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भेड़ की खाल मे भेड़िया अर्थ, प्रयोग (Bhed ki khal mein bhedia)

परिचय: “भेड़ की खाल में भेड़िया” एक लोकप्रिय हिंदी मुहावरा है जिसका उपयोग अक्सर उन परिस्थितियों में किया जाता है जहाँ किसी व्यक्ति का बाहरी रूप और आंतरिक स्वभाव में अंतर होता है। इसकी उत्पत्ति प्राचीन काल की कहानियों और कथाओं में मिलती है, जहां यह सिखाया जाता था कि बाहरी आवरण से किसी के असली चरित्र का निर्धारण नहीं किया जा सकता।

अर्थ: इस मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है – एक भेड़िया जो भेड़ की खाल पहन लेता है। परन्तु, इसका प्रतीकात्मक अर्थ बहुत गहरा है। यह उन व्यक्तियों या स्थितियों का वर्णन करता है जो बाहर से तो हानिरहित और मित्रवत प्रतीत होते हैं, लेकिन उनके अंदर छिपे उद्देश्य और इरादे कुछ और ही होते हैं।

प्रयोग: यह मुहावरा अक्सर राजनीति, सामाजिक जीवन, और व्यक्तिगत संबंधों में उपयोगी होता है जहाँ आवश्यकता होती है किसी व्यक्ति या संस्था के छिपे हुए इरादों को समझने की। यह व्यक्तियों की दोहरी प्रकृति और कपटी व्यवहार को दर्शाता है।

उदाहरण:

-> विनीत ने सोचा कि वह अपने नए पड़ोसी पर भरोसा कर सकता है, लेकिन बाद में पता चला कि वह तो “भेड़ की खाल में भेड़िया” था।

-> कंपनी में नए मैनेजर के आने के बाद, कर्मचारियों को लगा कि वह सहायक हैं, लेकिन उनकी असली मंशा “भेड़ की खाल में भेड़िया” जैसी निकली।

निष्कर्ष: “भेड़ की खाल में भेड़िया” मुहावरा हमें सिखाता है कि किसी के बाहरी रूप या आवरण पर आंख मूंद कर विश्वास न करें। यह हमें यह भी याद दिलाता है कि सतर्कता और गहरी समझ व्यक्तियों के असली इरादों को समझने में महत्वपूर्ण हैं। इस प्रकार, यह मुहावरा न केवल भाषा की शोभा बढ़ाता है, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण पाठ भी सिखाता है।

भेड़ की खाल में भेड़िया मुहावरा पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में सुधीर नाम का एक किसान रहता था। उसके पास एक सुंदर सा खेत था, जिसमें वह विभिन्न प्रकार की फसलें उगाया करता था। उसके खेत के पास ही एक घना जंगल था, जिसमें एक चालाक भेड़िया रहता था।

सुधीर के पास कुछ भेड़ें भी थीं, जिन्हें वह बहुत प्यार करता था। लेकिन उसे इस बात का डर सताता था कि कहीं जंगल का भेड़िया उसकी भेड़ों को ना खा जाए। इसलिए वह हमेशा सतर्क रहता था।

एक दिन, भेड़िया ने सुधीर की भेड़ों पर हमला करने का निश्चय किया। लेकिन वह जानता था कि सीधे हमला करने पर सुधीर और गाँव वाले उसे मार देंगे। इसलिए उसने एक चालाक योजना बनाई। उसने एक मरी हुई भेड़ की खाल को पहन लिया और धीरे-धीरे सुधीर की भेड़ों के बीच में घुस गया।

सुधीर को उस पर शक नहीं हुआ, क्योंकि वह भेड़िया भेड़ की खाल में छुपा हुआ था। जब रात हुई, और सभी सो गए, तब भेड़िया ने एक-एक करके सुधीर की भेड़ों को मारना शुरू कर दिया।

