीं रहीं, उन पर भी इस मुहावरे का इस्तेमाल किया जा सकता है।

समापन: “बासी बचे न कुत्ता खाय” मुहावरा हमें यह सिखाता है कि जीवन में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनका कोई महत्व नहीं होता, और उन्हें छोड़ देना ही बेहतर होता है। यह हमें यह भी बताता है कि हर चीज का अपना समय और महत्व होता है, और समय के साथ चीजों की उपयोगिता बदल सकती है।

Hindi Muhavare Quiz

बासी बचे न कुत्ता खाय कहावत पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में अनुज किसान रहता था। उसके पास एक पुराना ट्रैक्टर था, जो कई वर्षों से खराब पड़ा था। ट्रैक्टर न तो चलता था और न ही किसी काम का था। लेकिन अनुज उसे अपने घर के आँगन में रखे हुए था, क्योंकि वह उससे बहुत लगाव रखता था।

गाँव के लोग अक्सर अनुज से कहते, “अनुज भाई, यह ट्रैक्टर तो ‘बासी बचे न कुत्ता खाय’ वाली बात हो गई है। इसे यहाँ से हटा दो और कुछ नया खरीद लो।”

लेकिन अनुज हमेशा इस बात को अनसुना कर देता और उस पुराने ट्रैक्टर को वैसे ही रखे रहता। एक दिन, उसके गाँव में एक बड़ा मेला लगा। अनुज ने सोचा कि वह उस पुराने ट्रैक्टर को मेले में बेच देगा। लेकिन मेले में किसी ने भी उस ट्रैक्टर को खरीदने में रुचि नहीं दिखायी।

अंत में, अनुज को समझ आया कि पुराने और अनुपयोगी चीजों को रखने का कोई फायदा नहीं है। उसने ट्रैक्टर को निकाल फेंका और एक नया ट्रैक्टर खरीदा, जिससे उसकी खेती में बहुत उन्नति हुई।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि “बासी बचे न कुत्ता खाय” की तरह, जीवन में अनुपयोगी चीजों को छोड़कर आगे बढ़ना और नए अवसरों को अपनाना जरूरी है। यह हमें यह भी बताता है कि समय के साथ चीजों की उपयोगिता और महत्व बदलता है।

शायरी:

बासी बचे न कुत्ता खाय, जीवन की यही कहानी है,
जो बीत गया, उसकी याद में, नया कुछ भी न पानी है।

बीते कल की बातें हैं, वो अब बस ख्वाबों में,
नया क्या लाएँगे वो, जो हैं बस ख्वाबों में।

ढूँढता फिर रहा हूँ मैं, नई राहों की तलाश में,
बासी कढ़ी के चक्कर में, न गवां दूँ अपने आस में।

जीवन चलता जा रहा, नई राहों पे बढ़ता जा रहा,
पुराने ख्यालों का बोझ, अब मैं उतारता जा रहा।

बासी बचे न कुत्ता खाय, यह सोच बदलनी होगी,
जीवन की इस दौड़ में, हर बाधा को लांघनी होगी।

आगे बढ़ने की आरज़ू, मेरे दिल में सजी है,
बासी यादों को छोड़, नई सुबह की जुस्तजू में जी है।

 

बासी बचे न कुत्ता खाय शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of बासी बचे न कुत्ता खाय – Basi bache na kutta khay Proverb:

Introduction: The Hindi proverb “Basi bache na kutta khay” represents situations where something is neither needed by anyone nor serves any purpose. This proverb highlights the disregard for useless or redundant things.

Meaning: The literal meaning of this proverb is that just like stale food is neither useful for humans nor eaten by dogs, similarly, there are things that nobody needs.

Usage: This proverb is commonly used for things, ideas, or resources that are inactive or unnecessary.

Examples:

-> If there are old machines lying around in an office that are no longer of any use, this proverb can be applied.

-> The proverb can also be used for plans made for a project that are no longer relevant.

Conclusion: The proverb “Basi bache na kutta khay” teaches us that in life, some things are so insignificant that it’s better to let them go. It also tells us that everything has its time and importance, and the utility of things can change over time.

Story of Basi bache na kutta khay in English:

In a small village lived a farmer named Anuj. He owned an old tractor, which had been out of order for many years. The tractor was neither operational nor of any use. However, Anuj kept it in his courtyard, deeply attached to it.

The villagers often said to Anuj, “Brother Anuj, this tractor has become a case of ‘Basi bache na kutta khay’ (even a dog won’t eat stale leftovers). Remove it from here and buy something new.”

Anuj always ignored this advice and kept the old tractor. One day, a big fair was held in the village. Anuj thought of selling the old tractor at the fair. However, nobody at the fair showed any interest in buying it.

Eventually, Anuj realized that there was no point in holding onto old and useless items. He disposed of the tractor and bought a new one, which greatly improved his farming.

This story teaches us that, like the proverb “Basi bache na kutta khay,” it is essential in life to let go of useless things and embrace new opportunities. It also tells us that the utility and significance of things change over time.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQ:

इस कहावत का रोज़मर्रा की बातचीत में कैसे इस्तेमाल किया जाता है?

इसे अक्सर तब इस्तेमाल किया जाता है जब चीजों के अपव्यय या उनके अनुचित उपयोग की बात होती है।

यह कहावत संसाधनों के प्रबंधन के बारे में क्या सिखाती है?

यह कहावत संसाधनों के समझदारीपूर्ण प्रबंधन और उनके उचित उपयोग की महत्ता पर बल देती है।

क्या इस कहावत का उपयोग पर्यावरण संरक्षण में किया जा सकता है?

हां, इस कहावत का उपयोग पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के सतत उपयोग के संदर्भ में किया जा सकता है।

यह कहावत घरेलू और व्यावसायिक जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

यह कहावत घरेलू और व्यावसायिक जीवन में संसाधनों के संरक्षण और उनके उचित उपयोग के महत्व को दर्शाती है।

क्या इस कहावत को आधुनिक संदर्भ में लागू किया जा सकता है?

हां, यह आज के समय में भी प्रासंगिक है, खासकर जब संसाधनों के संरक्षण और उचित उपयोग की बात आती है।

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