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तकदीर का लिखा मिटता नहीं अर्थ, प्रयोग(Taqdeer ka likha mitata nahi)

परिचय: “तकदीर का लिखा मिटता नहीं” एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है, जो भाग्य या किस्मत की अटलता पर जोर देता है। इस मुहावरे का प्रयोग तब होता है जब किसी घटना या परिणाम को अटल और अपरिहार्य माना जाता है।

अर्थ: “तकदीर का लिखा मिटता नहीं” का अर्थ है कि जो कुछ भी भाग्य में लिखा है, वह बदला नहीं जा सकता। यह मुहावरा भाग्य की अवश्यम्भाविता और निश्चितता पर बल देता है।

प्रयोग: इस मुहावरे का प्रयोग उन स्थितियों में किया जाता है जहां परिस्थितियां या परिणाम पूर्वनिर्धारित माने जाते हैं और उन्हें बदला नहीं जा सकता। यह अक्सर उन घटनाओं के संदर्भ में इस्तेमाल होता है जिन्हें भाग्य द्वारा नियंत्रित माना जाता है।

उदाहरण:

-> मुनीश ने बहुत प्रयास किया परन्तु अंततः उसे समझ में आया कि ‘तकदीर का लिखा मिटता नहीं।’

-> पारुल की शादी जिससे होनी थी, वही हुई, यही तो कहते हैं कि ‘तकदीर का लिखा मिटता नहीं।’

निष्कर्ष: “तकदीर का लिखा मिटता नहीं” मुहावरा हमें यह सिखाता है कि कुछ चीजें जीवन में अनिवार्य और अपरिवर्तनीय होती हैं। यह हमें यह भी बताता है कि भाग्य के नियमों के आगे हमारे प्रयास कभी-कभी सीमित होते हैं। इसलिए, हमें जीवन की अप्रत्याशितता को स्वीकार करना चाहिए और उसके अनुसार आगे बढ़ना चाहिए।

Hindi Muhavare Quiz

तकदीर का लिखा मिटता नहीं मुहावरा पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में अपर्णा नाम का एक युवक रहता था। अपर्णा ने अपने जीवन में बड़े-बड़े सपने देखे थे और वह उन्हें पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम करता था। उसका सपना था एक बड़ा व्यापारी बनने का, लेकिन किस्मत के आगे उसके हर प्रयास विफल हो जाते थे।

अपर्णा ने कई बार व्यापार में हाथ आजमाया, लेकिन हर बार किसी न किसी कारणवश वह असफल रहा। अपर्णा की मेहनत और लगन देखकर गाँववाले भी हैरान थे। लेकिन अपर्णा की किस्मत में कुछ और ही लिखा था।

एक दिन अपर्णा ने थक हारकर कहा, “शायद मेरी तकदीर में यही लिखा है।” उसी समय गाँव के एक बुजुर्ग ने उसे समझाया, “बेटा, ‘तकदीर का लिखा मिटता नहीं।’ कभी-कभी हमें वही स्वीकार करना पड़ता है जो हमारी किस्मत में लिखा होता है।”

अपर्णा ने बुजुर्ग की बातों को गहराई से समझा और अपनी किस्मत को स्वीकार करने का निर्णय लिया। उसने अपने प्रयासों को एक नए दिशा में मोड़ा और जीवन में नई राह पकड़ी।

निष्कर्ष:

अपर्णा की कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि “तकदीर का लिखा मिटता नहीं”। यह मुहावरा हमें बताता है कि कभी-कभी हमारे जीवन की दिशा और उसके परिणाम हमारे हाथ में नहीं होते। हमें अपनी किस्मत को स्वीकार करते हुए, जीवन में नए अवसरों और संभावनाओं की तलाश करनी चाहिए।

शायरी:

तकदीर का लिखा मिटता नहीं, ये कहानी है पुरानी,

जीवन की इस राह में, हर कदम पे नई कहानी।

जो लिखा है तकदीर में, वही तो होता है यहाँ,

हर खुशी, हर गम में, तकदीर का ही तो नाम है बजाँ।

कभी ख्वाबों के जहाँ में, तकदीर से टकराएं हम,

अपनी किस्मत के आगे, सब ख्वाब अधूरे पाएं हम।

तकदीर के इस खेल में, कभी हार कभी जीत मिली,

जीवन की इस डगर में, हर खुशी और गम की रीत मिली।

तकदीर का लिखा तो, कोई मिटा नहीं पाया,

जीवन के हर मोड़ पे, यही सच्चाई आई सामने आया।

 

तकदीर का लिखा मिटता नहीं शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of तकदीर का लिखा मिटता नहीं – Taqdeer ka likha mitata nahi Idiom:

Introduction: “तकदीर का लिखा मिटता नहीं” (What is written in destiny cannot be erased) is a famous Hindi idiom that emphasizes the inevitability and immutability of fate or destiny. This phrase is used when an event or outcome is considered inevitable and unavoidable.

