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साँप छछूंदर की-सी गति अर्थ, प्रयोग (Saanp Chachundar ki-si gati)

परिचय: “साँप छछूंदर की-सी गति” एक प्रचलित हिंदी मुहावरा है जिसका प्रयोग अक्सर उस स्थिति को व्यक्त करने के लिए किया जाता है जहाँ व्यक्ति या वस्तु द्वंद्व में फंस जाती है और उसे समझ नहीं आता कि क्या किया जाए। इसका अर्थ है एक ऐसी स्थिति जहाँ दोनों विकल्पों में से कोई भी चुनना नुकसानदेह हो।

अर्थ: इस मुहावरे का अर्थ है एक ऐसी परिस्थिति जहाँ व्यक्ति कोई भी निर्णय लेने में असमर्थ होता है क्योंकि उसके सामने मौजूद विकल्प दोनों ही अनुकूल नहीं होते। साँप और छछूंदर की कहावत इस बात को दर्शाती है कि जैसे साँप यदि छछूंदर को निगल ले, तो उसे अंधता का सामना करना पड़ता है और यदि नहीं निगलता, तो उसे भूखा रहना पड़ता है।

प्रयोग: यह मुहावरा जीवन की उन परिस्थितियों में उपयोगी होता है जहाँ निर्णय लेना कठिन होता है और उपलब्ध विकल्पों में से कोई भी संतोषजनक नहीं होता।

उदाहरण:

मान लीजिए, एक व्यापारी को दो ऐसे व्यापारिक सौदों में से चुनना हो जहाँ एक सौदा उसे बड़ा मुनाफा देने की संभावना रखता है लेकिन उच्च जोखिम से भरा है, और दूसरा सौदा कम जोखिम वाला है लेकिन मुनाफा भी कम है। इस स्थिति में व्यापारी “साँप छछूंदर की-सी गति” में फंस जाता है।

निष्कर्ष: “साँप छछूंदर की-सी गति” मुहावरा हमें यह सिखाता है कि जीवन में कई बार हमें ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जहाँ निर्णय लेना बेहद कठिन होता है। ऐसे में धैर्य और सूझबूझ से काम लेना और सही समय का इंतजार करना ही सबसे उचित रास्ता होता है।

साँप छछूंदर की-सी गति मुहावरा पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में सुधीर नाम का एक किसान रहता था। सुधीर को अपने खेत में नई फसल लगाने का फैसला करना था। उसके पास दो विकल्प थे: एक तरफ था धान की खेती और दूसरी तरफ थी गेहूँ की खेती। धान की खेती से अच्छा मुनाफा हो सकता था, लेकिन उसमें पानी की अधिक आवश्यकता होती, जो कि उस साल सूखे के कारण मुश्किल था। दूसरी ओर, गेहूँ की खेती में जोखिम कम था, लेकिन मुनाफा भी कम था।

सुधीर इस दुविधा में था कि कौन सा विकल्प चुने। यदि वह धान की खेती चुनता, तो वर्षा न होने पर उसे भारी नुकसान हो सकता था। और यदि वह गेहूँ की खेती चुनता, तो उसे अधिकतम मुनाफा नहीं होता। इस तरह वह “साँप छछूंदर की-सी गति” में फंस गया।

एक दिन उसने अपनी समस्या अपने एक बुजुर्ग मित्र से साझा की। उन्होंने उसे सलाह दी कि वह दोनों फसलों की मिश्रित खेती करे। इस तरह वह सूखे के प्रभाव को कम कर सकता था और साथ ही साथ मुनाफे की संभावना भी बनाए रख सकता था।

सुधीर ने अपने मित्र की सलाह मानी और दोनों फसलों की मिश्रित खेती की। वर्षा कम होने के बावजूद, मिश्रित खेती के कारण उसे अच्छा मुनाफा हुआ और वह अपने निर्णय से खुश था।

इस कहानी के माध्यम से “साँप छछूंदर की-सी गति” मुहावरे का अर्थ समझ में आता है। यह बताता है कि कभी-कभी जीवन में हमें ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जहाँ सीधा निर्णय लेना मुश्किल होता है। ऐसे में सूझबूझ और समझदारी से काम लेना ही सबसे बेहतर होता है।

शायरी:

दिल में उलझन, मन में सवाल बहुत हैं,
“साँप छछूंदर की-सी गति” के जाल बहुत हैं।

जीवन की इस दौड़ में, फैसले कड़वे होते हैं,
कभी-कभी तो लगता है, सपने सड़वे होते हैं।

निगलूं तो अंधेरा, छोड़ूं तो भूख,
ये दुविधा की घड़ी, ना कम है ना दूर।

वक़्त की रेत पर, खड़े होकर सोचता हूँ,
कभी लगता है जैसे, हर मोड़ पर रोकता हूँ।

लेकिन जीवन तो बस, चलते जाने का नाम है,
“साँप छछूंदर” की इस गति से, आगे बढ़ जाने का काम है।

समझदारी से कदम रख, इस दुविधा से पार जाऊंगा,
जीवन के हर सवाल का, मैं जवाब बन जाऊंगा।

 

साँप छछूंदर की-सी गति शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of साँप छछूंदर की-सी गति – Saanp Chachundar ki-si gati Idiom:

Introduction: “साँप छछूंदर की-सी गति” (Like the predicament of a snake and a mole) is a prevalent Hindi idiom used often to describe a situation where a person or object is caught in a dilemma and cannot decide what to do. It signifies a situation where choosing any of the available options leads to a disadvantage.

Meaning: The idiom means a situation where a person is unable to make a decision because both available options are not favorable. The proverb of the snake and mole illustrates that if the snake swallows the mole, it risks blindness, and if it doesn’t, it remains hungry.

Usage: This idiom is useful in life situations where making a decision is difficult, and none of the available options is satisfactory.

Example:

Suppose a merchant has to choose between two business deals, where one deal offers the potential for high profit but is fraught with high risk, and the other deal is low risk but also offers less profit. In this situation, the merchant finds himself “in the predicament of a snake and a mole.”

Conclusion: The idiom “साँप छछूंदर की-सी गति” teaches us that many times in life, we face situations where making a decision is extremely difficult. In such cases, it is best to act with patience and prudence and wait for the right time.

Story of ‌‌Saanp Chachundar ki-si gati Idiom in English:

Once upon a time, in a small village, there was a farmer named Sudhir. Sudhir had to decide on planting a new crop in his field. He had two options: on one side was paddy cultivation, and on the other was wheat cultivation. Paddy could yield good profit but required a lot of water, which was difficult that year due to drought. On the other hand, wheat cultivation carried less risk but also less profit.

Sudhir was in a dilemma about which option to choose. If he chose paddy and there was no rain, he could face significant loss. And if he chose wheat, he would not make the maximum profit. Thus, he found himself “in the predicament of a snake and a mole.”

One day, he shared his problem with an elderly friend. His friend advised him to practice mixed farming of both crops. This way, he could reduce the impact of the drought and also maintain the potential for profit.

Sudhir heeded his friend’s advice and did mixed farming of both crops. Despite the low rainfall, mixed farming led to good profits, and he was happy with his decision.

This story illustrates the meaning of the idiom “साँप छछूंदर की-सी गति” (like the predicament of a snake and a mole). It tells us that sometimes in life, we face situations where making a straightforward decision is difficult. In such cases, it is best to act with wisdom and prudence.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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