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तिनका न तोड़ना अर्थ, प्रयोग (Tinka na todna)

“तिनका न तोड़ना” एक हिंदी मुहावरा है, जिसका प्रयोग अक्सर विभिन्न संदर्भों में किया जाता है। यह मुहावरा अक्सर एक व्यक्ति के अत्यधिक संयम और अहिंसा की भावना को व्यक्त करता है। हालांकि, कभी-कभी इसका प्रयोग व्यंग्यात्मक रूप से भी किया जाता है, जैसे किसी के आलस्य को दर्शाने के लिए।

परिचय: “तिनका न तोड़ना” मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है ‘एक भी तिनका न तोड़ना’। यह व्यक्ति की संयमित और विचारशील प्रवृत्ति को प्रकट करता है।

अर्थ: जब इस मुहावरे का प्रयोग किसी के आलस्य को दर्शाने के लिए किया जाता है, तो इसका अर्थ होता है कि व्यक्ति इतना आलसी है कि वह बहुत ही मामूली काम भी नहीं करना चाहता, जैसे कि ‘तिनका तोड़ना’।

प्रयोग: आलस्य के संदर्भ में, यह मुहावरा तब प्रयोग में आता है जब किसी को इतना आलसी या निष्क्रिय समझा जाता है कि वह छोटे से छोटे कार्य के लिए भी प्रयास नहीं करता।

उदाहरण:

-> अमन इतना आलसी है कि वह ‘तिनका न तोड़ने’ वाला व्यक्ति है, उसे अपने काम करने में भी आलस आता है।

-> इस कार्यालय में कुछ कर्मचारी ऐसे हैं जो ‘तिनका न तोड़ने’ के सिद्धांत पर चलते हैं, और उनका काम हमेशा बाकी रहता है।

निष्कर्ष: “तिनका न तोड़ना” मुहावरे का उपयोग आलस्य के संदर्भ में करना इस बात का प्रतीक है कि कैसे कुछ लोग अपने काम से इतने कतराते हैं कि उन्हें छोटे से छोटे कार्य करने में भी आलस आता है। यह मुहावरा व्यंग्यात्मक रूप में उन व्यक्तियों के निष्क्रिय और आलसी स्वभाव को उजागर करता है जो अपने दायित्वों से बचने के लिए या तो बहाने बनाते हैं या फिर न्यूनतम प्रयास करते हैं। इस प्रकार, यह मुहावरा न केवल भाषाई अभिव्यक्ति का एक रूप है, बल्कि यह हमें यह भी दर्शाता है कि हमें अपने कार्यों के प्रति कितना सजग और सक्रिय रहना चाहिए।

तिनका न तोड़ना मुहावरा पर कहानी:

एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में नियांत नाम का एक आलसी लड़का रहता था। नियांत को काम करने में इतनी आलस आती थी कि लोग उसे ‘तिनका न तोड़ने वाला’ कहकर चिढ़ाते थे। वह इतना आलसी था कि उसे छोटी सी छोटी चीजें भी करने में आलस आता था।

एक दिन, नियांत को एक सपना आया। सपने में उसने देखा कि वह एक सुनहरे खेत में है, जहाँ फसलें लहलहा रही थीं। वहां एक संत ने उसे कहा, “नियांत, तुम्हारी आलस्य की वजह से तुम्हारा जीवन बंजर हो रहा है। अगर तुम थोड़ा प्रयास करो, तो तुम्हारी ज़िन्दगी में भी यह सुनहरी फसलें उग सकती हैं।”

सुबह उठकर नियांत ने अपने सपने के बारे में सोचा और उसे एहसास हुआ कि उसका आलस उसके जीवन को वास्तव में बंजर बना रहा है। उस दिन से, नियांत ने अपने आलस्य को दूर करने का निश्चय किया। वह रोज़ सुबह जल्दी उठने लगा, खेतों में काम करने लगा, और गाँव के अन्य कामों में भी हाथ बँटाने लगा।

कुछ ही महीनों में, नियांत की मेहनत का फल मिलने लगा। उसके खेत जो कभी सूखे और उजाड़ थे, अब हरे-भरे और फलदार हो गए। गाँव वाले अब उसे आलसी नहीं कहते थे, बल्कि उसकी मेहनत और लगन की प्रशंसा करते थे। नियांत ने महसूस किया कि उसका आलस्य उसे कहीं नहीं ले जा रहा था, लेकिन उसकी मेहनत ने उसके जीवन को नया आकार दिया।

