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ठगा बनिया, लुटा राजपूत किसी को नहीं बताते अर्थ, प्रयोग(Thaga baniya, Luta rajpoot kisi ko nahi batate)

“ठगा बनिया, लुटा राजपूत किसी को नहीं बताते ” एक प्रचलित हिंदी मुहावरा है जिसका अर्थ है कि कोई व्यक्ति अपनी हानि या असफलता को दूसरों से नहीं बताता। यह मुहावरा समाज में विभिन्न वर्गों के लोगों के गर्व और आत्म-सम्मान को दर्शाता है।

परिचय: “ठगा बनिया, लुटा राजपूत” शब्दों का शाब्दिक अर्थ है कि एक व्यापारी (बनिया) जिसे ठग लिया गया हो और एक योद्धा (राजपूत) जिसका धन लूट लिया गया हो, वे अपनी इस हानि को लोगों से नहीं कहते। यह भारतीय समाज में गर्व और स्वाभिमान की भावना को प्रतिबिंबित करता है।

अर्थ: इस मुहावरे का उपयोग उन परिस्थितियों में किया जाता है जहां व्यक्ति अपनी असफलता या हानि को छिपाता है ताकि उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर कोई आंच न आए। यह दिखाता है कि कैसे समाज में लोग अपनी कमजोरियों को छुपाकर अपनी इज्जत और सम्मान को बनाए रखने की कोशिश करते हैं।

प्रयोग: इस मुहावरे का उपयोग आमतौर पर उन परिस्थितियों में होता है जहां व्यक्ति अपनी हानि या नुकसान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करना चाहता। इसे अक्सर व्यापार, राजनीति, या सामाजिक जीवन में देखा जा सकता है।

उदाहरण:

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यापारी बड़े नुकसान में चला जाता है, लेकिन वह अपने सामाजिक दायरे में इस बात को स्वीकार नहीं करता, तो कहा जा सकता है कि वह ‘ठगा बनिया’ की तरह व्यवहार कर रहा है। इसी तरह, यदि कोई राजनेता चुनाव में हार जाता है, लेकिन वह अपनी हार को स्वीकार नहीं करता, तो उसे ‘लुटा राजपूत’ कहा जा सकता है।

निष्कर्ष: “ठगा बनिया, लुटा राजपूत” मुहावरा हमारे समाज की उस मानसिकता को दर्शाता है जहां लोग अपनी निजी हानियों या असफलताओं को छिपाने के लिए तैयार रहते हैं। यह मुहावरा यह भी बताता है कि कैसे समाज में व्यक्तिगत सम्मान और प्रतिष्ठा को बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

Hindi Muhavare Quiz

ठगा बनिया, लुटा राजपूत किसी को नहीं बताते मुहावरा पर कहानी:

एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में मुनीश नाम का एक बनिया रहता था। वह बहुत ही चतुर और समझदार व्यापारी था। उसी गाँव में एक राजपूत योद्धा भी रहता था, जिसका नाम सुरेंद्र सिंह था। सुरेंद्र सिंह अपनी सुरेंद्रता और शौर्य के लिए प्रसिद्ध था।

एक दिन, मुनीश के व्यापार में बड़ा नुकसान हुआ। उसके गोदाम में आग लग गई और उसका सारा माल जलकर खाक हो गया। मुनीश को इससे बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन उसने इस बात को किसी से भी नहीं कहा। वह अपने दुख और हानि को छिपाकर सामान्य जीवन जीता रहा।

उसी समय, सुरेंद्र सिंह को भी एक युद्ध में हार का सामना करना पड़ा। उसने अपनी सेना के साथ मिलकर बहादुरी से लड़ाई लड़ी, लेकिन अंत में हार गया। उसकी हार से उसे बहुत शर्मिंदगी हुई, लेकिन उसने भी इस हार को गाँव वालों से छिपाए रखा।

एक दिन, गाँव के लोगों ने मुनीश और सुरेंद्र सिंह की इस स्थिति को देखकर कहा, “देखो, ठगा बनिया, लुटा राजपूत। दोनों ही अपनी हानि और हार को छिपा रहे हैं।”

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि लोग अक्सर अपनी असफलताओं और हानियों को दूसरों से छुपाते हैं, ताकि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान पर कोई आंच न आए। “ठगा बनिया, लुटा राजपूत” मुहावरा इसी समाजिक मानसिकता को दर्शाता है।

शायरी:

