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आम खाने से काम, पेड़ गिनने से क्या काम?, अर्थ, प्रयोग(Aam khane se kaam, Ped ginne se kya kaam?)

परिचय: “आम खाने से काम, पेड़ गिनने से क्या काम?” यह हिंदी की एक प्रसिद्ध कहावत है, जो व्यावहारिकता और परिणामों पर फोकस करने की महत्ता को दर्शाती है।

अर्थ: इस कहावत का अर्थ है कि किसी भी कार्य का मूल्य उसके परिणाम में निहित है, न कि उसके पीछे के अनुष्ठानों या अनावश्यक विवरणों में। यह कहावत यह बताती है कि अंतिम परिणाम ही महत्वपूर्ण है, बजाय उस प्रक्रिया के जो उस परिणाम तक ले जाती है।

उपयोग: इस कहावत का उपयोग तब किया जाता है जब किसी को यह समझाना होता है कि किसी कार्य की वास्तविक सफलता उसके परिणाम में है, न कि उसकी प्रक्रिया में।

उदाहरण:

-> मान लीजिए, एक व्यापारी ने बहुत सारे विज्ञापन और मार्केटिंग अभियान चलाए, लेकिन उसकी बिक्री में कोई वृद्धि नहीं हुई। ऐसे में कहा जा सकता है, “आम खाने से काम, पेड़ गिनने से क्या काम?”

समापन: इस कहावत से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें अपने प्रयासों के परिणामों पर फोकस करना चाहिए और अनावश्यक विवरणों में नहीं उलझना चाहिए। यह हमें यह भी बताता है कि परिणाम ही अंततः हमारे प्रयासों की सफलता को दर्शाते हैं।

Hindi Muhavare Quiz

आम खाने से काम, पेड़ गिनने से क्या काम? कहावत पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में मुनीश नाम का एक व्यापारी रहता था। मुनीश ने हाल ही में एक नया व्यापार शुरू किया था और उसमें सफल होने के लिए वह हर संभव प्रयास कर रहा था।

व्यापार के लिए उसने बहुत सारे आम के पेड़ लगाए थे। मुनीश हर दिन पेड़ों की गिनती करता, उन्हें पानी देता और उनकी देखभाल करता। लेकिन, उसने आम के पेड़ों के फलों पर ध्यान नहीं दिया। उसका सारा समय पेड़ों की संख्या और उनकी सुंदरता में चला जाता था।

फलों के मौसम में, जब गाँववाले उसके बगीचे में आए, तो उन्होंने देखा कि पेड़ों पर फल बहुत कम थे। मुनीश ने अपनी सारी मेहनत पेड़ों की संख्या और उनकी सुंदरता में लगा दी थी, पर फलों की उपज पर ध्यान नहीं दिया था।

उस समय गाँव के एक बुजुर्ग ने मुनीश से कहा, “बेटा, तुमने तो ‘आम खाने से काम, पेड़ गिनने से क्या काम?’ कहावत को सच कर दिखाया। व्यापार में उत्पादन और गुणवत्ता पर ध्यान दो, न कि केवल संख्या पर।”

मुनीश को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने समझा कि असली सफलता उत्पाद की गुणवत्ता और उसके परिणाम में होती है, न कि केवल बाहरी दिखावे में। उस दिन से मुनीश ने अपने व्यापार में गुणवत्ता पर जोर देना शुरू कर दिया।

निष्कर्ष:

मुनीश की कहानी हमें सिखाती है कि ‘आम खाने से काम, पेड़ गिनने से क्या काम?’ कहावत का सार यह है कि हमें अपने काम के वास्तविक परिणामों पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल संख्या या बाहरी दिखावे पर। इससे हमें व्यावहारिकता और परिणामों पर फोकस करने की सीख मिलती है।

शायरी:

आम खाने से काम है, पेड़ गिनने में क्या राम?

जिंदगी के इस सफर में, परिणाम ही सच्चा इनाम।

बाहरी दिखावे पर न जाओ, सच्चाई को पहचानो,

जो छुपा है अंदर, उसे अपनाने की कोशिश जानो।

क्या हासिल हुआ जीवन में, यही तो मायने रखता है,

बाहरी आडम्बर में उलझने से, क्या फायदा बचता है?

