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नानी याद आना, अर्थ, प्रयोग(Nani yaad aana)

अंश_अध्ययन_में_डूबा, अनन्य_और_अंश_बातचीत, पुरानी_यादों_में_अंश, परीक्षा_की_तैयारी

परिचय: “नानी याद आना” एक लोकप्रिय हिंदी मुहावरा है, जिसे किसी के अत्यधिक चिंतित, परेशान या घबराया हुआ होने की स्थिति को दर्शाने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

अर्थ: जब कोई व्यक्ति बहुत अधिक चिंता, तनाव या डर महसूस करता है, तो उसे कहा जाता है कि उसकी “नानी याद आ गई”।

प्रयोग:

-> परीक्षा के दिन अमन को इतनी चिंता हो गई कि उसे नानी याद आ गई।

-> जब सुधीर को पता चला कि उसकी फ्लाइट मिस हो गई है, तो उसे नानी याद आ गई।

विशेष टिप्पणी: इस मुहावरे का उपयोग व्यक्ति की चिंताभरी स्थिति को जानकारी देने के लिए किया जाता है। “नानी याद आना” मुहावरा उस समय का संकेत करता है जब कोई व्यक्ति अपनी समस्याओं से इतना घबराया हुआ होता है कि उसे अपनी बचपन की मासी या नानी की याद आ जाती है, जो आमतौर पर सुरक्षा और संजीवनी की प्रतीक होती है।

निष्कर्ष: “नानी याद आना” मुहावरा वह समय दर्शाता है जब किसी व्यक्ति को बहुत अधिक चिंता होती है और वह अपनी सुरक्षा और सांत्वना की तलाश में होता है। इसे समझना और सही संदर्भ में प्रयोग करना महत्वपूर्ण है।

नानी याद आना मुहावरा पर कहानी:

अंश एक समझदार और मेहनती विद्यार्थी था। लेकिन जब भी परीक्षा का समय नजदीक आता, वह बहुत चिंतित हो जाता। उसे यह सोच कर डर लगता कि कहीं उसने कोई अध्याय तो छूट नहीं गया। जब उसे ज्यादा चिंता होती, तो वह अकेले में बैठकर अपनी नानी की याद में खो जाता।

एक दिन, जब परीक्षा के तीन दिन बाकी थे, अंश के मित्र अनन्य ने उसे ऐसे घबराया हुआ देखा। अंश की आंखों में वही चिंता और डर का संकेत था।

अनन्य ने मुस्कराते हुए कहा, “क्या हुआ अंश? तुम्हें तो जैसे नानी याद आ गई हो।”

अंश ने शिरम हिलाते हुए कहा, “अरे यार! जब भी परीक्षा आती है, मुझे लगता है कि मैं तैयारी में पूरी तरह सफल नहीं हुआ हूँ। इस डर से मुझे अपनी नानी याद आ जाती है, जिनके पास जा कर मैं बचपन में अपनी सारी चिंताओं से मुक्त हो जाता था।”

अनन्य ने अंश की बाहों में बहुत जोर से मारी और कहा, “तू बहुत मेहनती है और मैं जानता हूँ कि तू अच्छा करेगा। चिंता करने से और नानी की याद में खो जाने से बेहतर है कि तू अभी के अभी अध्ययन कर और अगले दिन परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर।”

अंश को समझ में आ गया कि उसे अपनी चिंताओं से मुक्त होकर परीक्षा की तैयारी में मन लगाना चाहिए। और वही हुआ, अंश ने परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया और सभी को प्रूव किया कि जब आप सही दिशा में मेहनत करते हैं, तो आपकी नानी याद आने की जरूरत नहीं पड़ती।

इस किस्से से हमें यह सिखने को मिलता है कि अध्ययन और मेहनत की जरूरत होती है, और चिंता करने से बेहतर है कि हम अपनी समस्याओं का समाधान पाएं।

शायरी:

नानी की याद में खो जाऊँ मैं क्यों बार-बार,

दिल में है तूफ़ान, जिसकी नहीं कोई किनारा।

आंखों में उम्मीदें भरी हैं, जज्बातों का संग्रह,

जीवन की राहों में, ख़ुदा से ढूंढता हूँ आसरा।

ज़िंदगी की किताब में, पन्ना पलटता जा रहा हूँ,

नानी की याद में, खुद से ही बातें करता जा रहा हूँ।

जिस जिस चिराग से रोशनी की उम्मीद थी,

हर एक में अब, सिर्फ़ अंधेरा दिखाई दे रहा है।

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of नानी याद आना – Nani yaad aana Idiom:

Introduction: “Nani Yaad Aana” is a popular Hindi idiom used to depict a state where someone is extremely worried, distressed, or anxious.

Meaning: When a person feels an overwhelming sense of worry, stress, or fear, it is said that their “Nani yaad aa gayi” (Nani has come to mind).

Usage:

-> On the day of the exam, Aman was so worried that he felt like “Nani yaad aa gayi” (his Nani came to his mind). 

-> When Sudhir found out he missed his flight, he felt like “Nani yaad aa gayi” (his Nani came to his mind).

Special Note: This idiom is used to convey the anxiety-ridden state of a person. “Nani Yaad Aana” (Nani coming to mind) signifies those moments when someone is so overwhelmed by their problems that they are reminded of their childhood caregiver like an aunt or grandmother, typically symbolizing comfort and rejuvenation.

Conclusion: The idiom “Nani Yaad Aana” (Nani coming to mind) captures those moments when an individual is deeply troubled and seeks comfort and solace. Understanding and using it in the right context is crucial.

Story of Nani yaad aana Idiom in English:

Ansh was a prudent and hardworking student. However, whenever the time for exams drew near, he would become extremely anxious. He would fear missing out on any chapter during his preparations. When he became overly stressed, he would sit alone and get lost in memories of his grandmother.

One day, with just three days left for the exams, Ansh’s friend Ananya noticed his distressed state. Ansh’s eyes clearly showed signs of worry and fear.

With a smile, Ananya said, “What’s the matter, Ansh? It seems like you’re missing your grandma.”

Shaking his head, Ansh replied, “Oh buddy! Whenever exams approach, I feel I haven’t prepared adequately. This fear reminds me of my grandma. Going to her in my childhood would rid me of all my worries.”

Ananya hugged Ansh tightly and said, “You work very hard, and I know you will do well. Instead of worrying and getting lost in memories, it’s better you study now and perform well in the exam tomorrow.”

Ansh realized he should focus on his exam preparations rather than drowning in his concerns. And so he did; Ansh performed excellently in the exams, proving that when you work hard in the right direction, there’s no need to reminisce about comforting memories.

From this tale, we learn the importance of diligence and effort, and that it’s better to find solutions to our problems than to worry about them.

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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