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दिमाग सातवें आसमान पर होना, अर्थ, प्रयोग(Dimag satve aasman par hona)

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अर्थ: दिमाग सातवें आसमान पर होना” एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है, जिसका अर्थ है किसी व्यक्ति का मन और ध्यान कहीं और लगा होना। हालांकि, यह मुहावरा अक्सर अहंकार या घमंड में भी प्रयोग होता है, जब कोई व्यक्ति अपनी प्रशंसा में इतना डूब जाता है कि वह औरों की भावनाओं और समझ को नकारता है।

उदाहरण:

-> अनुज ने अभी-अभी प्रोमोशन पाया है और अब उसका दिमाग सातवे आसमान पर है, वह अपने पुराने दोस्तों को अब महसूस ही नहीं करता।

-> अनीता ने एक छोटे से प्रतियोगिता में जीत हासिल की और अब वह सोच रही है कि वह सबसे बड़ी स्टार है। लगता है उसका दिमाग सातवे आसमान पर है।

व्याख्या: जब किसी को अधिक सफलता मिलती है या वह किसी बड़ी उपलब्धि को प्राप्त करता है, तो अक्सर वह अहंकार में आ जाता है और उसका दिमाग सातवे आसमान पर चला जाता है। वह औरों को तुच्छ मानने लगता है और अपनी ही प्रशंसा में डूबा रहता है।

निष्कर्ष: “दिमाग सातवें आसमान पर होना” अहंकार की एक स्थिति को दर्शाता है जहां व्यक्ति अपने आप को दूसरों से ऊपर मानता है। यह हमें यह सिखाता है कि सफलता आने पर भी हमें संवेदनशील रहना चाहिए और अपने आप को अधिक महत्वपूर्ण नहीं समझना चाहिए।

एक कहानी: दिमाग सातवें आसमान पर होना

सुरेंद्र एक स्कूल में अध्यापक था। उसकी पढ़ाई की तारीफ़ हर कोई करता था। वह हर विषय में माहिर था और उसे अध्यापन में भी विशेष रुचि थी। धीरे-धीरे, उसकी इसी प्रतिभा की वजह से वह प्रधानाध्यापक बन गया।

लेकिन इस पद के साथ आये सम्मान और स्थान ने सुरेंद्र को बदल दिया। अब वह अपनी तारीफ़ में इतना मस्त हो गया था कि उसका मानो दिमाग सातवे आसमान पर पहुँच गया। वह अब अपने साथी अध्यापकों की सलाह नहीं सुनता था और उनसे ऊपरी तरह से पेश आता।

एक दिन, स्कूल में एक समारोह हुआ। इस समारोह में सुरेंद्र को एक महत्वपूर्ण भाषण देना था। जब वह मंच पर पहुंचा, तो उसने अचानक अपनी तैयारी की नोट्स खो दी। वह हैरान और परेशान हो गया।

उस समय एक जुनियर अध्यापक ने उसे मदद की। उस अध्यापक ने पहले ही सुरेंद्र के भाषण की एक प्रति अपने पास रख ली थी जिससे वह उसे समझ सके। जब सुरेंद्र ने इसे देखा, तो उसे समझ में आया कि उसका अहंकार उसे कहाँ ले जा रहा था।

इस घटना के बाद, सुरेंद्र ने अपनी गलतियों को स्वीकार किया और सभी से माफी मांगी। उसने समझ लिया कि “दिमाग सातवें आसमान पर होना” से कितनी बड़ी मुश्किलें हो सकती हैं। उसने फिर से अपने जीवन में विनम्रता और समझदारी लाई।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि अहंकार से कितनी बड़ी समस्याएं उत्पन्न होती हैं और हमें अपने आप को ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं समझना चाहिए।

शायरी – Shayari

दिमाग सातवें आसमान पर रहता,

अहंकार में जीवन का मजा नहीं आता।

शायर ने कहा जिंदगी का फलसफा,

हर घमंडी को आता है अखिर में अपना वक्त।

 

दिमाग सातवें आसमान पर होना शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of दिमाग सातवें आसमान पर होनाDimag satve aasman par hona
Idiom:

Meaning:  “दिमाग सातवें आसमान पर होना” is a famous Hindi idiom, which means a person’s mind and attention are elsewhere. However, this phrase is often used to indicate arrogance or conceit, when someone becomes so engrossed in self-praise that they dismiss others’ feelings and understanding.

Usage:

-> Anuj just got a promotion, and now his mind seems to be on the seventh cloud; he no longer feels the same about his old friends. 

-> Anita won a small competition, and now she thinks she’s the biggest star. It seems her head is in the seventh heaven.

Discussion: Often, when someone achieves great success or attains a significant accomplishment, they become arrogant, and their mind reaches the seventh heaven. They start to consider others as insignificant and remain engrossed in their own praise.

Conclusion: The idiom “दिमाग सातवें आसमान पर होना” depicts a state of arrogance where a person sees themselves above others. It teaches us that even when success comes, we should remain empathetic and should not consider ourselves too important.

Story of ‌‌दिमाग सातवें आसमान पर होनाDimag satve aasman par hona Idiom:

Surinder was a teacher at a school. Everyone praised his teaching skills. He was an expert in every subject and had a particular interest in teaching. Gradually, due to his expertise, he became the principal of the school.

However, the respect and position that came with this post changed Surinder. He became so engrossed in his own praises that it seemed his mind had reached the seventh heaven. He no longer listened to the advice of his fellow teachers and began to treat them with indifference.

One day, there was a function at the school. Surinder had to give an important speech at this event. When he reached the stage, he suddenly lost his prepared notes. He was shocked and distressed.

At that moment, a junior teacher helped him. The teacher had already kept a copy of Surinder’s speech with him to understand it better. When Surinder saw this, he realized where his arrogance was leading him.

After this incident, Surinder acknowledged his mistakes and apologized to everyone. He understood the dangers of having one’s “head in the clouds.” He reintroduced humility and wisdom into his life.

From this story, we learn about the significant problems that can arise from arrogance, and we should not consider ourselves too important.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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