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और बात खोटी, सही दाल-रोटी, अर्थ, प्रयोग (Aur baat khoti, Sahi daal-roti)

परिचय: “और बात खोटी, सही दाल-रोटी” यह हिंदी की एक प्रसिद्ध कहावत है, जो जीवन की एक मूलभूत सत्यता को दर्शाती है। इस कहावत का मूल भाव है कि जीवन में भोजन का महत्व सर्वोपरि है।

अर्थ: कहावत का शाब्दिक अर्थ है कि जीवन की अन्य सभी बातें गौण हैं, जब तक कि एक व्यक्ति के पास सही और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो। दाल और रोटी यहाँ आवश्यक और संतुलित आहार का प्रतीक हैं।

उपयोग: इस कहावत का प्रयोग आमतौर पर तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति को यह समझाना हो कि जीवन में वास्तविक और मौलिक चीजें ही महत्वपूर्ण होती हैं, जैसे कि भोजन।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, कोई व्यक्ति लग्जरी गाड़ियों और अन्य भौतिक संपत्तियों के पीछे दौड़ रहा है, लेकिन उसके पास खाने के लिए सही आहार नहीं है। इस स्थिति में, यह कहावत उसे जीवन की मूलभूत जरूरतों की ओर ध्यान दिलाने के लिए उपयोगी हो सकती है।

समापन: इस प्रकार, “और बात खोटी, सही दाल-रोटी” कहावत हमें यह सिखाती है कि जीवन में भौतिक सुख-सुविधाएं और विलासिता अपनी जगह हैं, पर असली संतोष और सुख तो सरल और पौष्टिक भोजन में ही निहित है। यह कहावत हमें जीवन की साधारण और आवश्यक चीजों की महत्ता को समझने की प्रेरणा देती है।

Hindi Muhavare Quiz

और बात खोटी, सही दाल-रोटी कहावत पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में सुरेंद्र नाम का एक किसान रहता था। सुरेंद्र का जीवन साधारण था, लेकिन वह अपने सीमित साधनों में खुश था। उसके पास एक छोटा सा खेत था, जहाँ वह अनाज उगाता था, और उसकी पत्नी सीता दाल और सब्जियाँ उगाती थी।

उसी गाँव में सुरेंद्र का एक दोस्त था, सुभाष, जो हमेशा बड़े-बड़े सपने देखता और अमीर बनने की चाह रखता था। सुभाष ने एक दिन सुरेंद्र से कहा, “सुरेंद्र, तुम्हारा जीवन बहुत साधारण है। तुम्हें भी बड़े शहर जाकर धन कमाना चाहिए।”

सुरेंद्र ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “मेरे दोस्त, मैं अपनी साधारण दाल-रोटी में खुश हूँ। और बात खोटी, सही दाल-रोटी।”

सुभाष शहर चला गया और वहाँ उसने कड़ी मेहनत की। वह धनवान तो बन गया, लेकिन उसका जीवन तनाव और असंतोष से भरा रहा। वहीं सुरेंद्र, अपने खेत में काम करते हुए और अपनी पत्नी के हाथ की बनी दाल-रोटी खाते हुए, प्रसन्न और संतुष्ट रहता।

एक दिन सुभाष गाँव वापस आया और सुरेंद्र को देखा। उसने पाया कि सुरेंद्र अपने साधारण जीवन में कितना खुश है। सुभाष ने सुरेंद्र से कहा, “तुम सही थे सुरेंद्र, जीवन में सच्चा सुख साधारण चीजों में ही है।”

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि “और बात खोटी, सही दाल-रोटी” कहावत का अर्थ है कि जीवन में असली संतोष और सुख साधारण और मौलिक चीजों, जैसे कि पौष्टिक भोजन में ही निहित है। बड़े सपने और धन की चाहत इंसान को संतोष नहीं दे सकते जितना कि एक साधारण और संतुष्ट जीवन दे सकता है।

शायरी:

ख्वाबों की दौड़ में, दौलत की राहों में,
भूले से हम जिंदगी की असल चाहों में।
“और बात खोटी, सही दाल-रोटी”,
जीवन की सच्चाई है यही, बाकी सब बातें होती खोटी।

भरी दुनिया में लोग ढूंढते रहते खुशियां,
पर सच्ची खुशी तो है घर की सादी दाल-रोटी में।
जहां धन की चकाचौंध है अंधी,
वहां सुकून की बातें हो जाती हैं फीकी।

