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अपना हाथ जगन्नाथ का भात, अर्थ, प्रयोग(Apna haath Jagannath ka bhat)

“अपना हाथ जगन्नाथ का भात” यह कहावत आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की भावना को बखूबी दर्शाती है। इस कहावत का अर्थ है कि अपने कार्य स्वयं करने में जो संतुष्टि और आत्मविश्वास है, वह दूसरों के भरोसे रहने में नहीं।

परिचय: इस कहावत का प्रयोग हमारे समाज में स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के महत्व को रेखांकित करने के लिए किया जाता है। यह हमें यह सिखाती है कि हमें अपने कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

अर्थ: “अपना हाथ जगन्नाथ” का शाब्दिक अर्थ है कि अपने हाथों से किया गया कार्य ही सबसे उत्तम है। इसमें ‘जगन्नाथ’ का उपयोग प्रभु या उच्च शक्ति के रूप में होता है, यह दर्शाता है कि अपने प्रयासों से किया गया काम ईश्वरीय आशीर्वाद के समान है।

उपयोग: यह कहावत तब प्रयोग की जाती है जब हमें किसी को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना होता है या यह दर्शाना होता है कि अपने कार्य स्वयं करने में जो खुशी और संतोष है, वह दूसरों के भरोसे रहने में नहीं।

उदाहरण:

-> मान लीजिए एक छात्र अपने परिवार या ट्यूटर पर निर्भर रहता है अपनी पढ़ाई के लिए। लेकिन जब वह स्वयं पढ़ाई करने लगता है और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करता है, तो उसे समझ आता है कि “अपना हाथ जगन्नाथ” कहावत का क्या अर्थ है।

समापन: इस कहावत से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें अपने कार्यों को स्वयं करने की आदत डालनी चाहिए। यह हमें आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की ओर प्रेरित करता है और यह दर्शाता है कि हमारी सफलता हमारे अपने प्रयासों पर निर्भर करती है।

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अपना हाथ जगन्नाथ का भात कहावत पर कहानी:

एक छोटे से गांव में अंश नाम का एक लड़का रहता था। अंश हमेशा अपने माता-पिता और बड़े भाई पर निर्भर रहता था। चाहे स्कूल का होमवर्क हो या छोटे-मोटे काम, वह हमेशा दूसरों की मदद लेता था।

एक दिन, उसके पिता ने सोचा कि अब समय आ गया है कि अंश को स्वावलंबी बनाया जाए। उन्होंने अंश से कहा, “बेटा, अब तुम्हें अपने काम खुद करने होंगे। याद रखो, ‘अपना हाथ जगन्नाथ’।”

पहले तो अंश को थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन धीरे-धीरे उसने अपने काम खुद करना शुरू किया। चाहे वह होमवर्क हो या घर के अन्य काम, अंश ने सब कुछ खुद संभालना शुरू कर दिया।

कुछ ही समय में, अंश में बड़ा बदलाव आया। वह अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बन गया। उसके शिक्षकों और माता-पिता ने भी उसकी तारीफ की।

अंश ने सीखा कि ‘अपना हाथ जगन्नाथ’ होता है, और उसने इस कहावत को अपने जीवन में उतार लिया। उसने महसूस किया कि स्वयं किए गए प्रयासों में जो संतुष्टि और आत्मविश्वास है, वह कहीं और नहीं मिल सकता।

इस तरह, अंश ने न केवल अपने कार्यों में, बल्कि जीवन के हर पहलू में स्वावलंबन का महत्व समझा और अपनाया।

शायरी:

अपने हाथों में ही छिपी है तकदीर अपनी,
“अपना हाथ जगन्नाथ”, यही सीख है ज़िंदगानी की।
दूसरों के भरोसे क्या रखना, जब खुद ही हैं अपने साथ,
हर काम में है संभव, जब अपना हो हाथ।

जब खुद पर हो भरोसा, तो कोई नहीं है बाधा,
“अपना हाथ जगन्नाथ” में ही समझो जीवन का राज़।
स्वयं के प्रयासों से ही मिलता है आत्मसंतोष,
अपने कर्मों पर हो गर्व, यही है जीवन का संदेश।

खुद के बल पर चलना, यही है असली राह,
“अपना हाथ जगन्नाथ” से मिलती है जीवन की सही चाह।
दूसरों की राह देखने की क्या है जरूरत,
जब अपने ही हाथों में हो, सपनों की पूर्ति।

 

अपना हाथ जगन्नाथ का भात शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of अपना हाथ जगन्नाथ का भात – Apna haath Jagannath ka bhat Proverb:

The Hindi proverb “Apna haath Jagannath ka bhat” excellently illustrates the spirit of self-reliance and self-sufficiency. It means that the satisfaction and confidence gained from doing one’s work independently cannot be found in depending on others.

Introduction: This proverb is used in our society to underline the importance of self-reliance and independence. It teaches us that we should not depend on others for our tasks.

Meaning: The literal meaning of “Apna haath Jagannath ka bhat” is that the work done by one’s own hands is the best. ‘Jagannath’ here is used as a metaphor for God or a higher power, signifying that the work done by our own efforts is akin to divine blessing.

Usage: This proverb is used when we need to encourage someone to become self-reliant or to show that the happiness and contentment in doing one’s work independently are not found in reliance on others.

Examples:

Suppose a student depends on his family or tutor for his studies. But when he starts studying independently and scores well in exams, he realizes the true meaning of “Apna haath Jagannath ka bhat.”

Conclusion: This proverb teaches us that we should cultivate the habit of doing our tasks ourselves. It motivates us towards self-reliance and self-sufficiency and shows that our success depends on our own efforts.

Story of Apna haath Jagannath ka bhat Proverb in English:

In a small village, there lived a boy named Ansh. Ansh always depended on his parents and elder brother. Be it school homework or small chores, he always sought help from others.

One day, his father thought it was time to make Ansh self-reliant. He said to Ansh, “Son, now you have to do your work by yourself. Remember, ‘Your own hand is like Jagannath’.”

Initially, Ansh faced some difficulties, but gradually he started doing his tasks independently. Whether it was homework or other household chores, Ansh began managing everything on his own.

In a short time, Ansh underwent a significant transformation. He became more capable and self-reliant. His teachers and parents also praised him.

Ansh learned that ‘Your own hand is like Jagannath’, and he incorporated this proverb into his life. He realized that the satisfaction and confidence gained from one’s own efforts are unmatched.

Thus, Ansh not only applied this in his tasks but also understood and embraced the importance of self-reliance in every aspect of life.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

क्या इसका अर्थ है कि सहारा लेना गलत है?

नहीं, इसका अर्थ है कि सहारा लेना गलत नहीं है, लेकिन सर्वप्रथम आपको अपनी मेहनत और कोशिशों पर भरोसा करना चाहिए।

क्या यह कहावत आत्मनिर्भरता की बात करती है?

हां, यह कहावत आत्मनिर्भरता और स्वायत्तता की महत्वपूर्णता पर बल देती है।

क्या इसका कोई इतिहासिक संदर्भ है?

इसका कोई विशेष इतिहासिक संदर्भ नहीं है, लेकिन यह भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को दर्शाती है।

क्या यह कहावत केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए है?

नहीं, यह सामाजिक संबंध, समृद्धि, और समृद्धि के क्षेत्र में भी लागू हो सकती है।

क्या इसका विरोध है “संघटित या समृद्धि में शक्ति है”?

नहीं, इसका विरोध नहीं है, क्योंकि संघटित और समृद्धि में भी व्यक्ति की मेहनत और योगदान की आवश्यकता होती है।

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