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दस्तरखान की बिल्ली अर्थ, प्रयोग(Dastarkhan ki billi)

“दस्तरखान की बिल्ली” एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है जिसका अर्थ होता है एक ऐसा व्यक्ति जो उपस्थित तो रहता है लेकिन बातचीत में भाग नहीं लेता या फिर अपनी राय व्यक्त नहीं करता। इस मुहावरे का उपयोग अक्सर उन स्थितियों में किया जाता है जहां किसी व्यक्ति की उपस्थिति महत्वपूर्ण नहीं होती या उसका योगदान नगण्य होता है।

परिचय: यह मुहावरा भारतीय संस्कृति के भोजन से जुड़े सामाजिक संदर्भ से निकला है। दस्तरखान, एक प्रकार की बड़ी चटाई या कपड़ा होता है जिस पर खाना परोसा जाता है। बिल्ली, जो अक्सर चुपचाप दस्तरखान के पास बैठी रहती है, किंतु खाने में भाग नहीं लेती, इस मुहावरे के केंद्र में है।

अर्थ: “दस्तरखान की बिल्ली” का शाब्दिक अर्थ है, वह बिल्ली जो भोजन के समय दस्तरखान पर मौजूद रहती है। लाक्षणिक रूप से, यह उस व्यक्ति को दर्शाता है जो मौजूद तो होता है परंतु सक्रिय रूप से भागीदारी नहीं करता।

प्रयोग: यह मुहावरा तब प्रयोग किया जाता है जब किसी व्यक्ति को उसकी निष्क्रियता या अनुपस्थिति के बावजूद उपस्थिति के लिए बताना हो। उदाहरण के लिए, एक बैठक में यदि कोई सदस्य मौजूद है लेकिन कोई योगदान नहीं दे रहा है, तो उसे ‘दस्तरखान की बिल्ली’ कहा जा सकता है।

उदाहरण:

-> सुभाष की कक्षा में उपस्थिति हमेशा अच्छी रहती है, लेकिन वह कभी भी चर्चा में भाग नहीं लेता, वह हमेशा ‘दस्तरखान की बिल्ली’ की तरह रहता है।

निष्कर्ष: यह मुहावरा समाज में उन लोगों के प्रति एक सूक्ष्म टिप्पणी करता है जो उपस्थित तो होते हैं लेकिन सक्रिय रूप से कोई भूमिका नहीं निभाते। यह हमें यह सिखाता है कि केवल उपस्थिति पर्याप्त नहीं होती; सक्रिय और सार्थक योगदान भी महत्वपूर्ण है।

Hindi Muhavare Quiz

दस्तरखान की बिल्ली मुहावरा पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में अमन नाम का एक लड़का रहता था। अमन की खासियत थी कि वह हमेशा सभी जगह मौजूद रहता था, चाहे वह स्कूल की कक्षा हो, खेल का मैदान हो या फिर गाँव की कोई सभा। लेकिन, अमन कभी भी इन गतिविधियों में सक्रिय भूमिका नहीं निभाता था। वह हमेशा एक कोने में चुपचाप बैठा रहता, न तो कुछ बोलता और न ही किसी चर्चा में हिस्सा लेता।

एक दिन गाँव में एक बड़ी पंचायत हुई जहाँ गाँव के सभी महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने थे। अमन वहाँ भी उपस्थित था। पंचायत में सभी गाँववाले अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे थे, लेकिन अमन वहीं एक कोने में बैठा था, चुपचाप।

इसी दौरान, गाँव के मुखिया ने अमन को देखा और कहा, “अमन, तुम हर जगह होते हो, लेकिन कभी भी कुछ कहते या करते नहीं। तुम्हारी उपस्थिति ‘दस्तरखान की बिल्ली’ जैसी है, जो हमेशा वहाँ होती है, लेकिन कभी भी खाने में या बातचीत में हिस्सा नहीं लेती।”

अमन ने मुखिया की बात सुनी और गहराई से सोचा। उसे एहसास हुआ कि सिर्फ उपस्थित होना काफी नहीं होता, जरूरी है कि वह भी अपने विचार व्यक्त करे और सक्रिय रूप से हिस्सा ले।

इस घटना के बाद, अमन ने अपने आप में बदलाव किया। वह न केवल उपस्थित रहता, बल्कि चर्चाओं में भाग लेने लगा, स्कूल में सवाल पूछने लगा और खेलों में भी सक्रिय रूप से भाग लेने लगा। अमन की यह बदलाव सभी के लिए प्रेरणा बन गया।

