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ढोल की पोल खोलना अर्थ, प्रयोग(Dhol ki pol kholna)

“ढोल की पोल खोलना” एक लोकप्रिय हिंदी मुहावरा है, जिसका प्रयोग अक्सर उस स्थिति में किया जाता है जब किसी व्यक्ति या बात की असलियत या खोट सबके सामने आ जाती है। इस मुहावरे का उपयोग उन परिस्थितियों में होता है जहाँ किसी झूठ या धोखे का पर्दाफाश होता है।

परिचय: “ढोल की पोल खोलना” मुहावरा उस समय इस्तेमाल होता है जब किसी व्यक्ति या स्थिति की वास्तविकता सबके सामने आ जाती है। यह अक्सर तब प्रयोग किया जाता है जब कोई अपनी खामियों या गलतियों को छिपाने का प्रयास करता है और फिर भी उसकी असलियत सामने आ जाती है।

अर्थ: इस मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है – ढोल की पोल (ढोल का खालीपन) सबके सामने लाना। यह मुहावरा उस स्थिति को दर्शाता है जहां किसी की असलियत या झूठ सबके सामने आ जाती है।

प्रयोग: इस मुहावरे का इस्तेमाल तब होता है जब किसी व्यक्ति की नकली या धोखेबाज़ छवि का पर्दाफाश होता है। यह उन स्थितियों में प्रयोग किया जाता है जहाँ किसी के झूठ या बनावटी व्यवहार का सच सबके सामने आ जाता है।

उदाहरण:

-> जब सभी प्रमाण सामने आ गए तो राजन ने अपने मित्र की ‘ढोल की पोल खोल दी।’

-> कंपनी के ऑडिट में जब गड़बड़ियां सामने आईं, तो मैनेजर की ‘ढोल की पोल खुल गई।’

निष्कर्ष: “ढोल की पोल खोलना” मुहावरा हमें यह सिखाता है कि सच्चाई को छिपाने की कोशिश अक्सर असफल होती है और अंत में सच सामने आ ही जाता है। यह मुहावरा हमें यह भी बताता है कि झूठ या धोखे की नींव पर बनाई गई कोई भी छवि या स्थिति देर-सवेर सच के सामने ढह जाती है।

Hindi Muhavare Quiz

ढोल की पोल खोलना मुहावरा पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में एक धनी व्यापारी रहता था जिसका नाम था सुधीर। सुधीर अपने आपको बहुत दानी और परोपकारी बताता था। गाँव के लोग उसकी बातों में आकर उसे बहुत इज्जत देते थे।

एक दिन गाँव में बड़ी बाढ़ आई और कई लोग बेघर हो गए। गाँववालों को उम्मीद थी कि सुधीर उनकी मदद करेगा। सुधीर ने भी सबके सामने बड़ी-बड़ी बातें कीं कि वह हर पीड़ित परिवार को नया घर बनवाकर देगा।

लेकिन जब गाँववाले सुधीर के पास मदद मांगने गए, तो सुधीर ने कई बहाने बनाए और मदद करने से इनकार कर दिया। यह सुनकर गाँव के एक बुद्धिमान बुजुर्ग ने कहा, “अब हमें सुधीर की असलियत पता चल गई है। उसने हमेशा ‘ढोल की पोल खोलने’ का ढोंग किया।”

तब गाँव के लोगों ने एक साथ मिलकर एक-दूसरे की मदद की और नए सिरे से अपने घरों का निर्माण किया। सुधीर की सच्चाई सबके सामने आने के बाद उसे अपनी गलतियों का अहसास हुआ और उसने भी गाँववालों की मदद करनी शुरू की।

निष्कर्ष:

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि ‘ढोल की पोल खोलना’ का अर्थ है असलियत को सामने लाना। सुधीर की तरह, कई बार लोग बाहर से कुछ और दिखाई देते हैं, लेकिन उनकी असली प्रवृत्ति कुछ और ही होती है। यह मुहावरा हमें यह भी सिखाता है कि सच्चाई का सामना करना और अपनी गलतियों से सीखना महत्वपूर्ण है।

