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नया नौ दिन, पुराना सौ दिन अर्थ, प्रयोग (Naya nau din , purana sau din)

परिचय: “नया नौ दिन, पुराना सौ दिन” एक प्रचलित हिंदी मुहावरा है, जो भारतीय समाज में अक्सर प्रयोग किया जाता है। यह कहावत मनुष्य के नवीनता के प्रति आकर्षण और उसकी अस्थायी प्रकृति को दर्शाती है।

अर्थ: इस कहावत का अर्थ है कि कोई भी नई वस्तु या परिस्थिति शुरुआत में तो बहुत आकर्षक और महत्वपूर्ण लगती है, लेकिन वह अपनी चमक धीरे-धीरे खो देती है। यह कहावत मनुष्य की उस प्रवृत्ति को इंगित करती है जहां वह नई चीजों के प्रति उत्साहित होता है, लेकिन समय के साथ उसकी रुचि कम हो जाती है।

प्रयोग: इस मुहावरे का प्रयोग अक्सर तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति को नई चीजों की ओर आकर्षित होते देखा जाता है, परंतु यह भी समझा जाता है कि यह आकर्षण अस्थायी होगा। यह व्यक्तिगत रिश्तों, नई तकनीकी, फैशन ट्रेंड्स, नए काम, या यहाँ तक कि नए विचारों पर भी लागू होता है।

उदाहरण:

-> जब विकास ने नया स्मार्टफोन खरीदा, तो वह उसके साथ बहुत खुश था, लेकिन कुछ ही हफ्तों में उसकी दिलचस्पी कम हो गई, जैसा कि ‘नया नौ दिन, पुराना सौ दिन’ में कहा गया है।

-> नई नौकरी का उत्साह शुरुआती दिनों में बहुत होता है, पर धीरे-धीरे वही नौकरी रूटीन बन जाती है, यह भी ‘नया नौ दिन, पुराना सौ दिन’ कहावत का एक उदाहरण है।

निष्कर्ष: इस प्रकार, ‘नया नौ दिन, पुराना सौ दिन’ कहावत हमें यह सिखाती है कि नवीनता का आकर्षण स्थायी नहीं होता और अंततः हर चीज अपनी सामान्य स्थिति में आ जाती है। यह हमें यह भी याद दिलाती है कि स्थायी संतुष्टि और खुशी के लिए, हमें चीजों के मूल्य को समझना चाहिए, चाहे वह नई हो या पुरानी।

नया नौ दिन, पुराना सौ दिन मुहावरा पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में विशाल नाम का एक युवक रहता था। विशाल को हमेशा नई-नई चीजों का शौक था। एक दिन, वह अपने पुराने मोबाइल फोन से ऊब चुका था और उसने एक नया और महंगा स्मार्टफोन खरीदने का फैसला किया।

नया फोन आते ही विशाल बहुत खुश हुआ। वह दिन-रात उस फोन के साथ खेलता, नई-नई एप्स डाउनलोड करता और अपने दोस्तों को उसके फीचर्स दिखाता। लेकिन यह खुशी कुछ ही दिनों की थी। धीरे-धीरे, नए फोन का आकर्षण कम होने लगा और वह उसमें रुचि खोने लगा।

इस बीच, गाँव में एक पुराना पुस्तकालय था जिसमें विशाल कभी-कभार जाया करता था। पुस्तकालय के प्रबंधक ने विशाल को एक पुरानी किताब दी, जिसे पढ़कर विशाल को बहुत आनंद आया। उस किताब में जीवन की गहराइयों और ज्ञान की बातें थीं। विशाल ने उस किताब को कई बार पढ़ा और हर बार उसे कुछ नया सीखने को मिला।

विशाल को तब समझ में आया कि नई चीजें जितनी आकर्षक होती हैं, उनका आकर्षण उतनी ही जल्दी खत्म हो जाता है, जैसा कि कहावत है “नया नौ दिन, पुराना सौ दिन”। वहीं, पुरानी चीजें जैसे कि उस पुस्तक में छुपा ज्ञान, वक्त के साथ और भी मूल्यवान होती जाती हैं।

इस अनुभव से विशाल ने सीखा कि जीवन में स्थायी खुशी और संतोष उन चीजों में छिपा होता है जो समय के साथ अपनी महत्ता और मूल्य बढ़ाती हैं, न कि उन चमकदार नई चीजों में जो कुछ ही समय में अपना आकर्षण खो देती हैं।

शायरी:

चमक नई चीजों की, यूँ ही नज़र में भाती है,

पर वक्त के साथ सब, कुछ फीकी पड़ जाती है।

जो नया आज है, उसका शोर चार दिन,

फिर वही धूल में मिल, जैसे नया नौ दिन।

पुरानी यादों में, कुछ बात ऐसी होती है,

हर लम्हा उनका, सदियों तक रोशन होती है।

जिंदगी के सफर में, यही सिखाया है वक्त ने,

नया नौ दिन, पुराना सौ दिन, ये राज़ खोला है दिल ने।

हर नई चीज़ में, एक चमक तो होती है,

पर सच्चाई तो यह, पुरानी ही सोना होती है।

नया क्या है, पुराना क्या, बस एक फेर है,

जिंदगी का मजा, तो इसी कशमकश में सवेर है।

 

नया नौ दिन, पुराना सौ दिन शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of नया नौ दिन, पुराना सौ दिन – Naya nau din, purana sau din Idiom:

Introduction: “नया नौ दिन, पुराना सौ दिन” (New for nine days, old for a hundred days) is a popular Hindi idiom, often used in Indian society. This proverb illustrates the attraction of humans towards novelty and its transient nature.

Meaning: The meaning of this proverb is that any new object or situation initially seems very attractive and important, but it gradually loses its charm. This proverb points to the tendency of humans to get excited about new things, but over time, their interest fades.

Usage: This idiom is often used when a person is seen being attracted to new things, but it is understood that this attraction will be temporary. It applies to personal relationships, new technology, fashion trends, new jobs, and even new ideas.

Example:

-> When Vikas bought a new smartphone, he was very happy with it, but within a few weeks, his interest diminished, as said in “New for nine days, old for a hundred days.”

-> The excitement for a new job is high in the initial days, but gradually the same job becomes routine, which is also an example of the proverb “New for nine days, old for a hundred days.”

Conclusion: Thus, the proverb “New for nine days, old for a hundred days” teaches us that the attraction of novelty is not permanent and eventually everything returns to its normal state. It also reminds us that for lasting satisfaction and happiness.

Story of ‌‌Naya nau din, purana sau din Idiom in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a young man named Vishal. Vishal always had a fondness for new things. One day, he grew tired of his old mobile phone and decided to buy a new and expensive smartphone.

As soon as the new phone arrived, Vishal was overjoyed. He spent day and night playing with the phone, downloading new apps, and showing off its features to his friends. But this happiness was short-lived. Gradually, the allure of the new phone began to fade, and he started losing interest in it.

Meanwhile, there was an old library in the village that Vishal occasionally visited. The librarian gave Vishal an old book, which he found greatly enjoyable. The book contained profound insights and knowledge about life. Vishal read the book several times, and each time he learned something new.

Vishal then realized that as attractive as new things are, their charm fades just as quickly, as the saying goes, “New for nine days, old for a hundred days.” On the other hand, old things, like the wisdom hidden in that book, become more valuable over time.

From this experience, Vishal learned that lasting happiness and contentment in life are found in things that increase in significance and value over time, not in those shiny new things that lose their attraction so quickly.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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