आम की मिठास में है जीवन, गिनती में ना खो जाओ,

सफर की मंजिल को पहचानो, खुद को ना भूल जाओ।

फल की मिठास ही असली, बाकी सब है फसाना,

जिंदगी के इस खेल में, परिणाम ही सच्चा तराना।

 

आम खाने से काम, पेड़ गिनने से क्या काम? शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of आम खाने से काम, पेड़ गिनने से क्या काम? – Aam khane se kaam, Ped ginne se kya kaam? Proverb:

Introduction: “Aam khane se kaam, Ped ginne se kya kaam?” is a famous Hindi proverb, highlighting the importance of focusing on practicality and outcomes.

Meaning: The meaning of this proverb is that the value of any task lies in its outcome, not in the rituals or unnecessary details behind it. This proverb indicates that the final result is what’s important, rather than the process leading to that result.

Usage: This proverb is used when someone needs to understand that the real success of a task lies in its outcome, not in the process.

Examples:

-> Suppose a businessman conducted many advertisements and marketing campaigns, but there was no increase in sales. In such a case, it can be said, “Aam khane se kaam, Ped ginne se kya kaam?”

Conclusion: This proverb teaches us that we should focus on the outcomes of our efforts and not get entangled in unnecessary details. It also tells us that the results ultimately reflect the success of our endeavors.

Story of Aam khane se kaam, Ped ginne se kya kaam? Proverb in English:

In a small village, there lived a businessman named Munish. Munish had recently started a new business and was making every possible effort to succeed.

For his business, he had planted many mango trees. Munish counted the trees every day, watered them, and took care of them. However, he did not pay attention to the fruits of the mango trees. All his time was spent on the number and beauty of the trees.

During the fruit season, when the villagers visited his garden, they noticed that there were very few fruits on the trees. Munish had spent all his effort on the number and beauty of the trees, but he had not focused on the yield of the fruits.

At that time, an elder of the village said to Munish, “Son, you have proven the saying ‘The work lies in eating the mango, what’s the use of counting the trees?’ true. In business, focus on production and quality, not just on the number.”

Munish realized his mistake. He understood that real success lies in the quality and outcome of the product, not just in outward appearance. From that day on, Munish started focusing on quality in his business.

Conclusion:

Munish’s story teaches us that the essence of the proverb ‘The work lies in eating the mango, what’s the use of counting the trees?’ is that we should focus on the actual outcomes of our work, not just on the number or outward appearance. It teaches us the importance of practicality and focusing on results.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

क्या इस कहावत का अर्थ है कि आम खाने से काम नहीं है?

नहीं, इसका अर्थ है कि हमें विचारशीलता और चयन करने की क्षमता होनी चाहिए, और सीधे मामूले चीजों की महत्वपूर्णता को नकारात्मक रूप से न लेना चाहिए।

क्या आम को खाने का उदाहरण एक सामान्य क्रिया है?

हाँ, यहाँ आम को खाना एक सामान्य और साधारित क्रिया का प्रतीक है, जिससे अर्थ निकालते हुए इस कहावत का सार को समझा जा सकता है।

क्या इस कहावत का मतलब है कि पेड़ गिनने से क्या काम?

इसका मतलब है कि व्यक्ति को समय बर्बाद करने वाली चीजों में नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण कार्यों में अपना समय निवेश करना चाहिए।

क्या इस कहावत से जुड़े किसी ऐतिहासिक कथन का सारांश है?

नहीं, इसका कोई ऐतिहासिक कथन नहीं है, यह एक लोकप्रिय हिंदी कहावत है जिसका उपयोग सामाजिक संदेशों को साझा करने के लिए किया जाता है।

क्या इस कहावत में कोई विरोधाभास है?

नहीं, इसमें कोई विरोधाभास नहीं है, बल्कि यह सीधे और सुगम भाषा में स्थिति को बयान करता है।

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