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बाप बड़ा न भइया, सब से बड़ा रूपइया, अर्थ, प्रयोग(Baap bada na bhaiya, sabse bada rupaiya)

परिचय: “बाप बड़ा न भइया, सब से बड़ा रूपइया” यह हिंदी मुहावरा व्यक्त करता है कि आज के समाज में धन का महत्व किस हद तक बढ़ गया है। इस मुहावरे का प्रयोग अक्सर विडंबनापूर्ण रूप से होता है, जिसमें धन को पारिवारिक रिश्तों से भी ऊपर माना जाता है।

अर्थ: इस मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है कि पैसा, परिवार के सदस्यों से भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। इसमें यह संकेत मिलता है कि आज के समाज में लोग रिश्तों से ज्यादा धन को महत्व देते हैं।

उपयोग: यह मुहावरा उन परिस्थितियों में प्रयोग किया जाता है जहाँ धन के लिए लोग अपने नैतिक मूल्यों और पारिवारिक रिश्तों को भुला देते हैं।

उदाहरण:

-> जब कोई व्यक्ति अपने परिवार से ज्यादा धन को महत्व देता है, तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जा सकता है।

-> व्यापार में अक्सर इस मुहावरे का प्रयोग होता है, जहां पैसे की अहमियत रिश्तों से अधिक होती है।

समापन: इस मुहावरे के माध्यम से हमें सिखने को मिलता है कि आज के समय में पैसा किसी भी चीज़ से अधिक महत्व रखता है, चाहे वह पारिवारिक रिश्ते हों या नैतिक मूल्य। यह मुहावरा हमें यह भी बताता है कि समाज में धन की बढ़ती प्राथमिकता किस तरह अन्य महत्वपूर्ण मूल्यों और रिश्तों को प्रभावित कर रही है।

Hindi Muhavare Quiz

बाप बड़ा न भइया, सब से बड़ा रूपइया कहावत पर कहानी:

एक छोटे से शहर में अनुभव नाम का एक व्यापारी रहता था। अनुभव बहुत ही मेहनती और समझदार था, लेकिन उसकी एक कमजोरी थी – लालच। उसका परिवार उससे बहुत प्यार करता था, लेकिन अनुभव का मन हमेशा धन कमाने में लगा रहता था।

एक दिन, अनुभव को अपने व्यापार में बड़ा मुनाफा कमाने का मौका मिला। लेकिन इसके लिए उसे अपने भाई के साथ किये गए एक समझौते को तोड़ना पड़ा। अनुभव ने बिना सोचे-समझे अपने भाई के साथ धोखा किया और बड़ा मुनाफा कमाया।

जब इस बात का पता अनुभव के परिवार को चला, तो सभी बहुत दुखी हुए। अनुभव के पिता ने उससे कहा, “बेटा, तुमने पैसे के लिए अपने भाई के साथ विश्वासघात किया। याद रखो, ‘बाप बड़ा न भइया, सब से बड़ा रूपइया’। लेकिन क्या तुम्हें लगता है कि यह पैसा तुम्हारे रिश्तों की कीमत चुका सकता है?”

अनुभव को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि धन कमाना जरूरी है, लेकिन नैतिकता और पारिवारिक रिश्तों की अहमियत उससे कहीं अधिक है।

अंत में, अनुभव ने अपने भाई से माफी मांगी और पारिवारिक संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश की। इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि पैसा भले ही जरूरी हो, लेकिन पारिवारिक संबंध और नैतिक मूल्य हमेशा उससे ऊपर होते हैं।

शायरी:

रूपइया जब सीने पर चढ़ जाए,
तब रिश्तों की कीमत कहाँ नजर आए।
“बाप बड़ा न भइया, सब से बड़ा रूपइया”,
इस दौर की सच्चाई है, प्यारे भैया।

दुनिया की इस भागदौड़ में,
रिश्तों का मोल कौन समझे।
पैसा ही तो है इस ज़माने का खुदा,
बिना इसके तो हर बंदा अधूरा, जुदा।

