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बारह बरस पीछे घूरे के भी दिन फिरते हैं, अर्थ, प्रयोग(Barah baras peeche ghoore ke bhi din phirte hain)

परिचय: “बारह बरस पीछे घूरे के भी दिन फिरते हैं” यह हिंदी मुहावरा जीवन में समय के बदलाव और भाग्य की अनिश्चितता को दर्शाता है। यह बताता है कि किसी की भी परिस्थितियाँ समय के साथ बदल सकती हैं।

अर्थ: इस मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है कि जैसे बारह साल बाद घूरे (राख का ढेर) के भी दिन बदल सकते हैं, वैसे ही किसी भी व्यक्ति या स्थिति के हालात बदल सकते हैं। यह मुहावरा आशा और सकारात्मकता की भावना को प्रेरित करता है।

उपयोग: यह मुहावरा अक्सर उन परिस्थितियों में प्रयोग किया जाता है जब किसी की स्थिति खराब हो और उसे आशा की जरूरत हो।

उदाहरण:

-> जब कोई व्यक्ति आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर हो लेकिन बाद में उन्नति करे, तो इस मुहावरे का प्रयोग किया जा सकता है।

-> किसी छात्र का प्रदर्शन पहले कमजोर हो और बाद में सुधार हो, तो भी इस मुहावरे का इस्तेमाल हो सकता है।

समापन: “बारह बरस पीछे घूरे के भी दिन फिरते हैं” के माध्यम से हमें यह सिखने को मिलता है कि जीवन में सब कुछ स्थायी नहीं होता और समय के साथ परिवर्तन संभव है। यह मुहावरा हमें आशा और धैर्य रखने की प्रेरणा देता है, यह बताता है कि समय के साथ परिस्थितियाँ बेहतर हो सकती हैं।

Hindi Muhavare Quiz

बारह बरस पीछे घूरे के भी दिन फिरते हैं कहावत पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में सुभाष नाम का एक किसान रहता था। सुभाष के पास जमीन बहुत कम थी और वह बहुत ही साधारण जीवन जीता था। एक साल, उसके खेतों में सूखा पड़ गया और उसकी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। सुभाष के पास अपने परिवार को पालने के लिए कुछ नहीं बचा।

सुभाष निराश हो गया और उसने सोचा कि अब उसकी किस्मत में सिर्फ दुख ही लिखा है। लेकिन गाँव के एक बुजुर्ग ने उसे समझाया, “सुभाष, ‘बारह बरस पीछे घूरे के भी दिन फिरते हैं।’ तुम्हें धैर्य रखना चाहिए और मेहनत जारी रखनी चाहिए।”

सुभाष ने उस बुजुर्ग की बात मानी और फिर से खेती में लग गया। अगले बारह वर्षों में, उसने कठिन परिश्रम किया और धीरे-धीरे उसकी किस्मत बदलने लगी। उसकी फसलें अच्छी होने लगीं और वह धनी बन गया।

अंत में, सुभाष का नाम पूरे गाँव में एक सफल और समृद्ध किसान के रूप में फैल गया। गाँववाले उसकी मेहनत और धैर्य की प्रशंसा करने लगे।

सुभाष की कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में बुरे दिन आते हैं, लेकिन धैर्य और कठिन परिश्रम से वे अच्छे दिनों में बदल सकते हैं। यह कहानी हमें बताती है कि “बारह बरस पीछे घूरे के भी दिन फिरते हैं” और किसी की किस्मत कभी भी बदल सकती है।

शायरी:

घूरे के भी दिन बदलते, बारह बरस में यार,
जिंदगी के इस सफर में, हर दर्द से गुजार।
कभी धूप, कभी छाँव है, कभी सुख, कभी हार,
“बारह बरस पीछे”, कहते हैं, बदलता हर तकदीर का राज़।

जिसे आज दुनिया ने ठुकराया, कल वो सितारा बने,
हर उम्मीद का दामन थामे, ये जीवन का करिश्मा कहे।
वक्त के इस खेल में, किस्मत का हर फेरा,
आज जो खाली हाथ है, कल वो बने जहाँ का मेरा।

बारह बरस का इंतजार, फिर खुशियाँ आएं भरपूर,
जिंदगी की इस राह में, हर मुश्किल हो दूर।
जो आज टूटा है, वो कल फिर से जुड़ जाएगा,
ये जीवन का चक्र है, सब कुछ बदल जाएगा।

