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जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का, अर्थ, प्रयोग(Joru, Zameen jor ka nahi to kisi aur ka)

“जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का” यह हिंदी में एक पारंपरिक कहावत है, जिसका अर्थ और प्रयोग सामाजिक संबंधों और संपत्ति के प्रति नजरिए पर आधारित है।

परिचय: यह कहावत प्राचीन समय से हिंदी भाषी क्षेत्रों में प्रचलित है। इसका प्रयोग अक्सर संपत्ति और पारिवारिक संबंधों की बातचीत में होता है, विशेषकर उन स्थितियों में जहां नियंत्रण और स्वामित्व का प्रश्न होता है।

अर्थ: “जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का” का अर्थ है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी या अपनी संपत्ति पर ठीक से नियंत्रण नहीं रखता है, तो वह दूसरों के प्रभाव में आ सकती हैं या दूसरों की संपत्ति बन सकती हैं।

प्रयोग: इस कहावत का प्रयोग तब होता है जब किसी को यह बताना हो कि उन्हें अपनी जिम्मेदारियों और संपत्ति का ध्यान रखना चाहिए।

उदाहरण:

-> अभय ने अपनी जमीन की देखभाल नहीं की, और धीरे-धीरे उस पर पड़ोसियों ने कब्जा कर लिया। इस पर उसके चाचा ने कहा, “जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का।”

-> सुधीर अपनी पत्नी की उपेक्षा करता था, जिसके कारण उसकी पत्नी ने किसी और में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी। इस पर सुधीर के मित्र ने कहा, “जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का।”

निष्कर्ष: इस कहावत से हमें यह सिखने को मिलता है कि व्यक्ति को अपनी संपत्ति और पारिवारिक संबंधों की उचित देखभाल करनी चाहिए। यह नियंत्रण और जिम्मेदारी के महत्व को दर्शाता है और यह भी कि किसी भी संपत्ति या संबंध की उपेक्षा करने पर उसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

Hindi Muhavare Quiz

जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का मुहावरा पर कहानी:

एक छोटे से गांव में विशाल नामक एक किसान रहता था। विशाल के पास एक बड़ी और उपजाऊ जमीन थी, लेकिन वह अपनी जमीन की देखभाल में लापरवाह था। वह अक्सर गांव की चौपाल में अपने दोस्तों के साथ बैठकर समय गुजारता, और अपनी जमीन की ओर ध्यान नहीं देता था।

उसकी इस लापरवाही का फायदा उसके पड़ोसी रामू ने उठाया। रामू धीरे-धीरे विशाल की जमीन पर कब्जा करने लगा। वह विशाल की जमीन पर अपनी फसलें उगाने लगा, और विशाल को इसका एहसास तक नहीं हुआ।

जब विशाल को इसका पता चला, तो वह बहुत परेशान हुआ। उसने अपने एक बुजुर्ग चाचा से इस बारे में सलाह लेने के लिए गया। चाचा ने उसे समझाया, “बेटा, तुमने अपनी जमीन की देखभाल नहीं की, इसलिए अब यह दूसरे की हो गई है। याद रखो, ‘जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का’। अब अगर तुम अपनी जमीन वापस पाना चाहते हो, तो तुम्हें इसके लिए प्रयास करने होंगे।”

विशाल ने अपने चाचा की बातों से सबक लिया और अपनी जमीन की देखभाल में जुट गया। उसने अपने पड़ोसी से अपनी जमीन वापस लेने के लिए कानूनी कदम उठाए और अंततः अपनी जमीन वापस पा ली।

इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि हमें अपनी संपत्ति और पारिवारिक संबंधों की उचित देखभाल करनी चाहिए। यह कहावत हमें यह भी सिखाती है कि नियंत्रण और जिम्मेदारी के महत्व को समझना चाहिए और उपेक्षा करने पर उसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

शायरी:

