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बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की अर्थ, प्रयोग(Band mutthi lakh ki aur khuli to khak ki)

परिचय: “बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की” यह हिंदी मुहावरा है जो अवसरों के मूल्य और उनके सही समय पर उपयोग करने की महत्ता को दर्शाता है।

अर्थ: इस मुहावरे का अर्थ है कि जब तक अवसर हाथ में होता है, तब तक उसका मूल्य बहुत होता है, लेकिन एक बार वह चला जाए तो उसका कोई मूल्य नहीं रह जाता। यह मुहावरा सही समय पर सही कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर देता है।

प्रयोग: इस मुहावरे का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति को अवसरों का महत्त्व समझाना होता है और यह बताना होता है कि अवसर का सही समय पर उपयोग करना कितना जरूरी है।

उदाहरण:

-> जब अनुज को एक बड़ी कंपनी से नौकरी का प्रस्ताव मिला, लेकिन उसने बहुत सोचने के चक्कर में वह मौका गंवा दिया, तो उसके मित्र ने कहा, “देख लिया न, बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की।”

-> जब एक किसान ने अपनी फसल उच्चतम बाजार मूल्य पर नहीं बेची और बाद में कीमतें गिर गईं, तो पड़ोसी ने कहा, “यही होता है जब ‘बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की’।”

निष्कर्ष: “बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की” मुहावरा हमें यह सिखाता है कि जीवन में मिलने वाले अवसरों का महत्त्व समझना और उनका सही समय पर उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। यह हमें बताता है कि अवसरों को खो देने पर उनका मूल्य नहीं रह जाता और सही समय पर कदम न उठाने का परिणाम नुकसानदेह हो सकता है।

Hindi Muhavare Quiz

बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की मुहावरा पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में सुरेंद्र नामक एक युवक रहता था। सुरेंद्र एक सपने के साथ बड़ा हुआ था – वह एक दिन बड़ा व्यापारी बनना चाहता था। उसके पास अच्छी बुद्धि और व्यापार की अच्छी समझ थी।

एक दिन, सुरेंद्र के पास एक बड़ा अवसर आया। एक दूर के शहर से एक व्यापारी ने उसे साझेदारी का प्रस्ताव दिया। यह प्रस्ताव सुरेंद्र के लिए लाखों कमाने का अवसर था। लेकिन सुरेंद्र को इस प्रस्ताव में कुछ जोखिम नजर आया और वह इसे स्वीकार करने में हिचकिचाने लगा।

सुरेंद्र ने इस प्रस्ताव पर विचार करने में बहुत समय लगा दिया। आखिरकार, जब उसने इसे स्वीकार करने का फैसला किया, तब तक व्यापारी ने किसी और के साथ साझेदारी कर ली थी। सुरेंद्र को बहुत पछतावा हुआ।

उसके एक बुजुर्ग मित्र ने उसे समझाया, “सुरेंद्र, तुम्हें यह समझना होगा कि ‘बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की’। जब अवसर तुम्हारे हाथ में था, तब उसकी कीमत थी, लेकिन अब वह चला गया है, तो उसका कोई मूल्य नहीं रहा।”

सुरेंद्र ने इस घटना से सीख ली और फिर से कभी भी अवसर को नहीं गंवाया। उसे समझ में आ गया था कि जीवन में मिलने वाले अवसरों का महत्त्व होता है और उन्हें सही समय पर पकड़ना जरूरी होता है।

शायरी:

बंद मुट्ठी में छिपे ख्वाबों की बात करते हैं,

खुली तो ख़ाक में बदल जाते हैं ये राज़ करते हैं।

जिंदगी के सफर में कई रंग हैं बिखरे हुए,

कभी खुशी, कभी ग़म, ये पल दो पल के हैं जुए।

‘बंद मुट्ठी लाख की’ कहकर सपने संजोते हैं,

पर खुली तो ख़ाक में, हर इक ख्वाब रोते हैं।

वक्त के पन्नों पर लिखी तकदीर की ये दास्ताँ,

हर दाने में छिपा है नाम, ये खेल है कुदरत का बयाँ।

मुट्ठी में बंद लाख की चमक, है सबकी आरज़ू,

पर खुली तो ख़ाक में बदलती, ये जिंदगी की रफ़्तार है तू।

हर पल को जी लेना यारों, यही तो है जीने की कला,

‘बंद मुट्ठी लाख की’ सोच, ज़िंदगी का है ये जवाला।

 

बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की – Band mutthi lakh ki aur khuli to khak ki Idiom:

Introduction: “बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की” is a popular Hindi idiom that illustrates the value of opportunities and the importance of utilizing them at the right time.