इसलिए कहते हैं सब, “बारह बरस पीछे घूरे के”,
जीवन का हर पल, बदलता रहे ये नूर ये।
हर ख्वाब, हर आस, इस जीवन में सच हो जाए,
जो आज है पीछे, कल वो आगे बढ़ जाए।

 

बारह बरस पीछे घूरे के भी दिन फिरते हैं शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of बारह बरस पीछे घूरे के भी दिन फिरते हैं – Barah baras peeche ghoore ke bhi din phirte hain Proverb:

Introduction: The Hindi proverb “Barah baras peeche ghoore ke bhi din phirte hain” illustrates the changes of time and the uncertainty of fate in life. It indicates that anyone’s circumstances can change over time.

Meaning: The literal meaning of this proverb is that just as the days of a heap of ashes (घूरे) can change after twelve years, similarly, the situation of any person or condition can change. This proverb inspires a sense of hope and positivity.

Usage: This proverb is often used in situations where someone’s circumstances are poor, and they need hope.

Examples:

-> When a person who is economically or socially weak makes progress later, this proverb can be used.

-> It can also be used when a student’s performance improves after initially being weak.

Conclusion: “Barah baras peeche ghoore ke bhi din phirte hain” teaches us that nothing in life is permanent and change is possible over time. This proverb encourages us to maintain hope and patience, indicating that circumstances can improve with time.

Story of Barah baras peeche ghoore ke bhi din phirte hain Proverb in English:

In a small village lived a farmer named Subhash. Subhash owned very little land and led a simple life. One year, a drought hit his fields, and his entire crop was destroyed. Subhash was left with nothing to support his family.

Disheartened, Subhash began to believe that his fate was sealed to only endure hardships. However, an elder in the village advised him, “Subhash, remember, ‘even the heap of ashes (ghoora) sees better days after twelve years.’ You must be patient and continue to work hard.”

Subhash heeded the elder’s advice and returned to farming. Over the next twelve years, he worked tirelessly, and gradually his fortune began to change. His crops improved, and he became wealthy.

Eventually, Subhash’s name spread across the village as a successful and prosperous farmer. The villagers praised his hard work and patience.

Subhash’s story teaches us that life has its ups and downs, but with patience and hard work, bad times can turn into good ones. It tells us that “even the heap of ashes (ghoora) sees better days after twelve years,” meaning anyone’s luck can change with time.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQ:

इस कहावत का प्रयोग किस प्रकार के संदर्भ में होता है?

यह कहावत अक्सर उन स्थितियों में प्रयोग की जाती है जहां किसी की उपेक्षा हो रही हो या किसी को कम आंका जा रहा हो, और यह दिखाने के लिए कि समय के साथ स्थितियां बदल सकती हैं।

क्या इस कहावत में आशावादी संदेश निहित है?

हां, इस कहावत में एक आशावादी संदेश है कि कोई भी स्थिति स्थायी नहीं है और समय के साथ बदलाव संभव है।

क्या इस कहावत का कोई व्यावहारिक उपयोग है?

व्यावहारिक जीवन में, यह कहावत लोगों को धैर्य रखने और निराश न होने का संदेश देती है, यह बताते हुए कि परिस्थितियां बदल सकती हैं।

इस कहावत का अन्य संस्कृतियों में क्या समकक्ष हो सकता है?

अन्य संस्कृतियों में भी समानार्थी कहावतें हो सकती हैं, जैसे कि “Every dog has its day” या “Time changes everything”।

क्या इस कहावत का उपयोग किशोरों और युवाओं को प्रेरित करने में किया जा सकता है?

हां, इस कहावत का उपयोग किशोरों और युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें धैर्य और लगन के महत्व को समझाने में किया जा सकता है।

इस कहावत का किस प्रकार का नैतिक संदेश होता है?

इस कहावत का नैतिक संदेश है कि हमें किसी को या किसी स्थिति को कम नहीं आंकना चाहिए, क्योंकि समय के साथ हर चीज का महत्व बदल सकता है।

इस कहावत को व्यक्तिगत जीवन में कैसे लागू किया जा सकता है?

व्यक्तिगत जीवन में, इस कहावत का प्रयोग लोगों को यह सिखाने के लिए किया जा सकता है कि हर व्यक्ति की अपनी खासियत होती है और हर किसी को अपने समय का इंतजार करना चाहिए। यह स्वयं को कम न समझने और धैर्य रखने का संदेश देता है।

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