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बारह गाँव का चौधरी अस्सी गाँव का राव, अपने काम न आवे तो ऐसी-तैसी में जाव, अर्थ, प्रयोग(Barah gaon ka chaudhry assi gaon ka rao, apne kaam na aave to aisi-taisi mein jao)

परिचय: “बारह गाँव का चौधरी अस्सी गाँव का राव, अपने काम न आवे तो ऐसी-तैसी में जाव” यह हिंदी मुहावरा उन लोगों की व्यर्थता को दर्शाता है जिनकी प्रतिष्ठा और पद बड़े हैं लेकिन जब जरूरत पड़े तो वे काम नहीं आते।

अर्थ: इस मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है कि चाहे कोई बारह गाँव का चौधरी हो या अस्सी गाँव का राव, अगर वह जरूरत के समय काम न आए, तो उसका कोई महत्व नहीं है। यह मुहावरा दिखावटी प्रतिष्ठा और असली उपयोगिता के बीच के अंतर को रेखांकित करता है।

उपयोग: यह मुहावरा अक्सर उन परिस्थितियों में प्रयोग किया जाता है जहाँ उच्च पदस्थ लोगों से अपेक्षाएँ होती हैं लेकिन वे जरूरत के समय निराश करते हैं।

उदाहरण:

-> एक सरकारी अधिकारी जो अपने क्षेत्र के विकास में योगदान नहीं दे पाता, उस पर यह मुहावरा लागू होता है।

-> किसी कंपनी के उच्च पदस्थ व्यक्ति पर जो टीम के लिए प्रेरणास्रोत नहीं बन पाते, इस मुहावरे का प्रयोग कर सकते हैं।

समापन: “बारह गाँव का चौधरी अस्सी गाँव का राव, अपने काम न आवे तो ऐसी-तैसी में जाव” मुहावरे के माध्यम से हमें यह सिखने को मिलता है कि वास्तविक महत्व उस व्यक्ति का होता है जो जरूरत के समय काम आए, न कि केवल पद या प्रतिष्ठा का। यह हमें यह भी सिखाता है कि असली महत्व व्यक्ति की उपयोगिता में है, न कि केवल उसके पद में।

Hindi Muhavare Quiz

बारह गाँव का चौधरी अस्सी गाँव का राव कहावत पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में प्रेमचंद्र नामक एक व्यक्ति रहता था। प्रेमचंद्र गाँव के सबसे बड़े जमींदार थे और उन्हें उनके विशाल भूमि स्वामित्व के लिए जाना जाता था। उनके पास बारह गाँवों की जमीन थी और लोग उन्हें बहुत सम्मान देते थे।

लेकिन जब भी गाँव में कोई समस्या आती, प्रेमचंद्र उसका हल निकालने में असमर्थ रहते। एक बार गाँव में सूखा पड़ा, और सभी गाँववाले प्रेमचंद्र के पास मदद के लिए गए। लेकिन प्रेमचंद्र के पास न तो उनकी मदद करने का कोई उपाय था और न ही उनकी कोई योजना।

इस समस्या का हल गाँव के एक सामान्य किसान ने निकाला, जिसने पानी की कमी का समाधान खोज लिया। गाँववालों ने उस किसान की बहुत प्रशंसा की और प्रेमचंद्र को उपेक्षित कर दिया।

तब गाँव के एक बुजुर्ग ने कहा, “बारह गाँव का चौधरी होने के बावजूद प्रेमचंद्र हमारे किसी काम नहीं आया। ‘बाप से बैर, पूत से सगाई’। असली महत्व उसका है जो जरूरत के समय काम आए।”

इस कहानी से हम सीखते हैं कि प्रतिष्ठा और संपत्ति का कोई महत्व नहीं है अगर वह जरूरत के समय किसी काम न आए। असली महत्व उस व्यक्ति का होता है जो संकट के समय में मदद कर सके।

शायरी:

बारह गाँव का चौधरी, अस्सी का राव,
जब अपने काम न आए, तो क्या फायदा भाव।
जिसके पास नाम हो, पर काम न हो साथ,
वो सिर्फ शोर है, बिना किसी बात।

जब जरूरत पड़े, और कोई न साथ हो,
तब समझ आता है, असली और झूठ का फर्क बड़ा खास हो।
असली कद्र उसी की, जो वक्त पर काम आए,
बाकी सब तो हवा में बातें उड़ाए।

