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आए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास, अर्थ, प्रयोग(Aaye the Hari bhajan ko, otan lage kapas)

परिचय: “आए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास” यह हिंदी कहावत एक प्राचीन और गहरे अर्थ वाली कहावत है, जो हमें जीवन में प्राथमिकताओं के विषय में सिखाती है।

अर्थ: इस कहावत का सीधा अर्थ है कि कई बार हम किसी उद्देश्य से शुरुआत करते हैं, लेकिन रास्ते में हमारी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं और हम मूल उद्देश्य से भटक जाते हैं। यह कहावत हमें याद दिलाती है कि हमें अपने मूल उद्देश्य पर दृढ़ रहना चाहिए।

उपयोग: इस कहावत का प्रयोग तब होता है जब हमें किसी व्यक्ति को यह समझाना होता है कि वे अपने मूल लक्ष्य से भटक गए हैं। यह विशेषकर उन परिस्थितियों में प्रयोग होता है जहां लोग अपने मूल उद्देश्यों को भूलकर अन्य बातों में लग जाते हैं।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, एक विद्यार्थी जो पढ़ाई के लिए बड़े शहर गया था, लेकिन वहां जाकर वह मनोरंजन और अन्य गतिविधियों में इतना व्यस्त हो गया कि उसकी पढ़ाई प्रभावित होने लगी। इस स्थिति में यह कहावत पूरी तरह लागू होती है।

समापन: “आए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास” यह कहावत हमें यह सिखाती है कि हमें अपने मूल उद्देश्यों पर दृढ़ रहना चाहिए और बाहरी प्रलोभनों से भटकने से बचना चाहिए। यह हमें यह भी बताती है कि जीवन में संयम और ध्यान केंद्रित रखना कितना महत्वपूर्ण है।

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आए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास कहावत पर कहानी:

एक छोटे से गांव में विशाल नाम का एक युवक रहता था। विशाल ने अपने जीवन को भगवान की भक्ति में समर्पित करने का निश्चय किया था। वह हमेशा कहता, “मैं तो हरि का भजन करने आया हूँ।”

एक दिन, उसने सुना कि पास के शहर में एक बड़ा धार्मिक मेला लगा है। वहाँ जाने का निश्चय करते हुए, विशाल ने सोचा कि इससे उसकी भक्ति और बढ़ेगी।

शहर पहुँचकर, विशाल ने धार्मिक प्रवचन सुने और भजन-कीर्तन में भाग लिया। लेकिन धीरे-धीरे, वह मेले की चकाचौंध में खोने लगा। वहाँ की रंगीनियाँ, खेल-तमाशे, और विभिन्न दुकानें उसे अपनी ओर खींचने लगीं।

विशाल ने शुरुआत में सोचा था कि वह केवल भगवान की भक्ति के लिए यहाँ आया है, लेकिन अब वह खुद को मेले के आकर्षणों में खोता जा रहा था। उसका अधिकतर समय अब खेल-तमाशों और दुकानों में बीतने लगा।

जब मेला समाप्त हुआ, तो विशाल को अहसास हुआ कि वह अपने मूल उद्देश्य से भटक गया था। उसे याद आया कि वह तो हरि का भजन करने आया था, लेकिन वह तो मेले की रंगीनियों में खो गया था। उसे तब समझ में आया कि “आए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास” कहावत का अर्थ क्या है। उसने सीखा कि जीवन में अपने मूल उद्देश्य पर दृढ़ रहना और बाहरी प्रलोभनों से भटकने से बचना बेहद महत्वपूर्ण है।

इस कहानी के माध्यम से, हमें यह सीखने को मिलता है कि जीवन में हमें अपने मूल उद्देश्यों को नहीं भूलना चाहिए और बाहरी आकर्षणों से अपने लक्ष्य से भटकने से बचना चाहिए।

शायरी:

