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फावड़े का नाम गुलसफ़ा अर्थ, प्रयोग(Faavde ka naam Gulsafa)

परिचय: “फावड़े का नाम गुलसफ़ा” यह हिंदी मुहावरा उस स्थिति को दर्शाता है जहां बाहरी नाम और शक्ल से किसी चीज़ की असलियत या उसके अंदर की सच्चाई अलग होती है। यह उस परिस्थिति की ओर इशारा करता है जहां किसी व्यक्ति को उसकी किस्मत में जो लिखा होता है, उसी के अनुरूप परिणाम मिलता है, चाहे बाहरी रूप से चीज़ें कैसी भी क्यों न हों।

अर्थ: इस मुहावरे का सीधा अर्थ है कि चाहे आप फावड़े को खूबसूरत नाम गुलसफ़ा क्यों न दें, वह अपना काम खुदाई करना ही करेगा। इसी तरह, किसी व्यक्ति की किस्मत में जो लिखा होता है, वही होता है।

प्रयोग: यह मुहावरा तब प्रयोग में लाया जाता है जब किसी की किस्मत या नियति की बात हो, और यह दर्शाना हो कि बाहरी आवरण या नामकरण से असली स्वभाव या किस्मत नहीं बदलती।

उदाहरण:

-> विनीत ने अपनी पुरानी कार को नए पेंट और स्टिकर्स से सजाया, लेकिन उसकी कार फिर भी खराब हो गई। उसके दोस्त ने कहा, “भाई, फावड़े का नाम गुलसफ़ा कर देने से क्या होगा, किस्मत में जो लिखा है वही होगा।”

-> पूजा ने एक पुराने मकान को खरीदा और उसका नाम बदलकर ‘स्वर्ग’ रख दिया, लेकिन मकान की समस्याएं वैसी ही रहीं। उसके पिता ने कहा, “फावड़े का नाम गुलसफ़ा कर देने से कुछ नहीं होता।”

निष्कर्ष: “फावड़े का नाम गुलसफ़ा” मुहावरा हमें यह सिखाता है कि बाहरी बदलावों से किसी चीज़ की असलियत या नियति नहीं बदलती। यह हमें यह भी बताता है कि हमें बाहरी आवरणों से धोखा नहीं खाना चाहिए और असलियत को समझना चाहिए।

Hindi Muhavare Quiz

फावड़े का नाम गुलसफ़ा मुहावरा पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में मुनीश नाम का एक किसान रहता था। मुनीश के पास एक पुराना और जर्जर ट्रैक्टर था, जिसे वह अपने खेती के काम में इस्तेमाल करता था। एक दिन, मुनीश को लगा कि उसके ट्रैक्टर का रूप बदलने से शायद वह बेहतर काम करेगा। उसने अपने ट्रैक्टर को नए रंग से पेंट किया और उस पर चमकदार स्टिकर्स लगा दिए। ट्रैक्टर देखने में तो नया और खूबसूरत लगने लगा, लेकिन उसकी कार्यक्षमता वही रही।

जब मुनीश ने ट्रैक्टर को खेत में चलाया, तो वह फिर बंद हो गया। मुनीश को समझ में आया कि सिर्फ बाहरी सजावट से ट्रैक्टर की कार्यक्षमता नहीं बदलेगी। उसके पड़ोसी ने उसे देखकर कहा, “मुनीश, याद रखो, ‘फावड़े का नाम गुलसफ़ा’ कर देने से फावड़ा फूल नहीं उगा देगा। इसी तरह, तुम्हारे ट्रैक्टर की किस्मत में जो लिखा है, वही होगा।”

मुनीश ने इस बात से सीख ली और समझ गया कि उसे अपने ट्रैक्टर की मूल समस्या को ठीक करने की जरूरत है, न कि सिर्फ इसके बाहरी रूप को बदलने की।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि बाहरी बदलावों से चीजों की असली क्षमता या नियति नहीं बदलती है। “फावड़े का नाम गुलसफ़ा” मुहावरा हमें यही सिखाता है कि असली बदलाव के लिए अंदरूनी सुधार आवश्यक है।