Meaning: The literal meaning of this idiom is that as long as an opportunity is in hand, it holds great value, but once it is gone, it becomes worthless. This proverb emphasizes the necessity of taking appropriate actions at the right moment.

Usage: This idiom is used when one needs to explain the importance of opportunities to someone and convey how crucial it is to utilize opportunities at the right time.

Usage:

-> When Anuj received a job offer from a big company but lost the opportunity due to overthinking, his friend said, “See, this is what happens when ‘बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की’ (a closed fist is worth lakhs, but once opened, it’s worthless).”

-> When a farmer didn’t sell his crop at the highest market price and later the prices fell, the neighbor said, “This is what happens when ‘बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की’.”

Conclusion: The proverb “बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की” teaches us the importance of recognizing and utilizing life’s opportunities at the right moment. It tells us that the value of opportunities is lost once they are gone and failing to act at the right time can lead to detrimental consequences.

Story of ‌‌Band mutthi lakh ki aur khuli to khak ki Idiom in English:

In a small village, there lived a young man named Surendra. He had grown up with a dream – to become a successful businessman one day. He was intelligent and had a good understanding of business.

One day, Surendra received a significant opportunity. A businessman from a distant city offered him a partnership. This proposal could have earned Surendra a fortune, but he saw some risks in it and hesitated to accept.

Surendra spent a lot of time pondering over the proposal. By the time he decided to accept it, the businessman had already partnered with someone else. Surendra was filled with regret.

An elderly friend of his explained, “Surendra, you must understand that ‘बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की’ (a closed fist is worth a lot, but once opened, it’s worthless). When the opportunity was in your hands, it had value, but now that it’s gone, it’s worthless.”

Surendra learned from this incident and never missed an opportunity again. He realized the importance of seizing opportunities in life at the right moment.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

FAQs:

इस मुहावरे का उपयोग व्यावसायिक संदर्भों में कैसे हो सकता है?

व्यावसायिक दृष्टि से, इस मुहावरे का अर्थ हो सकता है कि किसी संबंध को सुरक्षित रखने से ही उसका मूल्य है। लेकिन उसे खोलने पर उसकी महत्वपूर्णता कम हो सकती है।

इस मुहावरे का उपयोग किस संदर्भ में किया जा सकता है?

यह मुहावरा उस स्थिति को व्यक्त करने के लिए कार्यक्षेत्रों में हो सकता है जहाँ संरक्षित या निर्लौल्य रूप से रखी गई चीज़ की बात हो रही हो, जैसे कि निवेश या संबंध।

बंद मुट्ठी लाख की और खुली तो ख़ाक की” का मतलब क्या है?

इस मुहावरे का अर्थ है कि जब किसी चीज़ को संरक्षित रखा जाता है, तो उसका मूल्य बढ़ जाता है, लेकिन जब वह छूट जाता है तो उसका कोई महत्व नहीं रहता।

इस मुहावरे का उत्पत्ति से संबंधित कोई किस्सा है?

कोई निश्चित किस्सा नहीं मिलता है, लेकिन इस मुहावरे का अवलोकन भारतीय सांस्कृतिक और लोककथाओं में मिलता है।

क्या इस मुहावरे का कोई विरोधाभास है?

नहीं, यह मुहावरा कोई विरोधाभास नहीं रखता है, बल्कि यह एक सत्यापन है कि समय के साथ कुछ चीज़ों का मूल्य बदल सकता है।

हिंदी मुहावरों की पूरी लिस्ट एक साथ देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

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