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आटे के साथ घुन भी पिसता है, अर्थ, प्रयोग(Aate ke saath ghun bhi pista hai)

परिचय: आटे के साथ घुन भी पिसता है, यह कहावत एक प्राचीन लोकोक्ति है जिसका प्रयोग आमतौर पर उन परिस्थितियों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है जहां अच्छाई के साथ बुराई भी साथ आती है।

अर्थ: इस कहावत का शाब्दिक अर्थ है कि जब आटा पीसा जाता है, तो उसमें मौजूद घुन (कीड़े) भी पिस जाते हैं। लाक्षणिक अर्थ यह है कि जब किसी बड़े कार्य या निर्णय का निष्पादन होता है, तो उसके साथ कुछ नकारात्मक परिणाम भी हो सकते हैं।

उपयोग: इस कहावत का प्रयोग तब किया जाता है जब किसी बड़े निर्णय या कार्रवाई के दौरान छोटे नुकसान भी होते हैं और उन्हें अनिवार्य माना जाता है।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, एक कंपनी ने अपनी लागत कम करने के लिए कुछ कर्मचारियों की छंटनी की। इस स्थिति में कहा जा सकता है कि “आटे के साथ घुन भी पिसता है”, यानी कंपनी के लाभ के लिए कुछ कर्मचारियों को नुकसान हुआ।

समापन: यह कहावत हमें सिखाती है कि कभी-कभी बड़े और महत्वपूर्ण निर्णयों के साथ कुछ अनचाहे परिणाम भी आते हैं। यह हमें जीवन में समझदारी के साथ निर्णय लेने की प्रेरणा देती है, साथ ही यह भी सिखाती है कि कभी-कभी छोटे नुकसानों को स्वीकार करना पड़ता है ताकि बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकें।

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आटे के साथ घुन भी पिसता है कहावत पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में ‘सुभाष’ नामक एक किसान रहता था। सुभाष के पास एक छोटा सा खेत था जहाँ वह गेहूं उगाया करता था। गेहूं की फसल अच्छी होने पर उसने फैसला किया कि इस बार वह अपना आटा खुद ही पिसेगा ताकि बचत हो सके।

उसने अपने खेत से गेहूं काटा और उन्हें घर ले आया। परंतु, जब वह गेहूं को पीसने लगा, तो उसने देखा कि गेहूं के साथ कुछ घुन (कीड़े) भी हैं। सुभाष ने सोचा कि अगर वह इन घुनों को अलग करने की कोशिश करेगा, तो बहुत समय बर्बाद होगा और शायद कुछ गेहूं भी खो जाएंगे। इसलिए, उसने निर्णय लिया कि वह घुनों के साथ ही गेहूं को पीस देगा।

जब सुभाष के पड़ोसी ने यह देखा, तो उसने पूछा, “सुभाष, तुम घुनों के साथ गेहूं क्यों पीस रहे हो?” सुभाष ने जवाब दिया, “देखो, कभी-कभी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें छोटे-छोटे नुकसान उठाने पड़ते हैं। अगर मैं इन घुनों को अलग करने में समय बर्बाद करूँगा, तो मेरी फसल का प्रसंस्करण देरी से होगा। इसलिए, मैंने फैसला किया है कि आटे के साथ घुन भी पिसेंगे।”

इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि जीवन में बड़े निर्णय और लक्ष्यों को प्राप्त करते समय, हमें कुछ छोटे नुकसानों को स्वीकार करना पड़ सकता है। यही इस कहावत “आटे के साथ घुन भी पिसता है” का संदेश है।

शायरी:

गेहूं की बाली में छुपे, घुन भी संग चले आते हैं,

ज़िंदगी के करवट में, छोटे दर्द भी साथ आते हैं।

आटे के साथ घुन पिसना, यह कुदरत का इशारा है,

हर खुशी के पीछे कहीं, गमों का भी गुज़ारा है।

कोशिशों के बीच अक्सर, छोटी ठोकर लग जाती है,

जीवन की इस चक्की में, हर आशा घुल मिल जाती है।

बड़े सपने देखने में, कभी-कभी तकलीफ उठानी पड़ती है,

जैसे आटे के साथ में, घुन की भी कुर्बानी पड़ती है।

सीख यही है जीवन की, हर खुशी के संग गम होता है,

“आटे के साथ घुन भी”, इस सच्चाई को हर किसी ने थामा होता है।

 

आटे के साथ घुन भी पिसता है शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of आटे के साथ घुन भी पिसता है – Aate ke saath ghun bhi pista hai Proverb:

Introduction: This proverb is an ancient saying commonly used to express situations where good and bad outcomes occur together.

Meaning: The literal meaning of this proverb is that when flour is ground, the weevils (insects) present in it also get ground. The figurative meaning is that when a significant task or decision is executed, it may also have some negative consequences.

Usage: This proverb is used when small losses occur during the execution of a major decision or action, and these losses are considered inevitable.

Examples:

For instance, a company decided to lay off some employees to reduce costs. In this situation, it can be said, “Aate ke saath ghun bhi pista hai”, meaning that for the benefit of the company, some employees faced losses.

Conclusion: This proverb teaches us that sometimes, important decisions bring along unintended consequences. It inspires us to make wise decisions in life, and also teaches that sometimes we must accept small losses to achieve greater goals.

Story of Aate ke saath ghun bhi pista hai Proverb in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a farmer named ‘Subhash’. Subhash owned a small field where he cultivated wheat. When the wheat crop was good, he decided to grind his own flour to save some money.

He harvested the wheat from his field and brought it home. However, when he started grinding the wheat, he noticed that there were some weevils (insects) in it. Subhash thought that if he tried to separate these weevils, it would waste a lot of time and maybe some wheat would be lost too. Therefore, he decided to grind the wheat along with the weevils.

When Subhash’s neighbor saw this, he asked, “Subhash, why are you grinding the wheat with the weevils?” Subhash replied, “Look, sometimes to achieve big goals, we have to bear small losses. If I waste time separating these weevils, the processing of my crop will be delayed. So, I have decided to grind the weevils along with the wheat.”

This story teaches us that in life, while making big decisions and achieving goals, we may have to accept some minor losses. This is the message of the proverb “Aate ke saath ghun bhi pista hai” (Along with the flour, the weevils get ground too).

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

आटे के साथ घुन भी पिसता है, इसे कैसे समझें?

यहां आटा एक सिंबल है जो संघटित होकर कुछ बनाने की क्षमता को दर्शाता है, जिससे यह साबित होता है कि चुनौतियों से गुजरने के बाद भी हम कुछ सक्षम कर सकते हैं।

क्या ठेस लगने से सीधे रास्ते पर चलना संभव है?

हाँ, ठेस लगने के बाद भी सीधे रास्ते पर चलना संभव है, क्योंकि चोटें हमें सही मार्ग पर ले जाने का अवसर प्रदान करती हैं।

क्या ठेस लगने के बाद से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है?

हाँ, ठेस लगने से हमें अपनी क्षमताओं और सामर्थ्य में विश्वास होता है, जिससे आत्मविश्वास में सुधार होता है।

क्या इस कहावत का अर्थ है कि हर ठेस एक सीख है?

जी हाँ, यह कहावत हमें यह बताती है कि प्रत्येक चोटा घाव या ठेस हमें कुछ सिखाता है और हमें मजबूत बनाता है।

क्या यह कहावत केवल शारीरिक ठेसों पर ही लागू होती है?

नहीं, यह कहावत मानसिक, आत्मिक और शारीरिक ठेसों सभी पर लागू हो सकती है, क्योंकि इनसे हमें सीखने का अवसर होता है।

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