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अरध तजहिं बुध सरबस जाता, अर्थ, प्रयोग(Aradh tajahin budha sarbas jaata)

परिचय: “अरध तजहिं बुध सरबस जाता” यह हिंदी कहावत बुद्धिमान व्यक्तियों के निर्णय लेने की प्रक्रिया और उनके जीवन दर्शन को दर्शाती है।

अर्थ: इस कहावत का अर्थ है कि बुद्धिमान लोग कठिनाई या संकट के समय में अपना आधा नुकसान स्वीकार कर लेते हैं बजाय इसके कि वे अपनी सभी संपत्ति या स्थिति को खो दें।

उपयोग: यह कहावत आमतौर पर तब प्रयोग की जाती है जब किसी को यह समझाना हो कि कभी-कभी आंशिक नुकसान स्वीकार करना बेहतर होता है बजाय पूर्ण विनाश का सामना करने के।

उदाहरण:

-> उदाहरण के तौर पर, एक व्यापारी जिसका व्यापार नुकसान में जा रहा है, वह अपनी कुछ संपत्ति बेचकर कर्ज को चुका सकता है और बाकी व्यापार को बचा सकता है, बजाय इसके कि वह पूरी तरह से दिवालिया हो जाए।

समापन: इस कहावत से हमें यह सिखने को मिलता है कि जीवन में संयम और समझदारी से निर्णय लेना महत्वपूर्ण है। यह हमें बताता है कि कभी-कभी आंशिक नुकसान स्वीकार करना पूर्ण विनाश से बचने का एक बुद्धिमानी भरा कदम होता है।

Hindi Muhavare Quiz

अरध तजहिं बुध सरबस जाता कहावत पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में सुधीर नाम का एक व्यापारी रहता था। सुधीर का कपड़े का व्यापार था, जो उसने वर्षों की मेहनत और लगन से खड़ा किया था। एक दिन, एक अज्ञात बीमारी के कारण गांव में महामारी फैल गई, और लोगों ने बाजार आना-जाना कम कर दिया। सुधीर का व्यापार भी इससे प्रभावित हुआ।

व्यापार में नुकसान होने लगा और सुधीर पर कर्ज बढ़ने लगा। उसके सामने दो रास्ते थे – या तो वह अपना सारा व्यापार बेच दे और कर्ज से मुक्त हो जाए, या फिर व्यापार का एक हिस्सा बेचकर बाकी को बचाए। सुधीर ने दूसरा विकल्प चुना। उसने अपने व्यापार का कुछ हिस्सा बेच दिया और कर्ज का एक बड़ा हिस्सा चुका दिया।

इस फैसले ने उसे कुछ समय दिया और धीरे-धीरे उसने अपने व्यापार को फिर से खड़ा किया। उसने नए तरीकों से व्यापार को बढ़ाया और जल्द ही उसका व्यापार पहले से भी ज्यादा सफल हो गया।

सुधीर ने इस अनुभव से सीखा कि “अरध तजहिं बुध सरबस जाता” – अर्थात् बुद्धिमान व्यक्ति कठिनाइयों में भी संयमित रहते हैं और अपना कुछ नुकसान स्वीकार करके पूर्ण विनाश से बचते हैं। उनका यह निर्णय आगे चलकर उन्हें और भी बड़ी सफलताओं की ओर ले जाता है।

शायरी:

कठिनाइयों की राह में, जब संकट आता है,
“अरध तजहिं बुध सरबस जाता” का पाठ पढ़ाता है।

जीवन की इस बाजी में, जब हर चाल भारी है,
तब बुद्धिमान वो है, जो आधे में संतुष्टि धारी है।

समय के साथ जो बहे, वो सागर का पानी है,
अपना थोड़ा खोकर भी, जीवन अनमोल बानी है।

आँधियों में जो टूटे नहीं, वही तो इंसान है,
“अरध तजहिं” का मंत्र, उसे हर पल का ज्ञान है।

कभी-कभी थोड़ा हारकर, जीत की राह होती है,
जो बीच मझधार में डटे, उसी की बात होती है।

जीवन की इस दौड़ में, हर कदम पर इम्तिहान है,
“अरध तजहिं बुध सरबस जाता”, यही सच्चा ज्ञान है।

 

अरध तजहिं बुध सरबस जाता शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of अरध तजहिं बुध सरबस जाता – Aradh tajahin budha sarbas jaata Proverb:

Introduction: The Hindi proverb “Aradh tajahin budha sarbas jaata” reflects the decision-making process and life philosophy of wise individuals.

Meaning: The meaning of this proverb is that wise people accept a partial loss during times of difficulty or crisis, rather than risking the loss of all their assets or status.

Usage: This proverb is commonly used to convey that sometimes it’s better to accept a partial loss rather than facing total destruction.

Examples:

-> For instance, a businessman experiencing losses in his business can choose to sell some of his assets to pay off debts and save the rest of his business, rather than going completely bankrupt.

Conclusion: This proverb teaches us the importance of making decisions with moderation and wisdom in life. It suggests that accepting a partial loss can be a prudent step to avoid complete ruin.

Story of Aradh tajahin budha sarbas jaata Proverb in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a trader named Sudhir. Sudhir owned a clothing business, which he had built up over years of hard work and dedication. One day, an unknown disease spread across the village, leading to an epidemic, and people began avoiding the market. Sudhir’s business was also affected by this.

Sudhir started facing losses in his business, and his debts began to increase. He was faced with two choices – either sell off his entire business and be free from debt, or sell a part of his business to save the rest. Sudhir chose the latter option. He sold a part of his business and paid off a significant portion of his debt.

This decision bought him some time, and gradually, he rebuilt his business. He expanded his trade in new ways and soon, his business became even more successful than before.

Sudhir learned from this experience that “अरध तजहिं बुध सरबस जाता” – meaning, a wise person remains composed even in difficulties and accepts some loss to avoid complete destruction. This decision later leads them to even greater successes.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

क्या इस कहावत में कोई ऐतिहासिक महत्व है?

नहीं, इस कहावत में कोई विशेष ऐतिहासिक घटना का संदर्भ नहीं है, यह केवल एक सामान्य जीवन सत्य को व्यक्त करती है।

क्या इस कहावत का कोई विरोधाभास है?

नहीं, इस कहावत में कोई विरोधाभास नहीं है, बल्कि यह एक सीधा और सरल सन्देश प्रदान करती है।

क्या यह कहावत केवल भाषा के सीमित है या इसका विस्तार है?

यह कहावत भाषा के सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक और व्यक्तिगत सातत्य दिखाई जा सकती है।

इस कहावत का प्रयोग किस परिस्थिति में हो सकता है?

यह कहावत किसी भी परिस्थिति में उपयोगी हो सकती है जहाँ सच्चाई की भूमिका महत्वपूर्ण हो।

क्या इस कहावत का कोई सांस्कृतिक संबंध है?

इस कहावत का सीधा संबंध किसी विशेष सांस्कृतिक परंपरा से नहीं है, यह अधिकांशत: सामान्य मानव जीवन के सिद्धांतों को दर्शाती है।

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