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नाली की ईंट कोठे चढ़ी अर्थ, प्रयोग (Nali ki eent kothe chadhi)

परिचय: “नाली की ईंट कोठे चढ़ी” एक प्रचलित हिंदी मुहावरा है जो किसी अयोग्य या अनुपयुक्त व्यक्ति के उच्च पद या स्थान पर पहुंचने की स्थिति को दर्शाता है। यह मुहावरा सामाजिक और व्यावसायिक संदर्भों में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है।

अर्थ: “नाली की ईंट कोठे चढ़ी” का अर्थ है कि जब कोई अयोग्य व्यक्ति उच्च पद या सम्मानजनक स्थिति में पहुंच जाता है, जिसके लिए वह उपयुक्त नहीं होता। यह अनुचित योग्यता और स्थान के बीच की विडंबना को दर्शाता है।

प्रयोग: यह मुहावरा अक्सर तब प्रयोग किया जाता है जब किसी व्यक्ति को उसकी योग्यता से अधिक अवसर या स्थिति प्राप्त होती है, खासकर जब यह प्रोन्नति अनुचित लगती है।

उदाहरण:

किसी कंपनी में यदि एक अनुभवहीन व्यक्ति को बड़े पद पर नियुक्त किया जाता है, और वह अपने कार्यों में असफल रहता है, तो कहा जा सकता है कि “वह तो नाली की ईंट कोठे चढ़ गई।”

निष्कर्ष: “नाली की ईंट कोठे चढ़ी” मुहावरा हमें यह सिखाता है कि केवल उच्च पद या स्थिति प्राप्त कर लेना ही काफी नहीं है, बल्कि उस पद या स्थान के लिए उपयुक्त योग्यता और क्षमता होना भी आवश्यक है। यह हमें योग्यता और स्थान के बीच के महत्वपूर्ण संबंध को समझने का संदेश देता है।

नाली की ईंट कोठे चढ़ी मुहावरा पर कहानी:

एक बार के बात है, एक छोटे शहर की एक बड़ी कंपनी में अभय नाम का एक युवक काम करता था। अभय अपने काम में नया था और उसे अभी बहुत कुछ सीखना था। वह अपनी मेहनत और लगन से काम कर रहा था, पर उसमें वह अनुभव और विशेषज्ञता नहीं थी जो एक वरिष्ठ पद के लिए आवश्यक होती है।

कंपनी के एक वरिष्ठ पद के लिए आवश्यकता थी, और अचानक अभय को उस पद के लिए चुन लिया गया। यह चयन कंपनी के कुछ उच्चाधिकारियों की सिफारिश पर हुआ था। अभय के सहकर्मी और अन्य विभागों के लोग हैरान थे क्योंकि वे जानते थे कि अभय के पास इस पद के लिए आवश्यक अनुभव और ज्ञान नहीं है।

जैसा कि उम्मीद थी, अभय को उस पद की जिम्मेदारियों का संभालने में कठिनाई हो रही थी। उसने अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन उसकी कमी उसके काम में दिखाई देने लगी। परियोजनाएं विफल होने लगीं और कंपनी को नुकसान होने लगा।

कंपनी के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने टिप्पणी की, “यह तो नाली की ईंट कोठे चढ़ गई। अनुभवहीन व्यक्ति को ऐसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त करना कंपनी के लिए हानिकारक है।”

इस कहानी से हमें सिखने को मिलता है कि योग्यता और अनुभव ही किसी भी पद के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। अयोग्य व्यक्ति को उच्च पद पर बिठाने से केवल समस्याएं ही पैदा होती हैं, और यह ना केवल व्यक्ति के लिए बल्कि संस्था के लिए भी हानिकारक होता है।

शायरी:

किस्मत की बातें हैं, सब फैसले ऊपरवाले के,

नाली की ईंट भी कभी-कभी, कोठे पर चढ़ जाए।

सोचा न था कभी, इस दुनिया का ऐसा रंग होगा,

जिसकी न हो योग्यता, वो भी किसी दिन राज कर जाए।

महलों की शान में, गर नाली की ईंट चढ़ जाए,

तो उसका वजूद, खुद ब खुद बयान हो जाए।

योग्यता की बातें यहाँ, कितनी अजीब हैं,

नाली की ईंट सिंहासन पर, जब चढ़ जाए।

जिंदगी के इस खेल में, अजीब उलझनें हैं,

नाली की ईंट कोठे पर, जब सिर उठाए।

 

नाली की ईंट कोठे चढ़ी शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of नाली की ईंट कोठे चढ़ी – Nali ki eent kothe chadhi Idiom:

Introduction: “नाली की ईंट कोठे चढ़ी” is a popular Hindi idiom that describes a situation where an incompetent or unsuitable person reaches a high position or status. This idiom is widely used in social and professional contexts.

Meaning: The meaning of “नाली की ईंट कोठे चढ़ी” is when an incompetent person attains a high position or respectable status for which they are not fit. It highlights the irony between inappropriate qualification and position.

Usage: This idiom is often used when a person receives opportunities or positions beyond their qualifications, especially when such a promotion seems unfair.

Example:

In a company, if an inexperienced person is appointed to a high position and fails in their duties, it can be said, “It’s like a brick from the gutter has been placed on the rooftop.”

Conclusion: The idiom “नाली की ईंट कोठे चढ़ी” teaches us that merely attaining a high position or status is not sufficient; appropriate qualifications and capabilities for that position or status are also essential. It conveys the important message of understanding the relationship between qualification and position.

Story of ‌‌Nali ki eent kothe chadhi Idiom in English:

Once upon a time, in a big company in a small city, there was a young man named Abhay. Abhay was new to his job and had much to learn. He was working hard with dedication, but he lacked the experience and expertise necessary for a senior position.

There was a need for someone to fill a senior position in the company, and suddenly Abhay was chosen for it. This selection was made based on the recommendation of some high-ranking officials in the company. Abhay’s colleagues and people from other departments were surprised because they knew that Abhay did not have the necessary experience and knowledge for the position.

As expected, Abhay found it difficult to handle the responsibilities of the position. He tried his best, but his lack of experience started to show in his work. Projects began to fail, and the company started incurring losses.

A senior employee of the company commented, “This is like a brick from the gutter reaching the rooftop. Appointing an inexperienced person to such an important position is harmful to the company.”

This story teaches us that qualifications and experience are the most important for any position. Appointing an incompetent person to a high position only creates problems, and it is harmful not only for the individual but also for the organization.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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