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न सुनोगे सीख तो मांगोगे भीख अर्थ, प्रयोग (Na sunoge seekh to mangoge bheekh)

परिचय: हिंदी भाषा अपने आप में अनेक कहावतों और मुहावरों का खजाना है। इनमें से एक लोकप्रिय कहावत है – “न सुनोगे सीख तो मांगोगे भीख”। यह कहावत जीवन के उस सत्य को दर्शाती है जिसमें सीख और अनुशासन का महत्व बताया गया है।

अर्थ: इस कहावत का अर्थ है कि यदि व्यक्ति समय पर दूसरों से सीखने की बात नहीं सुनता है या अनुशासन का पालन नहीं करता है, तो भविष्य में उसे आर्थिक या सामाजिक रूप से संघर्ष करना पड़ सकता है। यह कहावत व्यक्ति को जीवन में सही मार्गदर्शन और ज्ञान को अपनाने के महत्व को समझाती है।

प्रयोग: यह कहावत आमतौर पर शिक्षा, नैतिकता, और अनुशासन से संबंधित संदर्भों में उपयोग की जाती है। यह बच्चों, युवाओं और उन सभी लोगों के लिए एक सीख है जो जीवन के महत्वपूर्ण पाठों को नजरअंदाज करते हैं।

उदाहरण:

मान लीजिए, एक छात्र पढ़ाई में ध्यान नहीं देता और शिक्षकों की सलाह को अनदेखा करता है। भविष्य में, उसे अच्छी नौकरी पाने में कठिनाई हो सकती है, जिससे वह आर्थिक और सामाजिक रूप से संघर्ष कर सकता है। ऐसे में, यह कहावत उस स्थिति पर सटीक बैठती है।

निष्कर्ष: “न सुनोगे सीख तो मांगोगे भीख” कहावत हमें यह सिखाती है कि ज्ञान और शिक्षा का मूल्य कितना महत्वपूर्ण है। यह एक प्रेरणादायक संदेश है जो युवाओं को जीवन में सही दिशा और अनुशासन की महत्वता को समझने के लिए प्रोत्साहित करता है। अतः, हमें इस कहावत का महत्व समझना चाहिए और जीवन में इसे अपनाना चाहिए।

न सुनोगे सीख तो मांगोगे भीख मुहावरा पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में नियांत नाम का एक लड़का रहता था। नियांत बहुत ही चंचल और नटखट था। उसे पढ़ाई में कोई रुचि नहीं थी और वह अक्सर स्कूल से भागकर नदी किनारे खेलने चला जाता था। उसके माता-पिता और शिक्षक उसे बार-बार समझाते कि पढ़ाई कितनी महत्वपूर्ण है, पर नियांत कभी नहीं सुनता।

धीरे-धीरे समय बीतता गया और नियांत बड़ा हो गया। जब उसने नौकरी की तलाश शुरू की, तब उसे एहसास हुआ कि उसके पास न तो अच्छी शिक्षा है और न ही कोई कौशल। वह हर जगह असफल हो गया और उसे कोई काम नहीं मिला। अब वह आर्थिक रूप से कमजोर हो गया और उसे अपने जीवनयापन के लिए दूसरों से मदद मांगनी पड़ी।

एक दिन, उसके पुराने शिक्षक ने उसे देखा और पूछा, “नियांत, तुम इस हालत में कैसे पहुंच गए?” नियांत ने उत्तर दिया, “गुरुजी, मैंने आपकी सीख को कभी महत्व नहीं दिया। मैंने जीवन में समय पर सही चीजें नहीं सीखीं और अब मुझे इसका परिणाम भुगतना पड़ रहा है।”

शिक्षक ने कहा, “नियांत, तुम्हें याद रखना चाहिए था कि ‘न सुनोगे सीख तो मांगोगे भीख’। जीवन में समय पर सीखने की महत्वता को न समझने का यही परिणाम होता है।”

नियांत को अपनी गलतियों का एहसास हुआ और उसने फिर से पढ़ाई शुरू की और अपने जीवन को सुधारने का प्रयास किया। उसे समझ में आ गया कि समय पर सही चीजें सीखना कितना जरूरी है।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि जीवन में सही समय पर सही चीजें सीखना कितना महत्वपूर्ण है। अगर हम समय पर नहीं सीखते, तो हमें भविष्य में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

शायरी:

जिंदगी की राह में, अनुभव की सीख बड़ी है,

जो न सुने सीख वो, किस्मत से भीख मांगता है।

सपनों की मंजिल पर, ज्ञान का दीपक जलाना है,

जो खुद को न पढ़ाए, वो हर राह में भटकता है।

उम्र के हर मोड़ पर, अनजाने सबक मिलते हैं,

जो न सीखे इनसे, वो जीवन में पिछड़ता है।

सीखो इस दुनिया से, हर पल नया इशारा है,

जो न समझे बात ये, वो हर दिन अधूरा है।

हर शब्द में छिपी, जीवन की गहरी सीख है,

न सुनोगे तो यारो, जीवन भर की भीख है।

 

न सुनोगे सीख तो मांगोगे भीख शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of न सुनोगे सीख तो मांगोगे भीख – Na sunoge seekh to mangoge bheekh Idiom:

Introduction: The Hindi language is a treasure trove of numerous proverbs and idioms. One such popular proverb is – “न सुनोगे सीख तो मांगोगे भीख” (If you don’t heed advice, you’ll end up begging). This proverb illustrates a truth of life, emphasizing the importance of learning and discipline.

Meaning: The meaning of this proverb is that if a person does not listen to others’ advice in time or does not follow discipline, they may have to struggle economically or socially in the future. This proverb teaches the importance of proper guidance and knowledge in life.

Usage: This proverb is commonly used in contexts related to education, morality, and discipline. It serves as a lesson for children, youth, and all those who ignore the important lessons of life.

Example:

Consider a student who does not pay attention to studies and ignores the advice of teachers. In the future, he might face difficulties in securing a good job, leading to economic and social struggles. In such a scenario, this proverb fits perfectly.

Conclusion: The proverb “न सुनोगे सीख तो मांगोगे भीख” (If you don’t heed advice, you’ll end up begging) teaches us the importance of knowledge and education. It is an inspirational message that encourages the youth to understand the significance of the right direction and discipline in life. Therefore, we should understand the importance of this proverb and incorporate it into our lives.

Story of ‌‌Na sunoge seekh to mangoge bheekh Idiom in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a boy named Niyant. Niyant was very playful and mischievous. He had no interest in studies and often ran away from school to play by the river. His parents and teachers repeatedly tried to explain to him the importance of education, but Niyant never listened.

As time passed, Niyant grew up. When he started looking for a job, he realized that he neither had a good education nor any skills. He failed everywhere and couldn’t find any work. He became financially weak and had to ask others for help to sustain his life.

One day, his former teacher saw him and asked, “Niyant, how did you end up in this situation?” Niyant replied, “Guruji, I never valued your teachings. I didn’t learn the right things at the right time in life, and now I am facing the consequences.”

The teacher said, “Niyant, you should have remembered that ‘If you don’t heed advice, you’ll end up begging’. This is the result of not understanding the importance of learning in time in life.”

Niyant realized his mistakes and started studying again, trying to improve his life. He understood how crucial it is to learn the right things at the right time.

This story teaches us the importance of learning the right things at the right time in life. If we don’t learn in time, we may face significant difficulties in the future.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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