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न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी, अर्थ, प्रयोग(Na rahega baans na bajegi bansuri)

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न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी: इस मुहावरे का अर्थ है कि अगर मूल कारण को ही समाप्त कर दिया जाए तो समस्या स्वतः ही समाप्त हो जाएगी। जैसे बांसुरी बांस से बनती है, अगर बांस ही न हो, तो बांसुरी कैसे बनेगी।

अर्थ: अगर मूल स्रोत ही न हो तो उससे उत्पन्न होनेवाली समस्याएँ भी नहीं होंगी।

संदर्भ में समझाना:

आइए इसे संघर्ष के मूल कारण को समाप्त करने के संदर्भ में समझते हैं। अगर किसी विवाद में संघर्ष का मूल कारण ही दूर किया जाए, तो विवाद स्वतः ही समाप्त हो जाएगा। जैसे अगर दो लोग पानी की टंकी के लिए लड़ रहे हैं, तो उसका समाधान यह है कि उन्हें और अधिक पानी की सप्लाई दी जाए, ताकि उन्हें लड़ने की जरूरत ही न हो।

प्रयोग:

-> जब दो समूह एक ही जमीन पर दावा कर रहे थे, तो नगरपालिका ने उस जमीन को सार्वजनिक पार्क में बदल दिया, इससे “न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी” की तरह विवाद समाप्त हो गया।

-> राजनीतिज्ञों को अगर जनहित में काम करना है, तो उन्हें विवादों के मूल कारण को समाप्त करना होगा, ताकि “न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी” की तरह समस्या ही न रहे।

इस प्रकार, यह मुहावरा हमें यह सिखाता है कि समस्या का समाधान उसके मूल कारण में ही छिपा होता है। अगर हम उस मूल कारण को ही समाप्त कर दें, तो समस्या स्वतः ही समाप्त हो जाती है।

न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी मुहावरा पर कहानी:

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में दो परिवार रहते थे, शर्मा जी और वर्मा जी। इन दोनों परिवारों के बीच में एक छोटी सी जमीन को लेकर विवाद था। यह जमीन इनके घरों के बीच में थी और दोनों ही परिवार इसे अपनी मिल्कियत बताते थे।

इस विवाद ने गाँव में तनाव का माहौल बना दिया था। गाँववाले भी इस विवाद से परेशान हो गए थे, क्योंकि दोनों परिवार बहुत ही समृद्ध और प्रभावशाली थे।

एक दिन गाँव के सरपंच ने फैसला किया कि इस विवाद को हमेशा के लिए खत्म करना होगा। उन्होंने दोनों परिवारों को पंचायत में बुलाया और कहा, “इस जमीन के टुकड़े ने हमारे गाँव को बांट दिया है। हमें इसका हल निकालना होगा।”

सरपंच ने प्रस्ताव रखा कि इस जमीन पर एक सार्वजनिक विद्यालय बनाया जाए, जिससे सभी गाँववाले लाभान्वित हो सकें। शुरू में तो दोनों परिवारों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, लेकिन सरपंच ने उन्हें समझाया कि इससे उनके बच्चे और गाँव के बाकी बच्चे शिक्षित होंगे और गाँव का विकास होगा।

अंत में, दोनों परिवार मान गए और जमीन पर विद्यालय बनने लगा। जब विद्यालय बन कर तैयार हुआ, तो गाँव में खुशी की लहर दौड़ गई। विवाद का मूल कारण खत्म हो गया था, और अब “न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी” की तरह विवाद की कोई बात ही नहीं रही।

दोनों परिवार भी समझ गए कि उनके बीच की दुश्मनी से ज्यादा महत्वपूर्ण गाँव का विकास और शांति है। इस तरह से सरपंच ने विवाद के मूल कारण को समाप्त करके गाँव में शांति स्थापित कर दी।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि अगर हम संघर्ष के मूल कारण को ही समाप्त कर दें, तो समस्याएँ खुद-ब-खुद हल हो जाती हैं।

शायरी:

न रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी,

ज़िंदगी की राह में है यही रस्म पुरानी।

विवाद जब तक जड़ से न हटे,

कैसे सुनाई देगी दिल की कहानी।

आँखों में जज्बात के ज़रा सिरे छुपे,

लफ्ज़ों में चिराग की तरह जलती दीवानी।

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी – Na rahega baans na bajegi bansuri Idiom:

The meaning of this idiom is that if the root cause is eliminated, the problem will automatically resolve. Just like a flute is made from bamboo, if there is no bamboo, how can a flute be made? 

Meaning: If there is no original source, there won’t be problems arising from it. 

Explaining in context: Let’s understand this in the context of eliminating the root cause of conflict. If in a dispute, the root cause of the conflict is removed, then the dispute will automatically come to an end. For instance, if two people are fighting over a water tank, the solution is to provide them with more water supply so they don’t need to fight over it.

Usage:

 -> When two groups were claiming the same piece of land, the municipality turned it into a public park, ending the dispute in a manner reminiscent of “If there’s no bamboo, there won’t be a flute.” 

-> If politicians want to work for public welfare, they must eliminate the root causes of disputes, so that like “If there’s no bamboo, there won’t be a flute,” there’s no problem at all. In this way, the idiom teaches us that the solution to a problem lies in its root cause. If we eliminate that root cause, the problem automatically gets resolved.

Story of Na rahega baans na bajegi bansuri Idiom in English:

A long time ago, in a small village, there were two families: the Sharmas and the Vermas. There was a dispute between these two families over a small piece of land. This land was situated between their homes, and both families claimed it as their own.

The dispute created tension in the village. The villagers were also troubled by this disagreement because both families were very affluent and influential.

One day, the village chief decided that this conflict must be resolved once and for all. He summoned both families to the village council and said, “This piece of land has divided our village. We must find a solution.”

The village chief proposed that a public school be built on this land, benefiting all the villagers. Initially, both families opposed this proposal. However, the village chief explained that this would educate their children as well as other children in the village, leading to the village’s development.

In the end, both families agreed, and the construction of the school began. When the school was completed, a wave of happiness swept through the village. The root cause of the dispute had been eliminated, and like the saying “neither will there be the bamboo nor the flute,” the dispute itself vanished.

Both families realized that the village’s development and peace were more important than their feud. In this way, the village chief eradicated the root cause of the dispute and established peace in the village.

From this story, we learn that if we address the root cause of a conflict, the problems naturally resolve themselves.

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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