लेकिन एक रात, जब भेड़िया एक भेड़ को मार रहा था, तब सुधीर की नजर उस पर पड़ गई। सुधीर ने तुरंत गाँव वालों को जगाया और सभी ने मिलकर भेड़िये को पकड़ लिया।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि किसी के बाहरी रूप पर अंधा विश्वास नहीं करना चाहिए। कभी-कभी, लोग या परिस्थितियाँ “भेड़ की खाल में भेड़िया” की तरह होती हैं, जो बाहर से तो भली-भांति दिखती हैं, लेकिन अंदर से उनके इरादे कुछ और ही होते हैं।

शायरी:

दुनिया की रीत निराली है, हर शक्ल पे नकाब है,

भेड़ की खाल में भेड़िये, ये राज खुला किताब है।

भरोसा जब टूटता है, तो आहट भी सुनाई दे,

वो चेहरे जो दिखते मासूम, अक्सर वहीं गुनाही दे।

अंदर की बात कुछ और, बाहर का रूप कुछ और,

जहाँ दिल में हो फरेब, वहाँ मुहब्बत का सुरूर कुछ और।

ये दुनिया रंगीन बहुत, पर हर रंग में छुपे फसाने,

भेड़ की खाल में जो छुपे, उनसे रास्ते अपने बचाने।

आँखों के जाल में न फंसना, हर चेहरे पर ना ऐतबार करना,

जो दिखे मासूम चेहरा, उस पर भी जरा गौर करना।

कहानियों का सबक यही, चेहरे पे न जाओ,

जो दिखे भेड़ सा साफ, हो सकता है भेड़िया छुपा हो ।

 

भेड़ की खाल में भेड़िया शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of भेड़ की खाल मे भेड़िया – Bhed ki khal mein bhedia Idiom:

Introduction: “Bhed ki khal mein bhedia” is a popular Hindi idiom often used in situations where there is a difference between a person’s outward appearance and inner nature. Its origins are found in ancient stories and tales, where it was taught that one’s true character cannot be determined by their external appearance.

Meaning: The literal meaning of this idiom is – a wolf that wears the skin of a sheep. However, its symbolic meaning is much deeper. It describes those individuals or situations that appear harmless and friendly on the outside, but their hidden purposes and intentions are quite different.

Usage: This idiom is often useful in politics, social life, and personal relationships where it is necessary to understand the hidden intentions of a person or an institution. It reflects the dual nature and deceptive behavior of individuals.

Example:

-> Vineet thought he could trust his new neighbor, but later found out that he was a “Wolf in Sheep’s Clothing.”

-> After the arrival of the new manager in the company, the employees thought he was supportive, but his real intention turned out to be like a “Wolf in Sheep’s Clothing.”

Conclusion: The idiom “Bhed ki khal mein bhedia” teaches us not to blindly trust someone’s external appearance or cover. It also reminds us that vigilance and deep understanding are important in comprehending the true intentions of individuals. Thus, this idiom not only enhances the beauty of the language but also teaches important lessons in life.

Story of ‌‌Bhed ki khal mein bhedia Idiom in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a farmer named Sudhir. He owned a beautiful farm where he cultivated various types of crops. Near his farm was a dense forest, inhabited by a cunning wolf.

Sudhir also had some sheep, which he loved dearly. However, he always feared that the wolf from the forest might prey on his sheep. Therefore, he remained vigilant at all times.

One day, the wolf decided to attack Sudhir’s sheep. Knowing that a direct attack would lead to his death at the hands of Sudhir and the villagers, the wolf devised a cunning plan. He disguised himself by wearing the skin of a dead sheep and slowly infiltrated Sudhir’s flock.

Sudhir did not suspect anything because the wolf was hidden in sheep’s clothing. When night fell and everyone was asleep, the wolf began to kill Sudhir’s sheep one by one.

However, one night, as the wolf was attacking a sheep, Sudhir caught sight of him. Sudhir immediately woke up the villagers, and together they captured the wolf.

This story teaches us not to blindly trust outward appearances. Sometimes, people or situations are like a “Wolf in Sheep’s Clothing,” appearing benign on the outside but harboring different intentions inside.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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