चौधरी या राव का तमगा, पर कोई मायने न रखता,
जब दिल की दुनिया में, वो खुद को न दिखता।
बारह गाँव का चौधरी, अस्सी का राव,
जब अपने काम न आवे, तो ऐसी-तैसी में जाव।

यह जीवन की रीत है, यहाँ सब कुछ मायने रखता,
जो दिल से करे काम, वही सच्चा सिक्का चलता।
चाहे कितना भी बड़ा हो, जग में तेरा नाम,
अगर काम न आए तू, तो सब बेकार तेरा दाम।

 

बारह गाँव का चौधरी अस्सी गाँव का राव, अपने काम न आवे तो ऐसी-तैसी में जाव शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of बारह गाँव का चौधरी अस्सी गाँव का राव, अपने काम न आवे तो ऐसी-तैसी में जाव – Barah gaon ka chaudhry assi gaon ka rao, apne kaam na aave to aisi-taisi mein jao Proverb:

Introduction: The Hindi proverb “Barah gaon ka chaudhry assi gaon ka rao, apne kaam na aave to aisi-taisi mein jao” highlights the futility of those who have great status and position but are not helpful when needed.

Meaning: The literal meaning of this proverb is whether someone is the chief of twelve villages or the king of eighty, if they are not helpful when needed, their value is nil. This proverb underscores the difference between superficial prestige and actual utility.

Usage: This proverb is often used in situations where high-ranking individuals are expected to contribute, but they disappoint when their assistance is needed.

Examples:

-> A government officer who fails to contribute to the development of his area can be subjected to this proverb.

-> It can be applied to a high-ranking company official who fails to be an inspiration to their team.

Conclusion: The proverb “Barah gaon ka chaudhry assi gaon ka rao, apne kaam na aave to aisi-taisi mein jao” teaches us that the real value lies in a person who is helpful when needed, not just in their rank or status. It also teaches us that the true importance lies in a person’s utility, not just in their position.

Story of Barah gaon ka chaudhry assi gaon ka rao, apne kaam na aave to aisi-taisi mein jao Proverb in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a man named Premchandra. Premchandra was the village’s largest landowner and was known for his vast landholdings. He owned land in twelve villages and was highly respected by the people.

However, whenever a problem arose in the village, Premchandra was unable to find a solution. Once, there was a drought in the village, and all the villagers turned to Premchandra for help. But Premchandra had neither a solution to offer nor a plan to help them.

The solution to this problem was found by an ordinary farmer in the village, who discovered a way to overcome the water shortage. The villagers praised this farmer greatly and neglected Premchandra.

Then, an elder of the village said, “Despite being the chief of twelve villages, Premchandra was of no use to us. ‘He is like a chief of twelve villages but of no real help when needed.’ The real value lies in someone who can help during times of need.”

This story teaches us that prestige and wealth have no significance if they are not helpful when needed. The true value lies in a person who can provide help during times of crisis.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQ:

इस कहावत का प्रयोग किस प्रकार के संदर्भ में होता है?

यह कहावत उन स्थितियों में प्रयोग की जाती है जहाँ लोग पद या शक्ति के आधार पर किसी का मूल्यांकन करते हैं, लेकिन उस व्यक्ति की वास्तविक उपयोगिता पर ध्यान नहीं देते।

क्या इस कहावत में नैतिक संदेश होता है?

हां, इस कहावत में एक नैतिक संदेश है कि व्यक्ति की असली कीमत उसके पद या धन से नहीं, बल्कि उसकी उपयोगिता और मानवीय गुणों से होती है।

इस कहावत का अन्य संस्कृतियों में क्या समकक्ष हो सकता है?

अन्य संस्कृतियों में इस कहावत का समकक्ष “Actions speak louder than titles” या “A man is known by his deeds, not by his title” हो सकता है।

क्या इस कहावत का उपयोग आत्म-सुधार के संदर्भ में किया जा सकता है?

हां, आत्म-सुधार के संदर्भ में इस कहावत का उपयोग यह दर्शाने के लिए किया जा सकता है कि असली मूल्य और सफलता आपकी व्यक्तिगत योग्यता और उपयोगिता में है, न कि केवल सामाजिक या पेशेवर स्थिति में।

क्या इस कहावत को नेतृत्व और प्रबंधन के संदर्भ में लागू किया जा सकता है?

नेतृत्व और प्रबंधन के संदर्भ में, इस कहावत का उपयोग यह सिखाने के लिए किया जा सकता है कि एक सच्चा नेता वह होता है जिसकी स्थिति और शक्ति समूह के हित में प्रभावी ढंग से उपयोग की जाती है।

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