इस कहानी के माध्यम से, हमें यह सिखने को मिलता है कि “तिनका न तोड़ना” मुहावरे का अर्थ केवल अहिंसा और संयम तक सीमित नहीं है। इसका प्रयोग आलस्य को दर्शाने के लिए भी किया जा सकता है। नियांत की कहानी हमें बताती है कि आलस्य से कुछ नहीं मिलता, लेकिन मेहनत और परिश्रम से जीवन में सफलता और समृद्धि आती है। इसलिए, हमें चाहिए कि हम आलस्य को त्यागें और मेहनत की राह पर चलें।

शायरी:

आलस्य की चादर ओढ़े, बैठा जो कभी ना तोड़े तिनका,

वक्त के सफर में उसका, खाली रह गया हर एक कोना।

हर दिन उसका बीता, बिना किसी मेहनत के सपने सजाये,

राहों में पड़े पत्थरों से, ना कभी उसने अपने कदम टकराये।

सोचा था ज़िंदगी में, बिना बूंद पसीने की बहाए,

चल देगा वो मंजिल की ओर, बिना कदमों को आजमाए।

पर वक्त ने उसे सिखाया, आलस का फल है खाली हाथ,

जो तिनका भी ना तोड़े, उसके सपने रह जाते हैं बर्बाद।

मेहनत की चिंगारी से, जलता है जीवन का दीया,

तिनका न तोड़ने वाला, खो देता है अपना हर जिया।

इसलिए उठो और चलो, तोड़ो हर तिनका जो राह में आये,

जीवन की इस दौड़ में, हर मुश्किल को गले लगाये।

 

तिनका न तोड़ना शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of तिनका न तोड़ना – Tinka na todna Idiom:

“तिनका न तोड़ना” is a Hindi idiom used in various contexts. It often expresses a person’s extreme restraint and non-violent attitude. However, sometimes it is used sarcastically, such as to illustrate someone’s laziness.

Introduction: The literal meaning of the idiom “तिनका न तोड़ना” is ‘not even breaking a straw’. It reveals a person’s restrained and thoughtful nature.

Meaning: When the idiom is used to indicate someone’s laziness, it means that the person is so lazy that they do not want to do even the most trivial task, like ‘breaking a straw’.

Usage: In the context of laziness, this idiom is used when someone is perceived to be so lazy or inactive that they do not make an effort even for the smallest tasks.

Example:

-> Aman is so lazy that he is the kind of person who wouldn’t ‘break a straw’, he feels lazy even doing his work.

-> In this office, there are some employees who follow the principle of ‘not breaking a straw’, and their work is always pending.

Conclusion: The use of the idiom “तिनका न तोड़ना” in the context of laziness symbolizes how some people are so reluctant to do their work that they feel lazy even in doing the smallest tasks. This idiom sarcastically exposes the inactive and lazy nature of individuals who either make excuses or put in minimal effort to avoid their responsibilities. Thus, this idiom is not just a linguistic expression but also illustrates that we should be vigilant and active towards our duties.

Story of ‌‌Tinka na todna Idiom in English:

Once upon a time, in a small village, lived a lazy boy named Niyant. Niyant was so lethargic that people teased him as someone who wouldn’t even ‘break a straw’. He was so indolent that he felt too lazy even to do the smallest of tasks.

One day, Niyant had a dream. In the dream, he found himself in a golden field with crops swaying. There, a sage said to him, “Niyant, your laziness is turning your life barren. If you put in a little effort, your life too can flourish with these golden crops.”

Waking up, Niyant pondered over his dream and realized that his laziness was indeed making his life unproductive. From that day, he resolved to overcome his lethargy. He began waking up early, working in the fields, and assisting with other village chores.

In just a few months, Niyant’s hard work started bearing fruit. His fields, once dry and barren, became lush and fertile. The villagers no longer called him lazy but admired his diligence and hard work. Niyant realized that his laziness was leading him nowhere, but his hard work had transformed his life.

Through this story, we learn that the Hindi idiom “तिनका न तोड़ना” (not breaking a straw) isn’t limited to expressing non-violence and restraint. It can also depict laziness. Niyant’s story teaches us that nothing is gained from laziness, but hard work and perseverance bring success and prosperity in life. Therefore, we should forsake laziness and walk the path of diligence.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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