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घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर अर्थ, प्रयोग(Ghoonghat wali dekh ke bhool na jana veer)

परिचय: “घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर” भारतीय समाज में प्रचलित एक पारंपरिक मुहावरा है। यह मुहावरा विशेषकर उन स्थितियों में प्रयोग किया जाता है, जहां लोग बाहरी आकर्षण या दिखावे में फंसकर अपने मूल उद्देश्य या कर्तव्य को भूल जाते हैं।

अर्थ: इस मुहावरे का अर्थ है कि कोई व्यक्ति बाहरी शोभा या आकर्षण में इतना खो जाए कि वह अपने मुख्य उद्देश्य या जिम्मेदारियों को भूल बैठे। यह मुहावरा आत्म-नियंत्रण और लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखने की महत्वपूर्णता पर जोर देता है।

प्रयोग: यह मुहावरा आमतौर पर तब प्रयोग किया जाता है जब किसी को सावधानीपूर्वक अपने लक्ष्यों की ओर ध्यान देने की याद दिलानी होती है, खासकर तब जब वे बाहरी आकर्षणों में उलझ रहे हों।

उदाहरण:

-> राजा ने अपने सेनापति को समझाया कि युद्ध में विजय प्राप्त करने हेतु ‘घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर।’

-> जब तक तुम अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहोगे, तब तक तुम्हें ‘घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर।’

निष्कर्ष: यह मुहावरा हमें सिखाता है कि जीवन में हमें बाहरी आकर्षणों से विचलित होकर अपने मुख्य लक्ष्यों को नहीं भूलना चाहिए। यह हमें यह भी बताता है कि सच्ची सफलता और प्रगति के लिए आत्म-नियंत्रण और ध्यान केंद्रित रखना अत्यंत आवश्यक है।

Hindi Muhavare Quiz

घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर मुहावरा पर कहानी:

बहुत समय पहले, धर्मपुर राज्य में राजकुमार नियांत नाम का एक युवा राजकुमार रहता था। वह बहुत ही बुद्धिमान और कुशल योद्धा थे। उनका मुख्य लक्ष्य था अपने राज्य को शत्रुओं से बचाना और उसे सुरक्षित रखना।

एक दिन, राज्य में एक बड़ा उत्सव आयोजित किया गया। उत्सव में अनेक सुंदर नर्तकियाँ आई थीं, जिनमें से एक ने राजकुमार नियांत का ध्यान आकर्षित किया। वह उसकी सुंदरता में इतने खो गए कि अपने राज्य की सुरक्षा के प्रति सतर्कता खो बैठे।

इसी बीच, शत्रु राज्य ने इसे अपने लाभ के लिए इस्तेमाल किया और धर्मपुर पर आक्रमण कर दिया। राजकुमार नियांत ने जब यह देखा तो उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत अपनी सेना को संगठित किया और बड़ी वीरता से राज्य को बचाया।

निष्कर्ष:

इस कहानी से हमें “घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर” मुहावरे का संदेश मिलता है। यह हमें सिखाता है कि हमें बाहरी आकर्षणों में फंसकर अपने मुख्य लक्ष्यों और जिम्मेदारियों को नहीं भूलना चाहिए। यह मुहावरा हमें आत्म-नियंत्रण रखने और अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखने की प्रेरणा देता है।

शायरी:

घूंघट वाली की अदा में खो न जाना वीर,
जिंदगी के इस सफर में अपना रोल न भूलना।

सजी हुई गलियों में, हर एक मंजर नया होगा,
तुम अपने सच को इन रंगों में खो न देना।

ख्वाबों की ये दुनिया बड़ी हसीन है, लेकिन,
अपने लक्ष्यों की डोर को हाथ से न जाने देना।

चाँदनी रातों में चाँद की चमक में खो न जाना,
तेरी मंजिलों की राहों में तू चलता चल जाना।

इस दुनिया की रंगीनियों में दिल लगा न बैठना,
‘घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर’, अपनी धुन में चलता जाना।

 

घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर – Ghoonghat wali dekh ke bhool na jana veer Idiom:

Introduction: “घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर” is a traditional idiom prevalent in Indian society. This idiom is particularly used in situations where people get distracted by external attractions or appearances and forget their core purpose or duties.

Meaning: The meaning of this idiom is that a person becomes so engrossed in external beauty or attraction that they forget their primary objectives or responsibilities. The idiom emphasizes the importance of self-control and staying focused on one’s goals.

Usage: This idiom is commonly used to remind someone to carefully focus on their goals, especially when they are getting entangled in external attractions.

Example:

-> The king advised his general, “Don’t forget your purpose upon seeing the veiled beauty in the midst of battle.”

-> As long as you stay focused on your goals, you must remember, ‘Don’t get distracted by the veiled beauty.’

Conclusion: This idiom teaches us that in life, we should not forget our main goals due to external distractions. It also tells us that true success and progress require self-control and maintaining focus on our objectives.

Story of ‌‌Ghoonghat wali dekh ke bhool na jana veer Idiom in English:

Long ago, in the kingdom of Dharmapur, there lived a young prince named Niyant. He was very intelligent and a skilled warrior. His main goal was to protect his kingdom from enemies and to keep it safe.

One day, a grand festival was organized in the kingdom. Many beautiful dancers attended the festival, and one of them caught the attention of Prince Niyant. He became so enchanted by her beauty that he lost his vigilance towards the security of his kingdom.

Meanwhile, the enemy kingdom took advantage of this situation and attacked Dharmapur. When Prince Niyant realized this, he understood his mistake. He quickly organized his army and saved the kingdom with great bravery.

Conclusion:

This story conveys the message of the idiom “घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर” (Don’t forget your duty upon seeing the veiled beauty). It teaches us not to get so entangled in external attractions that we forget our main goals and responsibilities. The idiom inspires us to maintain self-control and stay focused on our objectives.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

क्या इस मुहावरे का कोई और अर्थ होता है?

जी हां, यह मुहावरा भी उस व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है जो किसी अनजान या अज्ञात व्यक्ति के पीछे छिपकर कुछ करता है, बिना अपनी पहचान बताए।

इस मुहावरे का क्या इतिहास है?

यह मुहावरा प्राचीन समय से उपयोग में है, जिसमें घूंघट पहने हुए व्यक्ति को पहचानना कठिन होता है।

क्या है “घूंघट वाली देख के भूल न जाना वीर” मुहावरा का मतलब?

यह मुहावरा उस व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है जो किसी विशेष स्थिति या परिस्थिति में किसी व्यक्ति को जाकर सहायता करने के बावजूद, उसकी पहचान नहीं कर पाता।

इसका उपयोग किस प्रकार की स्थितियों में किया जा सकता है?

यह मुहावरा किसी भी ऐसी स्थिति में उपयोगी हो सकता है जहां एक व्यक्ति को अनजान या अज्ञात स्थिति का सामना करना पड़ता है।

इस मुहावरे का क्या सम्बन्ध साहित्य से है?

यह मुहावरा भारतीय साहित्य में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है, विशेषतः किस्से और कहानियों में।

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