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दुम हिलाते फिरना अर्थ, प्रयोग (Dum hilate firna)

परिचय: “दुम हिलाते फिरना” यह एक लोकप्रिय हिंदी मुहावरा है, जिसका प्रयोग अक्सर व्यक्ति के चापलूसी या खुशामद करने के स्वभाव को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह मुहावरा उस स्थिति को व्यक्त करता है जहाँ कोई व्यक्ति किसी दूसरे की खुशी के लिए अपनी स्वाभाविकता को त्याग देता है।

अर्थ: “दुम हिलाते फिरना” मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है किसी की खुशामद या चापलूसी करना। इसका इस्तेमाल तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी के प्रति अत्यधिक विनम्रता या सेवा भावना दिखाता है, खासकर लाभ या फायदे के लिए।

प्रयोग: यह मुहावरा अक्सर व्यंग्यात्मक रूप में प्रयोग किया जाता है, खासकर तब जब कोई व्यक्ति किसी उच्च पदस्थ व्यक्ति की अत्यधिक प्रशंसा या चापलूसी कर रहा हो।

उदाहरण:

-> अनुज अपने बॉस के सामने हमेशा “दुम हिलाते फिरते” हैं, उनकी हर बात पर हाँ में हाँ मिलाते हैं।

-> जब से मुनीश ने नई नौकरी पाई है, वह अपने मैनेजर के पीछे “दुम हिलाते फिरने” लगे हैं।

निष्कर्ष: “दुम हिलाते फिरना” मुहावरा हमें यह सिखाता है कि अपनी स्वाभाविकता को त्याग कर किसी की खुशामद करना न केवल अपने स्वाभिमान को कम करता है, बल्कि यह दूसरों के सामने भी हमारी छवि को प्रभावित करता है। यह मुहावरा हमें यह भी याद दिलाता है कि आत्म-सम्मान और ईमानदारी से काम करना ही वास्तविक सफलता की कुंजी है।

दुम हिलाते फिरना मुहावरा पर कहानी:

एक छोटे से कस्बे में अनुभव नाम का एक युवक रहता था। अनुभव की एक खासियत थी – वह जहाँ भी जाता, वहाँ के लोगों की अत्यधिक खुशामद करता। चाहे वह उसके दोस्त हों, उसका परिवार हो या उसके बॉस हों, अनुभव हमेशा “दुम हिलाते” रहता।

अनुभव का मानना था कि इससे वह लोगों का दिल जीत लेगा और उनका प्रिय बन जाएगा। लेकिन धीरे-धीरे, लोग उसकी इस आदत से परेशान होने लगे। उसके दोस्त उसे संगत से बचने लगे और उसके बॉस भी उसकी चापलूसी को नकारात्मक रूप में लेने लगे।

अनुभव को एहसास हुआ कि उसकी यह आदत उसे लोगों से दूर कर रही है। उसने महसूस किया कि सच्ची प्रशंसा और सम्मान तभी मिलता है जब व्यक्ति ईमानदार और सच्चा हो।

इस अनुभव के बाद, अनुभव ने अपनी आदतों में सुधार किया। वह अब लोगों की अनावश्यक खुशामद नहीं करता था और अपनी बातों में सच्चाई और ईमानदारी लाने लगा। इससे न केवल उसके रिश्तों में सुधार आया, बल्कि उसे अपने काम में भी बेहतर सम्मान और पहचान मिली।

अनुभव की कहानी हमें यह सिखाती है कि “दुम हिलाते फिरना” वास्तव में व्यक्ति की छवि को नकारात्मक रूप में प्रभावित करता है और यह कि ईमानदारी और सच्चाई ही सच्चे सम्मान की कुंजी है।

शायरी:

चापलूसी की राह में दुम हिलाते फिरते हैं,

जो खुद की छाया से भी डरते हैं।

खुशामद के दरिया में बहते जाना,

ये ज़िंदगी का नहीं, खुद का घाटा है।

जो दिल से बात नहीं, लबों से कहते हैं,

वो दुनिया में सच्ची मोहब्बत से रहते हैं।

अपने अस्तित्व को खोकर खुशी ढूंढने वाले,

ये नहीं जानते, खुद से बड़ा कोई नहीं।

दुम हिलाने की आदत से क्या हासिल होगा,

जो खुद के नहीं, वो औरों के कैसे होंगे।

 

दुम हिलाते फिरना शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of दुम हिलाते फिरना – Dum hilate firna Idiom:

Introduction: “Dum hilate firna” is a popular Hindi idiom often used to describe a person’s nature of flattery or sycophancy. This idiom expresses a situation where a person abandons their natural behavior to please someone else.

Meaning: The literal meaning of the idiom “Dum hilate firna” is to flatter or brown-nose someone. It is used when a person shows excessive politeness or a servile attitude towards someone, especially for personal gain or advantage.

Usage: This idiom is often used in a sarcastic manner, particularly when someone is excessively praising or flattering a higher-ranking person.

Example:

-> Anuj is always “Dum hilate firna” in front of his boss, agreeing with everything he says.

-> Ever since Munish got a new job, he has started “Dum hilate firna” behind his manager.

Conclusion: The idiom “Dum hilate firna” teaches us that flattering someone by abandoning our naturalness not only diminishes our self-respect but also affects our image in front of others. It also reminds us that self-respect and working with integrity are the real keys to success.

Story of ‌‌Dum hilate firna Idiom in English:

In a small town, there lived a young man named Anubhav. Anubhav had a peculiar habit – wherever he went, he excessively flattered the people there. Whether it was his friends, his family, or his boss, Anubhav was always seen “wagging his tail.”

Anubhav believed that this behavior would win people’s hearts and make him beloved to them. However, gradually, people began to get annoyed with this habit. His friends started avoiding him, and even his boss began to perceive his flattery negatively.

Anubhav realized that this habit was distancing him from people. He understood that genuine appreciation and respect are only earned when a person is honest and truthful.

After this realization, Anubhav changed his ways. He stopped unnecessarily flattering people and started bringing truth and honesty into his conversations. This not only improved his relationships but also earned him better respect and recognition at work.

Anubhav’s story teaches us that “wagging tail” actually negatively affects one’s image and that honesty and truthfulness are the real keys to true respect.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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