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डकार जाना अर्थ, प्रयोग (Dakaar jana)

परिचय: “डकार जाना” एक लोकप्रिय हिंदी मुहावरा है जिसका प्रयोग अक्सर व्यंग्यात्मक और आलोचनात्मक संदर्भों में किया जाता है।

अर्थ: मुहावरे “डकार जाना” का शाब्दिक अर्थ होता है किसी चीज़ को पचा लेना। लेकिन, इसका प्रतीकात्मक अर्थ होता है किसी चीज का लाभ उठाकर उसे भुला देना या किसी का हक मारना। यह अक्सर उस स्थिति में प्रयोग किया जाता है जहां कोई व्यक्ति किसी और की मेहनत या संसाधनों का लाभ उठाकर उन्हें नजरअंदाज कर देता है।

प्रयोग: इस मुहावरे का प्रयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति को यह दर्शाना हो कि उसने किसी और की मेहनत का फायदा उठाया है और फिर उसे भुला दिया है।

उदाहरण:

-> मुनीश ने परियोजना में अपना योगदान दिया, लेकिन परियोजना संपन्न होने के बाद, प्रबंधक ने उसकी मेहनत को डकार जाने की तरह अनदेखा कर दिया।

-> कंपनी ने जिस तरह से छोटे व्यापारियों के विचारों को डकार जाना, उससे उनका मनोबल टूट गया।

निष्कर्ष: “डकार जाना” मुहावरा हमें यह सिखाता है कि किसी के प्रयासों या संसाधनों का अनुचित लाभ उठाना और फिर उन्हें नजरअंदाज कर देना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह व्यक्ति या समाज के लिए हानिकारक भी हो सकता है। यह मुहावरा हमें दूसरों की मेहनत और योगदान की सराहना करने की महत्वपूर्णता की याद दिलाता है।

इसके अलावा, “डकार जाना” हमें यह भी बताता है कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण होता है और उसे सम्मान के साथ देखा जाना चाहिए। अतः, इस मुहावरे का संदेश है कि हमें दूसरों के प्रयासों का उचित सम्मान और पहचान देनी चाहिए।

डकार जाना मुहावरा पर कहानी:

भारत के एक छोटे से, जीवंत गांव में एक विनम्र किसान रहता था, जिसका नाम सुरेंद्र था। वह अपनी मेहनत और उदारता के लिए जाना जाता था। एक वर्ष, जैसे ही बुवाई का मौसम आया, सुरेंद्र ने एक नए प्रकार के बीज की खोज की जो अधिक फसल का वादा करते थे। अपने सीमित संसाधनों के बावजूद, उसने ये बीज अपने साथी गांववालों के साथ बांटे, उम्मीद करते हुए कि यह पूरे समुदाय के लिए समृद्धि लाएगा।

जैसे-जैसे मौसम बढ़ा, बीज चमत्कारिक साबित हुए, उन्होंने पहले से कहीं अधिक बेहतरीन फसल दी। गांववाले खुशी से झूम उठे, उनके अनाज घर उपज से भर गए। हर्षोल्लास से भरा वातावरण था, और हर कोई अपनी मेहनत और जमीन की उर्वरता की प्रशंसा कर रहा था।

लेकिन, इस सब खुशी और उत्सव के बीच, एक भी व्यक्ति ने सुरेंद्र का धन्यवाद करने या उसके योगदान को मान्यता देने की बात नहीं सोची। उसका बीज बांटने कका कार्य, जो गांव की समृद्धि का मूल कारण था, अनदेखा कर दिया गया। सुरेंद्र निराश हुए लेकिन चुप रहे, और पहले की तरह ही अपने काम में समर्पित रहे।

गांव के एक बुजुर्ग ने, यह देखते हुए, सभी गांववालों को एकत्रित किया और उन्हें “वह आदमी जिसने अपने बीज बांटे” की कहानी सुनाई। उन्होंने कहानी का अंत करते हुए यह खुलासा किया कि सुरेंद्र वह आदमी थे। गांववाले अचानक समझ गए और उनमें कृतज्ञता और पछतावे की भावना जाग उठी। उन्हें अपनी खुशियों में इतने खो जाने का एहसास हुआ कि उन्होंने उस व्यक्ति को भूल गए थे जिसने उनकी समृद्धि के बीज बोए थे।