इस कहानी के माध्यम से, “दस्तरखान की बिल्ली” मुहावरे का अर्थ स्पष्ट होता है – कि किसी भी स्थिति में केवल उपस्थित होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

शायरी:

दस्तरखान की बिल्ली बनकर, बैठे हैं हर महफ़िल में,

खामोशी से कहानी कहते, बिना लफ्जों की तस्वीर में।

चुप्पी में भी बातें बहुत हैं, सुनने वाला चाहिए,

दिल में उठते तूफ़ानों को, जुबां पे लाना आजमाइए।

हर चेहरे में कहानी छुपी है, हर नज़र में एक सवाल,

उपस्थिति की भी अपनी भाषा है, हर खामोशी में एक जवाल।

बोलो तो दुनिया सुनती है, चुप रहो तो गुमनाम,

‘दस्तरखान की बिल्ली’ सा न बनो, अपनी कहो अनजान कहानी तमाम।

 

दस्तरखान की बिल्ली शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of दस्तरखान की बिल्ली – Dastarkhan ki billi Idiom:

“Dastarkhan ki billi” is a famous Hindi idiom which means a person who is present but does not participate in conversations or express their opinions. This idiom is often used in situations where a person’s presence is not significant or their contribution is negligible.

Introduction: This idiom originates from a social context related to food in Indian culture. ‘Dastarkhan’ refers to a large mat or cloth on which food is served. The cat, often sitting quietly near the dastarkhan but not partaking in the meal, is central to this idiom.

Meaning: Literally, “Dastarkhan ki billi” refers to the cat that is present on the dastarkhan during meal times. Figuratively, it represents a person who is present but does not actively participate.

Usage: This idiom is used when one needs to denote someone’s passivity or non-involvement despite being present. For example, in a meeting, if a member is present but not contributing, they can be referred to as ‘the cat on the dastarkhan’.

Example:

-> “Subhash always has good attendance in class, but he never participates in discussions, he always remains like ‘the cat on the dastarkhan’.”

Conclusion: This idiom subtly comments on those in society who are present but do not actively play a role. It teaches us that mere presence is not sufficient; active and meaningful contribution is also important.

Story of ‌‌Dastarkhan ki billi Idiom in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a boy named Aman. Aman had a peculiar trait – he was always present everywhere, be it in school classes, on the sports field, or at any village gathering. However, Aman never played an active role in these activities. He would always sit quietly in a corner, neither speaking nor participating in any discussions.

One day, a significant council meeting was held in the village where all the important decisions were to be made. Aman was present there as well. Everyone in the village was expressing their opinions, but Aman sat quietly in a corner.

During this time, the village head noticed Aman and said, “Aman, you are everywhere, but you never say or do anything. Your presence is like ‘the cat on the dastarkhan’, always there but never partaking in the meal or the conversation.”

Aman listened to the village head and thought deeply. He realized that just being present was not enough; it was important for him to express his thoughts and actively participate.

After this incident, Aman changed. He not only remained present but also started participating in discussions, asking questions in school, and actively taking part in games. Aman’s transformation became an inspiration for everyone.

Through this story, the meaning of the idiom “the cat on the dastarkhan” becomes clear – in any situation, merely being present is not sufficient; active participation is equally important.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

क्या दस्तरखान की बिल्ली का मुहावरा वास्तव में किसी बिल्ली के साथ कोई संबंध है?

नहीं, यह मुहावरा केवल भाषा में एक अभिव्यक्ति का रूप है और इसमें बिल्ली का कोई अर्थ नहीं होता है।

इस मुहावरे का उपयोग किस प्रकार किया जाता है?

इसे किसी व्यक्ति के व्यवहार को नकारात्मक रूप में संदर्भित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।


क्या है मुहावरा ‘दस्तरखान की बिल्ली’ का अर्थ?

यह मुहावरा किसी के स्वाभाविक या आदती गुणों को नकारात्मक ढंग से संकेतित करता है।

क्या इस मुहावरे के अलावा और कोई संबंधित मुहावरा है?

अच्छूत की दुकान’ एक ऐसा मुहावरा है जो किसी के असंगत व्यवहार को व्यक्त करता है।

क्या इस मुहावरे का कोई वास्तविक उदाहरण है?

हां, इसका उदाहरण हो सकता है कि कोई व्यक्ति जो आमतौर पर संजीवनी व्यक्तित्व का होता है, अचानक अत्यधिक क्रोधी या असहज बन जाता है।

हिंदी मुहावरों की पूरी लिस्ट एक साथ देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

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