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टॉँग पसारकर सोना अर्थ, प्रयोग(Tang pasarkar sona)

परिचय: “टाँग पसारकर सोना” एक लोकप्रिय हिंदी मुहावरा है, जो अक्सर आराम और बेफिक्री की स्थिति को दर्शाता है। यह मुहावरा उन परिस्थितियों में इस्तेमाल होता है जब कोई व्यक्ति चिंतामुक्त होकर विश्राम करता है।

अर्थ: “टाँग पसारकर सोना” का शाब्दिक अर्थ है, बिना किसी चिंता या सीमा के पूरी तरह से आराम करना। यह व्यक्ति की उस स्थिति को दर्शाता है जब वह बिना किसी दबाव या तनाव के खुलकर और आराम से जीवन जी रहा हो।

प्रयोग: यह मुहावरा आमतौर पर तब प्रयोग किया जाता है जब कोई व्यक्ति बिना किसी चिंता या जिम्मेदारी की परवाह किए आराम कर रहा हो।

उदाहरण:

-> रिटायरमेंट के बाद शर्मा जी टाँग पसारकर सो रहे हैं, उन्हें किसी काम की चिंता नहीं।

-> छुट्टियों में बच्चे टाँग पसारकर सोते हैं, उन्हें स्कूल की कोई फिक्र नहीं होती।

निष्कर्ष: “टाँग पसारकर सोना” मुहावरा हमें यह बताता है कि जीवन में आराम और चिंतामुक्त रहना कितना आवश्यक है। यह हमें याद दिलाता है कि कभी-कभी तनाव से दूर रहकर खुलकर जीने का महत्व भी होता है। यह मुहावरा जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।

Hindi Muhavare Quiz

टाँग पसारकर सोना मुहावरा पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में सुरेंद्र नाम का एक किसान रहता था। वह बहुत मेहनती और समर्पित था, लेकिन हमेशा अपने काम और जिम्मेदारियों के बीच आराम का समय निकाल लेता था।

सुरेंद्र सुबह जल्दी उठता और अपने खेतों में कठिन परिश्रम करता। लेकिन दोपहर का समय वह सिर्फ अपने लिए रखता। उस समय, वह “टाँग पसारकर सोने” का आनंद लेता।

सुरेंद्र के पड़ोसी अक्सर उसे इस तरह आराम करते देख हैरान होते थे। उन्हें लगता था कि सुरेंद्र को हमेशा काम में व्यस्त रहना चाहिए। लेकिन सुरेंद्र जानता था कि जीवन में संतुलन जरूरी है। वह अपने काम और आराम के बीच सही संतुलन बनाए रखता था।

समय के साथ, पड़ोसी भी सुरेंद्र की जीवनशैली से प्रेरित होने लगे। उन्होंने देखा कि सुरेंद्र का खेती में भी मन लगता है और वह जीवन का आनंद भी उठाता है।

सुरेंद्र की कहानी हमें सिखाती है कि “टाँग पसारकर सोना” यानि आराम करना और चिंतामुक्त रहना भी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमें दिखाता है कि काम और आराम के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, ताकि हम जीवन का पूरा आनंद उठा सकें।

शायरी:

चैन से टाँग पसारकर सोया हूँ मैं, गमों का बोझ भूलकर,
जीवन के सफर में, हर खुशी को गले लगाकर।
थकान के बादलों को दूर कर, आराम की धूप में बैठा हूँ,
जिंदगी की इस राह में, अपनी खुशियों को पहचानता हूँ।

टाँग पसारकर सोने का आलम, ये सुकून की बात है,
जहाँ दुनिया के शोर से दूर, अपने सपनों की बरात है।
चिंता के सागर से निकल, खुद के पल में खो जाता हूँ,
जहाँ खुद के लिए जीना, हर दिन को खास बनाता हूँ।

टाँग पसारे सोने का मजा, जब जीवन में सुकून मिले,
दुनिया की दौड़ से अलग, खुद के साथ वक्त बिताने का सिलसिले।
इस आराम के पल में, हर खुशी से मुलाकात होती है,
जब जीवन की थकान मिटे, तब हर लम्हा खास होती है।

 

टाँग पसारकर सोना शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of टॉँग पसारकर सोना – Tang pasarkar sona Idiom:

Introduction: “टाँग पसारकर सोना” (Tang pasarkar sona) is a popular Hindi idiom, often used to describe a state of relaxation and carefreeness. This idiom is utilized in situations where a person rests without any worries.

Meaning: The literal meaning of “टाँग पसारकर सोना” is to rest completely without any worries or limitations. It reflects a person’s state of being where they live life openly and comfortably without any pressure or stress.

Usage: This idiom is typically used when a person is relaxing without any concern for worries or responsibilities.

Example:

-> After retirement, Mr. Sharma is sleeping with his legs stretched out, without any worries about work.

-> During the holidays, children sleep with their legs stretched out, without any concern for school.

Conclusion: The idiom “टाँग पसारकर सोना” tells us how essential it is to relax and stay worry-free in life. It reminds us of the importance of living openly and away from stress at times. This idiom promotes a balanced approach to life.

Story of ‌‌Tang pasarkar sona Idiom in English:

In a small village, there lived a farmer named Surendra. He was hardworking and dedicated, yet always managed to find time to relax amidst his work and responsibilities.

Surendra would wake up early in the morning and work hard in his fields. However, he reserved the afternoon exclusively for himself. During this time, he enjoyed the pleasure of “stretching his legs and sleeping.”

Surendra’s neighbors were often surprised to see him resting in such a manner. They thought that Surendra should always be busy with work. But Surendra knew the importance of balance in life. He maintained a proper balance between his work and rest.

Over time, the neighbors began to be inspired by Surendra’s lifestyle. They noticed that Surendra was not only dedicated to his farming but also enjoyed his life.

Surendra’s story teaches us that “stretching legs and sleeping,” which means relaxing and being worry-free, is also an essential part of life. It shows us the importance of balancing work and relaxation to fully enjoy life.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

“टाँग पसारकर सोना” मुहावरे का प्रयोग किस संदर्भ में होता है?

यह मुहावरा विभिन्न स्थितियों में उपयोगी सहायता प्रदान करने के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे कि दोस्तों की सहायता के लिए, समस्याओं का समाधान के लिए, आदि।

इस मुहावरे का मतलब क्या है?

इस मुहावरे का मतलब है किसी की मदद करना या किसी के समर्थन में होना।

क्या है “टाँग पसारकर सोना” मुहावरा?

“टाँग पसारकर सोना” मुहावरा एक उपयोगी समर्थन या मदद को व्यक्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

इस मुहावरे का इतिहास क्या है?

इस मुहावरे का निर्माण समय के साथ हुआ है और यह हिंदी भाषा में लोकप्रिय हो गया है।

क्या “टाँग पसारकर सोना” मुहावरा वास्तव में पसारा जाता है?

नहीं, यह मुहावरा एक व्यक्तिगत अभिव्यक्ति है और वास्तविक रूप से टाँग को पसारने या सोने की बात नहीं करता।

हिंदी मुहावरों की पूरी लिस्ट एक साथ देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

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