उस दिन से, गांववाले न केवल अपनी फसल का जश्न मनाते थे, बल्कि सुरेंद्र के निस्वार्थ कार्य का धन्यवाद और सम्मान भी करते थे। उन्होंने एक मूल्यवान सबक सीखा कि केवल सफलता के फलों का आनंद लेना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उन लोगों को याद करना और मान्यता देना भी ज़रूरी है जिन्होंने उसके बीज बोए थे।

यह कहानी “डकार जाना” मुहावरे के सार को दर्शाती है, जहां पहले गांववाले बीजों के फायदे उठाते हैं लेकिन सुरेंद्र के योगदान को मान्यता नहीं देते, ठीक उसी तरह जैसे किसी भोजन का आनंद लेने के बाद बस डकार लेना, उसके स्रोत या तैयारी के बारे में बिना सोचे।

शायरी:

बीज बोये थे जिन्होंने, उनकी याद आज भी नहीं,

फसलें लहलहाईं, पर उनका नाम आज भी नहीं।

वक्त की मेहरबानी है, या इंसानी फितरत का खेल,

डकार जाने की आदत में, खो गया है शुक्रिये का मेल।

दिलों में बसी है खुदगर्जी, जुबां पर नहीं है शुक्राना,

फसलों के दातार भूले, यही है वक्त का अफसाना।

उस बीज वाले की बात करें, जिसने सबको जीना सिखाया,

डकार जाने की रीत में, उसे ही हमने भुलाया।

 

डकार जाना शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of डकार जाना – Dakaar jana Idiom:

Introduction: “डकार जाना” is a popular Hindi idiom often used in sarcastic and critical contexts.

Meaning: The literal translation of the idiom “डकार जाना” is to digest something. However, its symbolic meaning is to reap the benefits of something and then forget it or to usurp someone’s rights. It is commonly used in situations where a person takes advantage of someone else’s efforts or resources and then ignores them.

Usage: This idiom is used when someone wants to point out that a person has taken advantage of someone else’s hard work and then forgotten about it.

Example:

-> Munish contributed to the project, but after its completion, the manager overlooked his hard work as if ‘डकार जाना’ (ignoring it like a belch).

-> The way the company ‘डकार जाना’ (ignored) the ideas of small traders broke their morale.

Conclusion: The idiom “डकार जाना” teaches us that taking unfair advantage of someone’s efforts or resources and then ignoring them is not only unethical, but it can also be harmful to the individual or society. This idiom reminds us of the importance of appreciating others’ hard work and contributions.

Additionally, “डकार जाना” also tells us that the contribution of every individual in society is important and should be respected. Thus, the message of this idiom is that we should give due recognition and respect to the efforts of others.

Story of ‌‌Dakaar jana Idiom in English:

In a small, lively village in India, there lived a humble farmer named Surendra. He was known for his hard work and generosity. One year, as the sowing season arrived, Surendra discovered a new type of seed that promised a more abundant harvest. Despite his limited resources, he shared these seeds with his fellow villagers, hoping it would bring prosperity to the entire community.

As the season progressed, the seeds turned out to be miraculous, yielding far better crops than ever before. The villagers rejoiced, their granaries filled with the bountiful produce. The atmosphere was filled with joy and celebration, with everyone praising their own efforts and the fertility of the land.

However, amidst all this happiness and celebration, not a single person thought to thank Surendra or acknowledge his contribution. His act of sharing the seeds, which was the root of the village’s prosperity, was overlooked. Surendra felt disheartened but remained silent, continuing to work with the same dedication as before.

Seeing this, an elder of the village gathered all the villagers and told them the story of “The Man Who Shared His Seeds.” At the end of the story, he revealed that Surendra was that man. The villagers suddenly understood and were filled with gratitude and remorse. They realized they had been so absorbed in their joy that they had forgotten the person who had sown the seeds of their wealth.

From that day on, the villagers not only celebrated their harvest but also thanked and honored Surendra for his selfless act. They learned an important lesson that it’s not only important to enjoy the fruits of success but also to remember and acknowledge those who planted the seeds.

This story exemplifies the essence of the idiom “डकार जाना,” where initially the villagers enjoyed the benefits of the seeds but did not acknowledge Surendra’s contribution, just like enjoying a meal and then simply belching, without a thought for its source or preparation.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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