अपनी जमीन, अपने रिश्तों का, रखना होगा ख्याल,

“जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का”, ये है जीवन का सवाल।

जो अपनी धरती, अपने लोगों को नहीं संभाल सकता,

उसका हक़ धीरे-धीरे, दूसरा कोई छीन लेता।

जिन्हें नहीं ख़बर अपने आँगन की, वो कैसे सजाएंगे फूल,

जिसकी जमीन पर दूसरे का राज, वो कैसे बोएंगे धूल।

“जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का”, इसे समझना होगा,

अपनी जड़ों की कदर, हर किसी को करना होगा।

जिनकी नज़रें हमेशा आसमान में, वो धरती का मोल नहीं जानते,

जिनके पास सब कुछ है, पर वो अपने नहीं पहचानते।

“जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का”, इसका अर्थ गहरा है,

जो अपना नहीं समझता, उसे जीवन में फेरा है।

 

जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का – Joru, Zameen jor ka nahi to kisi aur ka Idiom:

“जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का” is a traditional Hindi idiom, the meaning and usage of which are based on perspectives towards social relationships and property.

Introduction: This proverb has been prevalent since ancient times in Hindi-speaking regions. It is often used in discussions about property and family relationships, especially in situations where control and ownership are in question.

Meaning: “जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का” means that if a person does not properly maintain control over their spouse or property, it can fall under the influence of others or become the property of others.

Usage: This proverb is used when someone needs to be reminded to take care of their responsibilities and property.

Usage:

-> Abhay did not take care of his land, and gradually his neighbors took possession of it. On this, his uncle said, “If you don’t take care of your wife or land, someone else will.”

-> Sudhir neglected his wife, which led her to take interest in someone else. Upon this, Sudhir’s friend said, “If you don’t take care of your wife or land, someone else will.”

Conclusion: This idiom teaches us that one should properly take care of their property and family relationships. It highlights the importance of control and responsibility and also shows that neglecting any property or relationship can lead to serious consequences.

Story of ‌‌Joru, Zameen jor ka nahi to kisi aur ka Idiom in English:

In a small village, there lived a farmer named Vishal. Vishal owned a large and fertile piece of land, but he was careless in its maintenance. He often spent his time sitting with friends at the village square, paying no attention to his land.

Taking advantage of his negligence, his neighbor, Ramu, started encroaching on Vishal’s land. Ramu gradually began cultivating crops on Vishal’s land, and Vishal remained oblivious to this encroachment.

When Vishal eventually realized what had happened, he was greatly distressed. He sought advice from his elderly uncle. The uncle explained, “Son, because you did not take care of your land, it has now become someone else’s. Remember, ‘If you don’t take care of your wife or land, someone else will.’ If you want to reclaim your land, you will have to make an effort.”

Vishal learned a lesson from his uncle’s words and started taking care of his land. He took legal steps to reclaim his land from his neighbor and eventually succeeded in getting it back.

This story teaches us the importance of properly caring for our property and family relationships. The proverb ‘If you don’t take care of your wife or land, someone else will’ also teaches us the importance of understanding responsibility and control, and that neglect can lead to serious consequences.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

इस मुहावरे का प्रयोग किस प्रकार के स्थितियों में हो सकता है?

जब कोई व्यक्ति किसी कार्य में सफलता प्राप्त करने में असमर्थ होता है, तो वह इस मुहावरे का प्रयोग करके अपनी कमजोरी को दर्शा सकता है।

क्या इस मुहावरे में ‘जोरू’ और ‘जमीन जोर का’ का अर्थ अलग-अलग हैं?

हां, ‘जोरू’ का अर्थ है अशक्ति और ‘जमीन जोर का’ का अर्थ है साहस या शक्ति। यह मुहावरा उन लोगों के लिए है जो किसी कार्य में कमजोर होते हैं।

मुहावरा “जोरू, जमीन जोर का नहीं तो किसी और का” का अर्थ क्या है?

ह मुहावरा उस स्थिति को व्यक्त करता है जब कोई किसी कार्य को सफलता से पूरा करने के लिए समर्थ नहीं होता, तो उसे किसी और का साहारा लेना पड़ता है।

क्या इस मुहावरे में शिक्षाप्रद सन्देश है?

हां, इस मुहावरे से यह सिखने को मिलता है कि हमें कभी-कभी अपनी कमजोरी को स्वीकार करना और सहारा लेना सही हो सकता है।

क्या इस मुहावरे का कोई विशेष उपयोग है?

हां, यह मुहावरा अक्सर उस समय का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल होता है जब कोई अपनी कमजोरी को स्वीकार करता है और दूसरों से सहारा मांगता है।

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