Meaning: The meaning of “तकदीर का लिखा मिटता नहीं” is that whatever is written in one’s destiny cannot be changed. The idiom emphasizes the inevitability and certainty of fate.

Usage: This idiom is used in situations where circumstances or outcomes are considered predetermined and unchangeable. It is often used in the context of events that are believed to be controlled by fate.

Example:

-> Munish tried a lot but eventually realized that ‘what is written in destiny cannot be erased.’

-> The marriage of Parul happened with the person it was supposed to, as they say, ‘what is written in destiny cannot be erased.’

Conclusion: The idiom “तकदीर का लिखा मिटता नहीं” teaches us that some things in life are inevitable and unchangeable. It also tells us that sometimes our efforts are limited in the face of the laws of fate. Therefore, we should accept life’s unpredictability and move forward accordingly.

Story of ‌‌Taqdeer ka likha mitata nahi Idiom in English:

In a small village, there lived a young man named Aparna. Aparna had big dreams in his life, and he worked hard to fulfill them. His dream was to become a successful businessman, but despite his efforts, fate seemed to thwart him at every turn.

Aparna tried his hand at business several times, but each time, for some reason or another, he ended up unsuccessful. The villagers were amazed by Aparna’s hard work and dedication, but it seemed that destiny had something else in store for him.

One day, exhausted and disheartened, Aparna said, “Perhaps it is written in my destiny.” At that moment, an elderly villager explained to him, “Son, ‘Destiny’s written cannot be erased.’ Sometimes, we have to accept what is written in our fate.”

Aparna pondered the elder’s words deeply and made the decision to accept his destiny. He redirected his efforts in a new direction and sought out new opportunities in life.

Conclusion:

Aparna’s story teaches us that “Destiny’s written cannot be erased.” This proverb reminds us that sometimes, the course of our lives and its outcomes are not entirely in our control. By accepting our fate and seeking out new opportunities, we can navigate through life’s twists and turns.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

क्या इस मुहावरे का अर्थ किस्मत पर पूरी तरह निर्भर करता है?

नहीं, इस मुहावरे का अर्थ यह नहीं है कि किस्मत ही सब कुछ होती है। बल्कि यह दिखाता है कि किस्मत में परिवर्तन संभव है और मनुष्य की कर्मों से भी इसे प्रभावित किया जा सकता है।

इस मुहावरे का उपयोग किस संदर्भ में होता है?

यह मुहावरा आमतौर पर किसी अनिश्चित भविष्य को दर्शाने या किस्मत की अपेक्षित परिवर्तन की संभावना को जताने के लिए प्रयोग किया जाता है।

क्या है “तकदीर का लिखा मिटता” मुहावरा का अर्थ?

“तकदीर का लिखा मिटता” मुहावरा का अर्थ है कि मनुष्य की किस्मत का अद्भुत बदलाव हो सकता है और उसके लिखे हुए किस्मत को भगवान या अदृश्य शक्तियों द्वारा मिटा दिया जा सकता है।

क्या यह मुहावरा केवल धार्मिक रूप में ही प्रयोग किया जाता है?

नहीं, यह मुहावरा सामान्य भाषा में भी प्रयोग किया जाता है, जिसमें किसी के भविष्य की अनिश्चितता या अचानक परिवर्तन की संभावना को दर्शाने का मतलब होता है।

इस मुहावरे का उत्पत्ति क्या है?

इस मुहावरे का उत्पत्ति संस्कृत धार्मिक और आध्यात्मिक धाराओं से जुड़ा है, जहां लोग विश्वास करते हैं कि उनकी किस्मत उन्हें दिए गए लिखे प्रारंभिक भविष्य के अनुसार होती है, जिसे दिव्य शक्तियाँ या भगवान नियंत्रित करते हैं।

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