शायरी:

ढोल की पोल खुली जब, सच्चाई सामने आई,

जिनके चेहरे पे नकाब थे, उनकी असलियत छाई।

बातों के बादल थे जितने, निकले सब बरसात में,

ढोल की पोल खोली जब, सच ने ली अंगड़ाई।

जो दिखावे की महफिल में, बांटते फिरते थे सपने,

उनकी कहानियाँ खुली जब, सच की रौशनी आई।

ढोल की आवाज़ में, थी जो खोखली गूंज छिपी,

उसकी धुन में नकाबों का, नक्शा बदल जाई।

जिसने ढोल की पोल खोली, उसने दुनिया बदल दी,

सच की एक लहर में, झूठ की नाव डूब जाई।

 

ढोल की पोल खोलना शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of ढोल की पोल खोलना – Dhol ki pol kholna Idiom:

“ढोल की पोल खोलना” is a popular Hindi idiom used often in situations where the truth or flaw of a person or matter is exposed to everyone. This phrase is typically used when a lie or deception is revealed.

Introduction: The phrase “ढोल की पोल खोलना” is used when the reality of a person or situation is unveiled. It is often employed when someone tries to hide their faults or mistakes, yet their true nature is eventually revealed.

Meaning: The literal meaning of this idiom is – to expose the hollowness (emptiness) of a drum to everyone. It illustrates situations where someone’s reality or falsehood is brought to light.

Usage: This idiom is used when the fake or deceptive image of a person is uncovered. It is employed in situations where someone’s lies or pretentious behavior is revealed.

Example:

-> When all the evidence came out, Rajan exposed his friend’s ‘hollowness of the drum.’

-> When irregularities surfaced in the company’s audit, the manager’s ‘hollowness of the drum was revealed.’

Conclusion: The idiom “ढोल की पोल खोलना” teaches us that attempts to hide the truth often fail, and ultimately, the truth comes out. It also indicates that any image or situation built on the foundation of lies or deceit eventually collapses in the face of truth.

Story of ‌‌Dhol ki pol kholna Idiom in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a wealthy merchant named Sudhir. Sudhir often boasted about being very generous and philanthropic. The villagers, influenced by his words, respected him greatly.

One day, a massive flood hit the village, leaving many people homeless. The villagers hoped that Sudhir would help them. Sudhir made grand promises in public, claiming he would build new homes for every affected family.

However, when the villagers approached Sudhir for help, he made excuses and refused to assist them. Hearing this, a wise old man in the village said, “Now we know Sudhir’s true nature. He has always been ‘pretending to expose the truth’.”

Then, the villagers united to help each other and began rebuilding their homes from scratch. After his true nature was revealed, Sudhir realized his mistakes and started helping the villagers.

Conclusion:

This story teaches us that ‘exposing the truth’ means bringing reality to the forefront. Like Sudhir, people often appear different from the outside, but their true nature might be something else entirely. This idiom also teaches us the importance of facing the truth and learning from our mistakes.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

ढोल की पोल खोलना” का क्या महत्व है?

यह मुहावरा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके माध्यम से हम छिपे रहस्य को समझ सकते हैं और समस्याओं का हल निकाल सकते हैं।

इस मुहावरे का क्या अर्थ है?

इस मुहावरे का अर्थ होता है किसी समस्या या गुप्त बात को खोलकर सामने लाना।

क्या है “ढोल की पोल खोलना” मुहावरा?

“ढोल की पोल खोलना” एक हिंदी मुहावरा है जो वह स्थिति या रहस्य को खोलने के लिए प्रयास करता है जिसे लोगों ने छिपा रखा है।

क्या इस मुहावरे के कोई विपरीत अर्थ हैं?

नहीं, इस मुहावरे का कोई विपरीत अर्थ नहीं होता है।

क्या इस मुहावरे के किसी उपयोग हैं?

जी हां, यह मुहावरा व्यक्तिगत और सामाजिक संदर्भों में उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि राजनीतिक या सामाजिक मुद्दों को समझने में।

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