बड़े बड़े महलों में, लाखों की शान में,
खो गया वो आराम, जो था छोटे से मकान में।
“और बात खोटी, सही दाल-रोटी”,
यही तो है जीवन की असली मोहब्बत, बाकी सब है झूठी।

सपनों की इस दौड़ में, हर कोई है बेखबर,
भूल गए वो बात, जो थी बचपन से सबसे खास।
“और बात खोटी, सही दाल-रोटी”,
यही तो सिखाता है जिंदगी का हर एक रास्ता, बाकी सब है बस ख्वाबों का फासला।

 

और बात खोटी, सही दाल-रोटी शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of और बात खोटी, सही दाल-रोटी – Aur baat khoti, Sahi daal-roti Proverb:

Introduction: “और बात खोटी, सही दाल-रोटी” is a famous Hindi proverb that illustrates a fundamental truth of life. The core essence of this proverb is that in life, the importance of food is paramount.

Meaning: The literal meaning of the proverb is that all other aspects of life are secondary as long as a person has access to proper and nutritious food. Here, ‘dal’ (lentils) and ‘roti’ (bread) symbolize the essential and balanced diet.

Usage: This proverb is commonly used when one needs to explain that the real and fundamental things in life are the most important, such as food.

Examples:

-> Suppose someone is chasing luxury cars and other material possessions, but lacks proper nutrition in their diet. In this scenario, this proverb could be used to remind them of the basic necessities of life.

Conclusion: Thus, the proverb “और बात खोटी, सही दाल-रोटी” teaches us that while material comforts and luxuries have their place in life, real satisfaction and happiness are found in simple and nutritious food. This proverb inspires us to understand the importance of life’s simple and essential things.

Story of Aur baat khoti, Sahi daal Proverb in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a farmer named Surendra. Surendra’s life was simple, but he was content with his limited means. He owned a small farm where he grew grains, and his wife Sita grew lentils and vegetables.

In the same village, there was Surendra’s friend, Subhash, who always dreamed big and aspired to become wealthy. One day, Subhash said to Surendra, “Surendra, your life is too ordinary. You should also go to the city and earn money.”

Surendra replied with a smile, “My friend, I am happy with my simple dal-roti (lentils and bread). ‘Aur baat khoti, sahi dal-roti’ (Other things are irrelevant, right dal-roti is what matters).”

Subhash went to the city and worked hard. He became wealthy but his life was filled with stress and dissatisfaction. Meanwhile, Surendra, working in his field and eating the dal-roti prepared by his wife, remained joyful and content.

One day, Subhash returned to the village and saw Surendra. He realized how happy Surendra was in his simple life. Subhash said to Surendra, “You were right, Surendra, true happiness in life lies in simple things.”

This story teaches us that the proverb “Aur baat khoti, sahi dal-roti” means that real contentment and happiness in life are embedded in simple and fundamental things, such as nutritious food. Big dreams and the desire for wealth cannot bring the satisfaction that a simple and content life can offer.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

इस कहावत का प्रयोग किस प्रकार के संदर्भ में किया जा सकता है?

इस कहावत का प्रयोग उन स्थितियों में किया जा सकता है जहां बुनियादी जरूरतों और मूलभूत सुविधाओं का महत्व समझाया जाता है, विशेषकर लालच या विलासिता की चीजों की तुलना में।

क्या यह कहावत केवल खाने के संदर्भ में ही लागू होती है?

भोजन के संदर्भ में यह कहावत सीधे तौर पर लागू होती है, लेकिन इसका व्यापक अर्थ जीवन के अन्य पहलुओं में मूलभूत आवश्यकताओं की महत्वपूर्णता से भी जुड़ा हो सकता है।

इस कहावत का संबंध जीवन के किन पहलुओं से हो सकता है?

इस कहावत का संबंध जीवन के ऐसे पहलुओं से हो सकता है जहाँ मूलभूत आवश्यकताओं जैसे भोजन, आश्रय, और सुरक्षा का महत्व अधिक होता है, बजाय आलीशान या अनावश्यक चीजों के।

यह कहावत किन परिस्थितियों में सहायक हो सकती है?

यह कहावत उन परिस्थितियों में सहायक हो सकती है जहां व्यक्ति को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी हों, खासकर जब संसाधन सीमित हों।

इस कहावत को जीवन की किन अन्य उक्तियों या कहावतों के साथ तुलना की जा सकती है?

इस कहावत की तुलना “रोटी, कपड़ा और मकान” जैसी कहावतों के साथ की जा सकती है, जो जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं पर जोर देती हैं।

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