दुनिया की नज़रों में हमेशा सर ऊंचा रखा,

ठगा बनिया, लुटा राजपूत, फिर भी मुस्कुराया।

गमों की आंधी में भी दिया जलाए रखा,

हार के आंसू को, आँखों में छुपाए रखा।

जिंदगी की राह में जब भी ठोकर खाई,

हंसकर उठा, गिरकर भी फिर से चलता आया।

हर दर्द को अपने, दिल में ही दबाए रखा,

ठगा बनिया, लुटा राजपूत, फिर भी आगे बढ़ाया।

जीवन की इस यात्रा में, सबकुछ सहा,

लेकिन अपनी लाज को, हमेशा बचाए रखा।

ठगा बनिया, लुटा राजपूत, यही कहानी है जिंदगी की,

हर दर्द को गले लगाया, फिर भी जीने की वजह बनाया।

 

ठगा बनिया, लुटा राजपूत किसी को नहीं बताते शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of ठगा बनिया, लुटा राजपूत किसी को नहीं बताते – Thaga baniya, Luta rajpoot kisi ko nahi batate Idiom:

“ठगा बनिया, लुटा राजपूत किसी को नहीं बताते” is a popular Hindi idiom, meaning that a person does not disclose their loss or failure to others. This idiom reflects the pride and self-respect of people from different sections of society.

Introduction: The literal meaning of “ठगा बनिया, लुटा राजपूत किसी को नहीं बताते” is a merchant (Banias) who has been duped, and a warrior (Rajput) who has been robbed, do not disclose their losses to others. This represents the sense of pride and dignity in Indian society.

Meaning: This idiom is used in situations where a person hides their failure or loss so as not to tarnish their social reputation. It shows how people in society strive to maintain their honor and respect by concealing their weaknesses.

Usage: This idiom is commonly used in situations where a person does not want to publicly acknowledge their loss or damage. It is often observed in business, politics, or social life.

Example:

For instance, if a merchant incurs a significant loss but does not accept this fact in their social circle, it can be said that they are acting like ‘ठगा बनिया’ (duped merchant). Similarly, if a politician loses an election but does not acknowledge their defeat, they could be referred to as ‘लुटा राजपूत’ (robbed warrior).

Conclusion: The idiom “ठगा बनिया, लुटा राजपूत किसी को नहीं बताते” illustrates the mentality in our society where people are prepared to hide their personal losses or failures. This idiom also indicates how maintaining individual honor and prestige is considered important in society.

Story of ‌‌Thaga baniya, Luta rajpoot kisi ko nahi batate Idiom in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a merchant named Munish. He was a very clever and wise businessman. In the same village, there also lived a Rajput warrior named Surendra Singh, who was famous for his bravery and valor.

One day, Munish’s business suffered a huge loss. A fire broke out in his warehouse, and all his goods were reduced to ashes. This resulted in a significant financial loss for Munish, but he did not share this with anyone. He continued to live his life normally, hiding his sorrow and loss.

At the same time, Surendra Singh also faced defeat in a battle. He fought bravely with his army, but ultimately lost. He felt great shame due to his defeat, yet he too kept this loss hidden from the villagers.

One day, the villagers, observing the situation of Munish and Surendra Singh, said, “Look, the duped merchant, the robbed warrior. Both are hiding their losses and defeat.”

This story teaches us that people often hide their failures and losses from others to protect their social reputation and honor. The idiom “ठगा बनिया, लुटा राजपूत किसी को नहीं बताते” (duped merchant, robbed warrior) illustrates this social mentality.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

इस मुहावरे का इतिहास क्या है?

इस मुहावरे का उत्पत्ति भारतीय साहित्य और लोक कथाओं से जुड़ा है, जहां ऐसे कई किस्से हैं जो छल-कपट और धोखाधड़ी के बारे में हैं।

इस मुहावरे का प्रयोग कहाँ होता है?

यह मुहावरा आमतौर पर किसी के चाल-धालों और छल-कपट को व्यक्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

क्या ठगा बनिया, लुटा राजपूत किसी को नहीं बताते इस मुहावरे का अर्थ है?

इस मुहावरे का अर्थ है कि कोई व्यक्ति अपने काम की खबर अपने बाहरी दुनिया के साथी या दोस्तों को नहीं बताता। वह अपने अपराधों को छिपाता है।

इस मुहावरे का वास्तविक उदाहरण क्या हो सकता है?

किसी व्यक्ति ने किसी को धोखा दिया और फिर उसने अपने दोस्तों को इसकी कोई जानकारी नहीं दी, तो यह मुहावरा उसके लिए उपयुक्त हो सकता है।

क्या यह मुहावरा समाज में किसी विशेष वर्ग के लोगों को संदर्भित करता है?

जी हां, यह मुहावरा आमतौर पर उन लोगों को संदर्भित करता है जो अपने छल-कपट या धोखाधड़ी को छिपाते हैं।

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