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आग लगने पर कुआँ खोदना, अर्थ, प्रयोग(Aag lagne par kua khodna)

परिचय: “आग लगने पर कुआँ खोदना” हिंदी भाषा में एक प्रसिद्ध मुहावरा है जिसका अर्थ है किसी समस्या का समाधान तभी खोजना जब समस्या उत्तराधिकारी बन चुकी हो। इसे आमतौर पर उस समय का संदर्भ में प्रयोग किया जाता है जब कोई व्यक्ति या समुदाय समस्या का समाधान तलाशता है जब वह पहले से ही बहुत बड़ा बन चुका हो।

अर्थ: जब तक समस्या बड़ी न हो, तब तक उसे अनदेखा करना और जब वह समस्या विशाल हो जाए तो उसके लिए तत्पर समाधान खोजना।

उदाहरण:

-> वायरस संक्रमण की शुरुआती चेतावनी नकारते हुए, जब संक्रमण बढ़ गया तो सरकार ने टीका वितरण में तेजी लाई। यहाँ पर भी ‘आग लगने पर कुआँ खोदने’ की बात हुई।

-> जब राजेश को समझाया गया कि वह धूम्रपान छोड़ दे तो उसने नकारा। लेकिन जब उसे सांस की समस्या हुई, तो उसने धूम्रपान छोड़ने का निर्णय लिया। इसे कहते हैं ‘आग लगने पर कुआँ खोदना’।

प्रयोग: हमें चाहिए कि हम समस्याओं को शुरुआती चरण में ही समझें और उनका समाधान पाएं, ताकि हमें बाद में ‘आग लगने पर कुआँ खोदने’ की स्थिति न हो।

विशेष टिप्पणी: यह मुहावरा हमें यह सिखाता है कि हमें चाहिए कि हम समस्याओं का समाधान समय समय पर पाएं, न कि वह बड़ी होने पर।

आशा है कि आपको “आग लगने पर कुआँ खोदना” मुहावरे के बारे में जानकारी पसंद आई होगी। और हिंदी भाषा की अन्य रोचक जानकारियों के लिए बुद्धिमान.कॉम पर जाएं। धन्यवाद!

अगर आपको इस मुहावरे से संबंधित किसी अन्य जानकारी की जरूरत हो, तो कृपया हमें बताएं। धन्यवाद!

आग लगने पर कुआँ खोदना मुहावरा पर कहानी:

गाँव के बीच में एक छोटा सा तालाब था। यह तालाब गाँववालों के लिए प्रमुख जल स्रोत था। लेकिन धीरे-धीरे तालाब का पानी सूखने लगा था, और इस पर गाँववालों को चिंता होनी चाहिए थी।

मोहन, गाँव का एक युवक, बार-बार गाँव सभा में इस समस्या को उठाता और बाकी गाँववालों से अनुरोध करता कि तालाब की देखभाल की जाए। लेकिन उसकी चिंताओं को बाकी लोग अनदेखा कर देते। उन्हें लगता था कि पानी तो प्राकृतिक है, और वह वापस आ जाएगा।

महीने गुजरते गए, और एक दिन आया जब तालाब पूरी तरह से सूख गया। अब गाँववालों को जल संकट का सामना करना पड़ा। उन्होंने तभी समझा कि मोहन की चेतावनी कितनी महत्वपूर्ण थी।

अब गाँववालों ने ताज़ा पानी की खोज शुरू की। कुछ लोग दूसरे गाँव से पानी लाने लौटे, कुछ नए कुएँ खोदने लगे। मोहन ने उन्हें देखते हुए कहा, “आग लगने पर कुआँ खोदना अच्छा नहीं होता।”

इस घटना ने गाँववालों को सिखाया कि समस्याओं का समाधान उन्हें शुरुवाती चरण में ही खोजना चाहिए। अगर वे पहले ही मोहन की बातों पर ध्यान देते, तो उन्हें बाद में इतनी समस्या नहीं होती।

और इसी तरह, इस छोटी सी कहानी ने हमें यह सिखाया कि ज़िंदगी में जब भी समस्या आए, हमें उसका समाधान तुरंत खोजना चाहिए, न कि बाद में।

शायरी:

आग की जलन में भी, सुकून ढूंढते चले गए,

जब जरूरत पड़ी तो, कुआँ के किनारे पहुंचे थे।

ज़िन्दगी की राह में, शायरी की खोज में भटकती,

वक्त की चोट से समझे, “आग लगने पर कुआँ खोदना” ये सत्य था।

 

आग लगने पर कुआँ खोदना शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of आग लगने पर कुआँ खोदना – Aag lagne par kua khodna Idiom:

Meaning:  The phrase “Aag lagne par kua khodna” is a renowned idiom in the Hindi language, signifying the act of seeking solutions only when the problem becomes unmanageable. It’s typically invoked when an individual or a community seeks a solution to a problem that has already escalated significantly.

Ignoring a problem until it becomes massive, and then hurriedly seeking a solution for it.

Examples:

-> The government was slow to heed initial warnings about the virus infection. Only when the spread escalated did they ramp up vaccine distribution. This situation is akin to “Aag lagne par kua khodna.”

-> Rajesh was advised to quit smoking but he refused. However, when he developed breathing issues, he decided to quit. This behavior aligns with the idiom “Aag lagne par kua khodna.”

Explanation: We should recognize and resolve problems in their initial stages to avoid situations where we’re “Aag lagne par kua khodna.”

Special Note: This idiom teaches us that we should find solutions to problems in a timely manner rather than waiting for them to grow.

We hope you found the information about the idiom “Aag lagne par kua khodna’ ‘ enlightening. For more fascinating insights into the Hindi language, visit budhimaan.com. Thank you!

Story of ‌‌Aag lagne par kua khodna in English:

In the heart of a village lay a small pond. It served as the primary source of water for the villagers. However, over time, the water in the pond began to recede, which should have been a growing concern for the villagers.

Mohan, a young man from the village, consistently raised this issue in village meetings. He repeatedly urged his fellow villagers to care for and maintain the pond. However, his concerns were largely ignored. Most believed that water was natural and would eventually replenish itself.

Months passed, and there came a day when the pond dried up completely. The villagers now faced a water crisis. Only then did they realise the significance of Mohan’s warnings.

In search of fresh water, some villagers returned with water from neighbouring villages, while others began digging new wells. Observing them, Mohan commented, “It’s not wise to aag lagne par kua khodna.”

This incident taught the villagers a lesson: they should seek solutions to problems at the outset. Had they heeded Mohan’s advice earlier, they wouldn’t have faced such a crisis later.

And in this way, this simple tale reminds us that whenever problems arise in life, we should seek solutions immediately, not later.

 

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