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कागजी घोड़े दौड़ाना अर्थ, प्रयोग(Kagzi ghode daudana)

परिचय: ‘कागजी घोड़े दौड़ाना’ एक हिंदी मुहावरा है जिसका उपयोग व्यर्थ और अनुपयोगी कामों के संदर्भ में होता है। यह मुहावरा उन परिस्थितियों को व्यक्त करता है जहां केवल पढ़ने-लिखने का काम होता है लेकिन उससे कोई व्यावहारिक या सार्थक परिणाम नहीं निकलता।

अर्थ: ‘कागजी घोड़े दौड़ाना’ का अर्थ है ऐसे कार्य में लगे रहना जिससे वास्तविकता में कोई उपयोगी परिणाम न निकले। यह व्यक्त करता है कि कार्य बहुत होता है पर उसका कोई ठोस फल प्राप्त नहीं होता।

प्रयोग: इस मुहावरे का उपयोग तब होता है जब कोई व्यक्ति बहुत पढ़ता-लिखता है लेकिन उससे कोई व्यावहारिक या सार्थक कार्य नहीं होता।

उदाहरण:

-> विशाल दिन भर किताबें पढ़ता रहता है, लेकिन उसके पढ़ने का कोई उपयोगी परिणाम नहीं निकलता। वह ‘कागजी घोड़े दौड़ा रहा है’।

-> लक्ष्मी अपने कार्यालय के काम में बहुत समय लगाती है, लेकिन उसका काम केवल कागजों तक सीमित रहता है और उससे कोई सार्थक नतीजा नहीं निकलता। वह ‘कागजी घोड़े दौड़ा रही है’।

निष्कर्ष: ‘कागजी घोड़े दौड़ाना’ मुहावरा हमें सिखाता है कि केवल पढ़ने-लिखने से अगर कोई व्यावहारिक उपयोगिता नहीं निकलती, तो वह समय की बर्बादी है। इसलिए, हमें ऐसे कार्य करने चाहिए जो व्यावहारिक रूप से उपयोगी हों और सार्थक परिणाम दें।

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कागजी घोड़े दौड़ाना मुहावरा पर कहानी:

एक छोटे शहर में विकास नाम का एक युवक रहता था। विकास बहुत ही बुद्धिमान और ज्ञानी था, लेकिन उसकी एक आदत थी जिसे देखकर सभी हैरान रहते थे। वह दिन-रात किताबें पढ़ता, लेकिन कभी भी उसकी पढ़ाई का कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आता।

उसके पड़ोसी प्रेमचंद्र अक्सर कहते, “विकास तो बस ‘कागजी घोड़े दौड़ाता’ रहता है।” विकास के पास ज्ञान का खजाना था, लेकिन वह उसे व्यावहारिक रूप में इस्तेमाल नहीं कर पाता था।

एक दिन गांव में एक समस्या आई, और सभी ने सोचा कि विकास इसका हल जरूर निकालेगा। लेकिन जब सभी विकास के पास पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि विकास तो बस किताबी ज्ञान में ही खोया हुआ था। उसके पास उस समस्या का कोई व्यावहारिक समाधान नहीं था।

इस घटना ने विकास को एक बड़ा सबक सिखाया। उसने समझा कि सिर्फ किताबें पढ़ने से ज्ञान नहीं बढ़ता, बल्कि उस ज्ञान को व्यावहारिक जीवन में लागू करना भी जरूरी है। उस दिन के बाद से विकास ने अपने ज्ञान का इस्तेमाल समाज के भले के लिए करना शुरू किया।

निष्कर्ष:

इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि ‘कागजी घोड़े दौड़ाना’ यानी केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर ध्यान देना और उसे व्यावहारिक रूप में न लागू करना अंततः व्यर्थ है। इसलिए, हमें अपने ज्ञान और सीख का इस्तेमाल समाज के कल्याण के लिए करना चाहिए।

शायरी:

कागजी घोड़े दौड़ाते रहे, जिंदगी की राहों में,

हकीकत से दूर, ख्वाबों के साये में बहते रहे।

सपने वहीं सजाए, जो कभी हकीकत न बन पाए,

कागजी घोड़े दौड़ाने में, असल जिंदगी से अनजान रहे।

किताबों के पन्नों में खोया, हर ख्वाब बस अधूरा रहा,

कागजी घोड़ों पर सवार, हकीकत से कोसों दूर रहा।

ख्वाबों की दुनिया में जीना, असलियत से दूर भागना,

कागजी घोड़े दौड़ाना, जीवन का व्यर्थ सफर बन जाना।

आओ अब हकीकत में जिएं, ख्वाबों को सच कर दिखाएं,

कागजी घोड़े नहीं, अपने हौसलों को असमान तक ले जाएं।

 

कागजी घोड़े दौड़ाना शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of कागजी घोड़े दौड़ाना – Kagzi ghode daudana Idiom:

Introduction: ‘Kagzi ghode daudana’ is a Hindi idiom used in the context of futile and useless tasks. This phrase expresses situations where only reading and writing activities are done, but they yield no practical or meaningful outcome.

Meaning: The phrase ‘Kagzi ghode daudana’ means engaging in activities that do not produce any useful results in reality. It implies that there is a lot of activity, but it does not lead to any solid outcome.

Usage: This idiom is used when someone spends a lot of time reading and writing, but it does not lead to any practical or significant work.

Usage:

-> Vishal spends all day reading books, but his reading does not lead to any useful outcome. He is ‘running paper horses’.

-> Lakshmi spends a lot of time on her office work, but her work remains confined to paperwork and does not yield any meaningful results. She is ‘Kagzi ghode daudana’.

Conclusion: The idiom ‘Kagzi ghode daudana’ teaches us that if reading and writing do not lead to any practical utility, it is a waste of time. Therefore, we should engage in tasks that are practically useful and produce meaningful results.

Story of ‌‌Kagzi ghode daudana Idiom in English:

In a small town, there was a young man named Vikas. Vikas was very intelligent and knowledgeable, but he had a habit that surprised everyone. He read books day and night, but his studies never resulted in any tangible outcomes.

His neighbor, Premchandra, often said, “Vikas just keeps ‘running paper horses’.” Vikas possessed a treasure of knowledge, but he could not apply it practically.

One day, a problem arose in the village, and everyone thought Vikas would surely find a solution. However, when they approached Vikas, they realized that he was lost in his theoretical knowledge. He had no practical solution to the problem.

This incident taught Vikas a significant lesson. He understood that merely reading books does not enhance knowledge; applying that knowledge in practical life is also essential. From that day onwards, Vikas started using his knowledge for the welfare of society.

Conclusion:

This story teaches us that ‘Kagzi ghode daudana,’ which means focusing only on theoretical knowledge without applying it practically, is ultimately futile. Therefore, we should use our knowledge and learning for the betterment of society.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

इस मुहावरे का उदाहारण कैसे दिया जा सकता है?

उदाहारण के रूप में, किसी कला या व्यापार में किसी का आदर्श नकली तरीके से अनुकरण करना इस मुहावरे का उदाहारण हो सकता है।

कागजी घोड़े दौड़ाना मुहावरे का उपयोग किस प्रकार से हो सकता है?

इस मुहावरे का उपयोग असली या सच्चे तत्वों के अनुकरण के बजाय नकली चीजों बनाने के लिए किया जा सकता है।

कागजी घोड़े दौड़ाना मुहावरा का क्या अर्थ है?

इस मुहावरे का अर्थ है किसी कागज़ के घोड़े की तरह बिना असली या प्राकृतिक तत्वों के अनुकरण करना, असलीता से दूर रहकर कुछ बनाना।

क्या कागजी घोड़े दौड़ाना मुहावरा केवल नकलीता के संदर्भ में ही होता है?

नहीं, यह मुहावरा नकलीता के अलावा भी किसी असली चीज के प्रति अविश्वासपूर्ण या दूरदृष्टि को दर्शाने के लिए भी उपयोग हो सकता है।

कागजी घोड़े दौड़ाना मुहावरे का इतिहास क्या है?

इस मुहावरे का विशेष इतिहास नहीं है, लेकिन यह सामान्य भाषा में उपयोग होने वाला प्रसारप्रसार मुहावरा है।

हिंदी मुहावरों की पूरी लिस्ट एक साथ देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

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