आए थे हरि भजन को, लेकिन हो गया ऐसा,

खो गए दुनिया की रंगीनी में, भूल गए थे बस वैसा।

ख्वाब थे आँखों में, पर भटक गए राहों में,

भूल बैठे थे जो ठाना, बह गए बाजार की बाहों में।

लगे थे कपास ओटन में, गुम हुई थी बात जो साथी,

जीवन की इस दौड़ में, खो बैठे थे अपनी माटी।

जीवन की यह दास्तां, बताती है एक सीख,

हर पल में छुपा है राज़, हर घड़ी है एक नीक।

आए थे हरि के द्वार, पर खो बैठे अपनी राह,

जीवन का यह सफर, सिखाता है नई बात का राज।

 

आए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of आए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास – Aaye the Hari bhajan ko, otan lage kapas Proverb:

Introduction: Introduction: “Aaye the Hari bhajan ko, otan lage kapas” is a Hindi proverb that teaches us about priorities in life. It is an ancient saying with deep meaning.

Meaning: The literal meaning of this proverb is that sometimes we start with a specific purpose, but along the way, our priorities change and we deviate from our original objective. This proverb reminds us to stay true to our original purpose.

Usage: This proverb is used when we need to remind someone that they have strayed from their original goal. It is particularly applicable in situations where people forget their original intentions and get involved in other matters.

Examples:

-> Consider a student who went to a big city for studies but got so involved in entertainment and other activities that his studies began to suffer. In this situation, this proverb is completely applicable.

Conclusion: The proverb “Aaye the Hari bhajan ko, otan lage kapas” teaches us the importance of staying focused on our original goals and avoiding distractions. It also emphasizes the importance of discipline and focus in life.

Story of Aaye the Hari bhajan ko, otan lage kapas Proverb in English:

Once upon a time in a small village, there lived a young man named Vishal. Vishal had decided to dedicate his life to the worship of God, always saying, “I have come to worship Hari (God).”

One day, he heard about a big religious fair in a nearby city. Deciding to go there, Vishal thought it would enhance his devotion. Arriving in the city, Vishal attended religious discourses and participated in devotional singing. However, gradually, he got lost in the allure of the fair. The colors, games, and various shops started attracting him.

Initially, Vishal had thought he was there only for God’s worship, but now he was getting lost in the attractions of the fair. Most of his time was spent in games and shops. When the fair ended, Vishal realized that he had strayed from his original purpose. He remembered that he had come to worship Hari, but got lost in the pleasures of the fair. That’s when he understood the meaning of the proverb “Aaye the Hari bhajan ko, otan lage kapas.” He learned that it’s essential in life to stay true to your original purpose and avoid getting distracted by external temptations.

Through this story, we learn the importance of not forgetting our primary goals in life and avoiding getting sidetracked by external attractions.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

क्या हरि भजन को आना ओटन लगे कपास का एक सामान्य अभिप्रेत है?

नहीं, यह कहावत अपनी विशेष पहचान और मायने के साथ आती है, जो जीवन में एकदम सही मोड़ लाने की बात करती है.

इस कहावत में ‘हरि भजन’ और ‘कपास’ का संबंध क्या है?

‘हरि भजन’ धार्मिक भावना और ‘कपास’ अर्थात काम का पर्याय हैं, जो एक साथ आने पर सफलता की दिशा में मदद कर सकते हैं.

क्या इस कहावत का उपयोग केवल धार्मिक संदर्भों में हो सकता है?

नहीं, यह कहावत जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने के लिए भी उपयोगी है.

ओटन लगे कपास का मूल इतिहास क्या है?

यह कहावत भारतीय जीवन और संस्कृति से जुड़ा हुआ है और उसमें कृषि और धार्मिक तत्त्वों की समर्पितता है.

क्या इस कहावत का अनुसरण करना हमें सफलता दिला सकता है?

हाँ, इस कहावत का अनुसरण करना एक कार्य में संघटना और समर्पण का संकेत हो सकता है.

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