दिलों के रिश्ते तोड़, रूपयों की खातिर,
भूल जाते हैं लोग, अपनों की बातें अक्सर।
पर सच तो यह है, जीवन की यह रीत,
पैसा हाथ का मैल, रिश्ते जीवन की प्रीत।

खोजते फिरते हैं सभी, रूपइया जहाँ-तहाँ,
भूल जाते हैं वो, जो है सच्चा जहाँ।
“बाप बड़ा न भइया, सब से बड़ा रूपइया”,
ये कहानी है उसकी, जो भूला प्यार, वफा।

 

बाप बड़ा न भइया, सब से बड़ा रूपइया शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of बाप बड़ा न भइया, सब से बड़ा रूपइया – Baap bada na bhaiya, sabse bada rupaiya Proverb:

Introduction: The Hindi proverb “Baap bada na bhaiya, sabse bada rupaiya” expresses how the importance of money has escalated in today’s society. This proverb is often used ironically, placing money above familial relationships.

Meaning: The literal meaning of this proverb is that money has become more important than family members. It suggests that in today’s society, people give more importance to money than relationships.

Usage: This proverb is used in situations where people forget their moral values and familial relationships for the sake of money.

Examples:

-> When a person values money more than their family, this proverb can be applied.

-> It is often used in business contexts, where the significance of money overshadows relationships.

Conclusion: This proverb teaches us that in today’s time, money holds more importance than anything else, whether it be familial relations or moral values. It also highlights how the growing priority of money in society is affecting other important values and relationships.

Story of Baap bada na bhaiya, sabse bada rupaiya Proverb in English:

In a small town, there lived a businessman named Anubhav. Anubhav was hardworking and intelligent, but he had one weakness – greed. His family loved him dearly, yet Anubhav’s mind was always focused on making money.

One day, Anubhav saw an opportunity to make a significant profit in his business. However, it required him to break an agreement he had made with his brother. Without much thought, Anubhav betrayed his brother and earned a substantial profit.

When Anubhav’s family learned about this, they were deeply saddened. Anubhav’s father said to him, “Son, you betrayed your brother for money. Remember, ‘Neither father nor brother, money is the best.’ But do you think this money can compensate for the loss of relationships?”

Anubhav realized his mistake. He understood that while earning money is essential, morality and familial relationships are far more important.

In the end, Anubhav apologized to his brother and tried to rebuild the family bonds. This story teaches us that though money is necessary, familial relationships and moral values always surpass it in importance.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQ:

इस कहावत का रोज़मर्रा की बातचीत में कैसे इस्तेमाल किया जाता है?

इसे आमतौर पर तब इस्तेमाल किया जाता है जब पैसे की महत्ता को रेखांकित करना होता है, खासकर सामाजिक और पारिवारिक संबंधों के संदर्भ में।

क्या अन्य संस्कृतियों में इसी तरह की कहावतें हैं?

जी हां, अन्य संस्कृतियों में भी पैसे और सामाजिक मूल्यों के बीच के संबंध पर जोर देने वाली कहावतें होती हैं।

यह कहावत समाज और आर्थिक स्थिति पर क्या प्रभाव डालती है?

यह कहावत समाज में पैसे के महत्व और उसके प्रभाव पर प्रकाश डालती है, और यह दिखाती है कि कैसे पैसा सामाजिक संबंधों पर हावी हो सकता है।

क्या इस कहावत का उपयोग व्यंग्यात्मक रूप से किया जा सकता है?

हां, इस कहावत का प्रयोग कभी-कभी व्यंग्यात्मक रूप से भी किया जाता है जब पैसे की महत्ता को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना हो।

यह कहावत व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

यह कहावत व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में पैसे की महत्ता और उसके प्रभाव को दर्शाती है।

हिंदी कहावतों की पूरी लिस्ट एक साथ देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

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