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लंबी-चौड़ी हाँकना अर्थ, प्रयोग (Lambi-Chaudi hankna)

परिचय: हिंदी भाषा में अनेक मुहावरे और कहावतें हैं जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को व्यक्त करती हैं। “लंबी-चौड़ी हाँकना” भी एक ऐसा ही मुहावरा है जिसका प्रयोग व्यक्ति के अतिशयोक्ति भरी बातों को दर्शाने के लिए किया जाता है।

अर्थ: “लंबी-चौड़ी हाँकना” मुहावरे का अर्थ है बढ़ा-चढ़ाकर या अतिरंजित तरीके से बातें करना। यह अक्सर उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो अपने आपको या अपनी बातों को ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाने के लिए अतिरंजित वर्णन करते हैं।

प्रयोग: यह मुहावरा तब प्रयोग किया जाता है जब किसी की बातों में वास्तविकता से अधिक बढ़ा-चढ़ाव हो।

उदाहरण:

-> मुनीश हमेशा अपनी यात्राओं के बारे में लंबी-चौड़ी हाँकता रहता है, जैसे वह हर बार मौत के मुँह से वापस आया हो।

निष्कर्ष: “लंबी-चौड़ी हाँकना” मुहावरा हमें सिखाता है कि वास्तविकता और सच्चाई की सराहना करनी चाहिए और बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने से बचना चाहिए। यह हमें यह भी बताता है कि अतिरंजित बातें करने से विश्वास की कमी हो सकती है और लोगों की नजर में हमारी साख घट सकती है।

लंबी-चौड़ी हाँकना मुहावरा पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में सुरेंद्र नाम का एक व्यक्ति रहता था। सुरेंद्र को यात्राएँ करने का बहुत शौक था, और वह अक्सर नई-नई जगहों पर जाया करता था। लेकिन, सुरेंद्र में एक विशेषता थी; वह जब भी यात्रा से लौटता, अपने अनुभवों को बड़े ही अतिरंजित तरीके से सुनाता।

एक बार सुरेंद्र ने एक पहाड़ी इलाके की यात्रा की। लौटने पर, वह गाँव वालों को बताने लगा कि कैसे उसने अकेले ही एक भयानक भालू से मुकाबला किया और उसे भगा दिया। सुरेंद्र ने यह भी कहा कि उसने बर्फीले तूफान में रात बिताई, बिना किसी सहायता के।

गाँव वाले सुरेंद्र की कहानियों को सुनकर चकित रह गए, लेकिन उनमें से कुछ को शक भी हुआ। उन्होंने सुरेंद्र की यात्रा की तस्वीरें देखने की इच्छा जताई। सुरेंद्र ने जब तस्वीरें दिखाईं, तो सब साफ हो गया कि उसकी कहानियाँ वास्तविकता से बहुत दूर थीं।

गाँव के बुजुर्ग ने सुरेंद्र को समझाया, “बेटा, ‘लंबी-चौड़ी हाँकने’ से कुछ नहीं होता। अपने अनुभवों को जैसा है वैसा ही सुनाओ। अतिरंजन से तुम्हारी विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लगता है।”

सुरेंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने आगे से वास्तविकता में जो देखा और अनुभव किया, वही सुनाने का वचन दिया।

निष्कर्ष:

इस कहानी के माध्यम से हमें सीखने को मिलता है कि “लंबी-चौड़ी हाँकना” न केवल हमारे व्यक्तित्व को कमजोर करता है, बल्कि हमारी साख भी घटाता है। अपनी बातों में सत्यता और सादगी बरतना ही सबसे उत्तम है।

शायरी:

लंबी-चौड़ी हाँकने का शौक उन्हें, जिनके किस्से अधूरे हैं,

सच्चाई की राह पे चलने वालों के, कदम कभी ना मजबूरे हैं।

कहानियों में अपनी बढ़ाचढ़ा कर, वो दुनिया को भरमाते हैं,

मगर आँखों की सच्चाई में, असली किरदार नज़र आते हैं।

अतिरंजन की इस दौड़ में, कुछ पल का सुकून खो देते हैं,

जो सच के साथी हैं, वही तो जीवन में सच में जीते हैं।

लंबी-चौड़ी हाँकने वाले, खुद को बड़ा समझते हैं,

मगर सच्चाई के आगे, उनके झूठ छोटे पड़ते हैं।

सच की राह पे चलने वालों का, अलग ही आभास होता है,

लंबी-चौड़ी हाँकने वालों का, सफर अक्सर उदास होता है।

 

लंबी-चौड़ी हाँकना शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of लंबी-चौड़ी हाँकना – Lambi-Chaudi hankna Idiom:

Introduction: In the Hindi language, there are numerous idioms and proverbs that express various aspects of life. “Lambi-Chaudi Haankna” is one such idiom used to depict a person’s exaggerations in their speech.

Meaning: The idiom “Lambi-Chaudi Haankna” means to talk in an exaggerated or overstated manner. It is often used for people who describe themselves or their stories in an exaggerated way to appear more important.

Usage: This idiom is employed when someone’s descriptions go beyond reality, adding unnecessary embellishments to the tale.

Example:

-> Munish always brags extensively about his travels, as if he has returned from the brink of death every time.

Conclusion: The idiom “Lambi-Chaudi Haankna” teaches us to appreciate reality and truthfulness and to avoid exaggerating presentations. It also informs us that overstating facts can lead to a lack of trust and diminish our credibility in the eyes of others.

Story of ‌‌Lambi-Chaudi Haankna Idiom in English:

In a small village lived a man named Surendra who had a great passion for traveling and often visited new places. However, Surendra had a peculiar trait; whenever he returned from a journey, he would narrate his experiences in a highly exaggerated manner.

Once, Surendra went on a trip to a mountainous region. Upon his return, he began telling the villagers how he single-handedly fought off a terrifying bear and chased it away. Surendra also claimed to have spent the night in a snowy storm without any help.

The villagers were astonished by Surendra’s stories, but some of them were skeptical. They expressed a desire to see photographs of Surendra’s journey. When Surendra showed the pictures, it became clear that his stories were far from reality.

An elder of the village explained to Surendra, “Son, nothing is gained by ‘exaggerating’. Narrate your experiences just as they are. Exaggeration casts doubt on your credibility.”

Surendra realized his mistake and promised to only share what he genuinely saw and experienced from then on.

Conclusion:

This story teaches us that “exaggerating” not only weakens our personality but also diminishes our credibility. It is best to maintain truthfulness and simplicity in our words.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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