शायरी:

फावड़े को गुलसफा कह देने से क्या होता है,

किस्मत का लिखा तो आखिर में वही होता है।

बाहरी आवरण में छुपा नहीं सकते हम असलियत को,

खुदा ने जो लिखा, उससे बदलती नहीं किस्मत को।

सजावट की चादर से, क्या ढकेगा नसीब का चेहरा,

जो लिखा तकदीर में, वही तो है असली गहरा।

फावड़े का नाम गुलसफा, फिर भी रहेगा वह फावड़ा,

किस्मत की कहानी में, बदलती नहीं है फितरत का फसाना।

ज़िंदगी की राहों में, नामों से नहीं बदलती कहानी,

फावड़े का नाम गुलसफा, यही है सबकी ज़ुबानी।

 

फावड़े का नाम गुलसफ़ा शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of फावड़े का नाम गुलसफ़ा – Faavde ka naam Gulsafa Idiom:

Introduction: “The idiom ‘फावड़े का नाम गुलसफ़ा'” is a Hindi proverb that illustrates a situation where the external name and appearance of something are different from its reality or true nature. It points to the scenario where a person gets outcomes in life as per their destiny, regardless of the external appearances of things.

Meaning: The direct meaning of this idiom is that even if you give a beautiful name like ‘Gulsafa’ to a spade, it will still perform its function of digging. Similarly, whatever is written in a person’s destiny will come to pass.

Usage: This idiom is used when discussing someone’s fate or destiny, highlighting that external coverings or renaming do not change the true nature or fate.

Usage:

-> Vinit decorated his old car with new paint and stickers, but it still broke down. His friend said, “Brother, what’s the use of naming a spade ‘Gulsafa’, what is written in destiny will happen.”

-> Pooja bought an old house and renamed it ‘Heaven’, but the problems of the house remained the same. Her father said, “Nothing changes by naming a spade ‘Gulsafa’.”

Conclusion: The idiom “Faavde ka naam Gulsafa” teaches us that external changes do not alter the reality or destiny of a thing. It also tells us that we should not be deceived by external appearances and should understand the reality.

Story of ‌‌Faavde ka naam Gulsafa Idiom in English:

In a small village lived a farmer named Munish. Munish had an old and worn-out tractor, which he used for farming. One day, he thought that changing the appearance of his tractor might improve its performance. He painted the tractor with new colors and adorned it with shiny stickers. The tractor looked new and beautiful, but its efficiency remained the same.

When Munish tried using the tractor in the field, it broke down again. He realized that merely decorating the exterior wouldn’t enhance the tractor’s functionality. His neighbor, observing this, said to him, “Munish, remember, just as naming a spade ‘Gulsafa’ doesn’t make it grow flowers, similarly, whatever is destined for your tractor will happen. External changes won’t alter its fate.”

Munish learned from this and understood that he needed to fix the core problems of his tractor, not just its outward appearance.

This story teaches us that external changes do not alter the true capability or destiny of things. The idiom “फावड़े का नाम गुलसफ़ा” conveys that real change requires internal improvements.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

क्या इस मुहावरे का कोई और रूप है?

हां, इस मुहावरे का एक और रूप है “फावड़ा छुपा बैठना” जिसका अर्थ भी समान होता है।

इस मुहावरे का उपयोग किस प्रकार से होता है?

यह मुहावरा उस समय उपयुक्त होता है जब किसी व्यक्ति या चीज़ का असली नाम छुपाने की कोशिश की जा रही हो।

क्या है मुहावरा “फावड़े का नाम गुलसफ़ा” का अर्थ?

इस मुहावरे का अर्थ है किसी चीज़ का असली नाम छुपाना या छिपाना।

क्या इस मुहावरे का कोई सामान्य उपयोग है?

हां, इसे रोजमर्रा की बातचीत में अक्सर सुना जा सकता है जब किसी ने कुछ को छुपाने की कोशिश की हो।

क्या इस मुहावरे का कोई इतिहासिक संदर्भ है?

इस मुहावरे का कोई विशेष इतिहासिक संदर्भ नहीं है, लेकिन यह बोलचाल में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।

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