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जल-भुन के ख़ाक हो जाना अर्थ, प्रयोग(Jal-bhun ke khak ho jana)

परिचय: ‘जल-भुन के ख़ाक हो जाना’ एक लोकप्रिय हिंदी मुहावरा है, जिसका प्रयोग अक्सर तीव्र ईर्ष्या या नाराजगी की भावना को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। यह मुहावरा बताता है कि किसी के प्रति ईर्ष्या इतनी अधिक हो गई कि व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान हो जाता है।

अर्थ: ‘जल-भुन के ख़ाक हो जाना’ का अर्थ है कि किसी की सफलता या खुशी से इतनी अधिक ईर्ष्या होना कि व्यक्ति अंदर ही अंदर जलकर ख़ाक हो जाए। यह मुहावरा अत्यधिक ईर्ष्या और असंतोष की स्थिति को दर्शाता है।

प्रयोग: यह मुहावरा अक्सर तब प्रयोग में लाया जाता है जब कोई दूसरे की सफलता या खुशी को देखकर अत्यधिक ईर्ष्या महसूस करता है।

उदाहरण:

-> जब अनुज को पदोन्नति मिली, तो उसके सहकर्मी उससे ‘जल-भुन के ख़ाक हो गए’।

-> अनीता की शादी में उसकी चचेरी बहन उसकी सुंदरता और ड्रेस देखकर ‘जल-भुन के ख़ाक हो गई’।

निष्कर्ष: ‘जल-भुन के ख़ाक हो जाना’ मुहावरा हमें यह सिखाता है कि ईर्ष्या और असंतोष की भावनाएँ हमें अंदर ही अंदर खा जाती हैं और ये नकारात्मक भावनाएँ हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं। इसलिए, हमें इनसे बचना चाहिए और दूसरों की सफलता पर खुशी मनाना सीखना चाहिए।

Hindi Muhavare Quiz

जल-भुन के ख़ाक हो जाना मुहावरा पर कहानी:

एक छोटे शहर में काव्या नाम की एक लड़की रहती थी। काव्या बहुत मेहनती और प्रतिभाशाली थी, लेकिन उसमें एक बड़ी कमजोरी थी – वह बहुत जल्दी ईर्ष्या करने लगती थी।

उसके पड़ोस में एक लड़की गौरी रहती थी, जो हर क्षेत्र में काव्या से आगे थी। जब भी गौरी कोई नई उपलब्धि हासिल करती, काव्या उससे ‘जल-भुन के ख़ाक हो जाती’। उसके मन में गौरी के प्रति ईर्ष्या इतनी बढ़ गई कि वह अपने काम पर ध्यान नहीं दे पाती थी।

एक दिन, स्कूल में एक प्रतियोगिता हुई। गौरी ने उसमें भाग लिया और पहला पुरस्कार जीता। काव्या ने भी प्रतियोगिता में भाग लिया था, लेकिन उसका सारा ध्यान गौरी को हराने में था, न कि अपनी प्रतिभा दिखाने में। नतीजा यह हुआ कि काव्या ने खराब प्रदर्शन किया और पुरस्कार नहीं जीत पाई।

इस घटना के बाद, काव्या को समझ आया कि उसकी ईर्ष्या ने उसे ‘जल-भुन के ख़ाक’ कर दिया था। उसने तय किया कि अब वह दूसरों की उपलब्धियों से ईर्ष्या नहीं करेगी, बल्कि उनसे प्रेरणा लेकर अपने काम में सुधार करेगी।

निष्कर्ष:

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि ‘जल-भुन के ख़ाक हो जाना’ यानी ईर्ष्या करने से हम खुद को ही नुकसान पहुंचाते हैं। यह हमें सिखाता है कि हमें अपनी ऊर्जा और समय का सदुपयोग करना चाहिए और दूसरों की सफलता से प्रेरणा लेनी चाहिए।

शायरी:

जल-भुन के ख़ाक होने का दर्द, ये कैसी मजबूरी है,

दूसरों की खुशियों में, अपनी खुशियाँ क्यों चूरी है।

देखकर तेरी उड़ान को, मैं ‘जल-भुन के ख़ाक’ हो गया,

अपनी तकदीर से खेलकर, तेरी कामयाबी पे नाज़ हो गया।

ईर्ष्या की आग में जलते, हम खुद को भूल जाते हैं,

‘जल-भुन के ख़ाक’ होने में, अपनी हंसी खो जाते हैं।

तेरी सफलता देख, मैंने जल-भुन के राख हो गया,

अपनी जिंदगी में खुशी का एक पल भी ना पा सका।

ईर्ष्या की इस आग में, खुद को जलाना क्या काम,

दूसरों की खुशी में खुश होना, यही है जिंदगी का असली नाम।

 

जल-भुन के ख़ाक हो जाना शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of जल-भुन के ख़ाक हो जाना – Jal-bhun ke khak ho jana Idiom:

Introduction: ‘Jal-bhun ke khak ho jana’ is a popular Hindi idiom often used to express intense feelings of jealousy or resentment. The idiom indicates that the jealousy towards someone becomes so intense that it mentally disturbs the person.

Meaning: The idiom ‘Jal-bhun ke khak ho jana’ means feeling such extreme jealousy or envy towards someone’s success or happiness that the person internally burns and turns to ashes. It represents a state of extreme jealousy and dissatisfaction.

Usage: This idiom is frequently used when someone feels excessive jealousy upon seeing someone else’s success or happiness.

Usage:

-> When Anuj got a promotion, his colleagues ‘burned to ashes with jealousy’.

-> At Anita’s wedding, her cousin became ‘burned to ashes with jealousy’ seeing her beauty and dress.

Conclusion: The idiom ‘Jal-bhun ke khak ho jana’ teaches us that feelings of envy and dissatisfaction consume us from within and these negative emotions are harmful to our mental health. Therefore, we should avoid them and learn to celebrate others’ successes.

Story of ‌‌Jal-bhun ke khak ho jana Idiom in English:

In a small town, there was a girl named Kavya. Kavya was hardworking and talented, but she had a significant weakness – she would quickly become jealous.

Her neighbor, a girl named Gauri, excelled in every field, surpassing Kavya. Whenever Gauri achieved something new, Kavya would ‘burn to ashes with jealousy’. Her jealousy towards Gauri grew so much that it hindered her own focus and work.

One day, a competition was held at school. Gauri participated and won the first prize. Kavya also participated, but her entire focus was on defeating Gauri rather than showcasing her talent. As a result, Kavya performed poorly and did not win any prize.

After this event, Kavya realized that her jealousy had ‘burned her to ashes’. She decided that from now on, she would not envy others’ achievements but instead draw inspiration from them to improve her own work.

Conclusion:

This story teaches us that ‘burning to ashes with jealousy’ harms us. It instructs us to utilize our energy and time positively and take inspiration from others’ successes.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

“जल-भुन के ख़ाक हो जाना” मुहावरे का उदाहारण क्या हो सकता है?

उदाहारण के रूप में, “उसका पूरा व्यापार बर्बाद हो गया और वह जल-भुन के ख़ाक हो गया।”

इस मुहावरे का प्रयोग किस प्रकार किया जा सकता है?

इसे किसी के पूरी तरह से बर्बाद हो जाने की स्थिति को व्यक्त करने के लिए कहा जा सकता है।

क्या है मुहावरा “जल-भुन के ख़ाक हो जाना” का अर्थ?

इस मुहावरे का अर्थ है किसी की पूरी तरह से नाश हो जाना या समाप्त हो जाना।

क्या इसका कोई सांदर्भिक उपयोग है?

हां, इसे व्यक्ति के आर्थिक, सामाजिक, या व्यापारिक पतन की स्थिति को व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

क्या इस मुहावरे का कोई सामान्य उपयोग है?

हां, यह मुहावरा सामान्यत: किसी की पूरी तरह से बर्बाद हो जाने को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होता है।

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